{"_id":"618bc18f52c8a70f9b7fba59","slug":"indore-4-yr-old-die-from-fire-of-a-lamp","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंदौर: दीये से खेल रही थी मासूम, कपड़ों में लगी और बुझ गई जिंदगी की लौ..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंदौर: दीये से खेल रही थी मासूम, कपड़ों में लगी और बुझ गई जिंदगी की लौ..
Wed, 10 Nov 2021 06:26 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 10 Nov 2021 06:26 PM IST
सार
इंदौर में दीये से खेल रही चार साल की मासूम के कपड़ों में आग लग गई। उस समय वह तुलसी के पौधे के पास लगे दीये के पास अकेली थी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तुलसी के दीये से खेल रही एक मासूम की जिंदगी की लौ बुझ गई। दीये की चपेट में आकर वह बुरी तरह झुलस गई। उसे अस्पताल ले गए लेकिन बचाया नहीं जा सका। अब परिवार सदमे में है।
घटना महेश यादव नगर की है। चार साल की श्रुति घर की छत पर खेल रही थी। छत पर तुलसी का पौधा रखा है जहां दीया जल रहा था। खेलते-खेलते श्रुति दीये के पास पहुंच गई। इसी दौरान दीये की लौ से उसके कपड़े में आग लग गई। आग बढ़ने पर श्रुति चिल्लाई लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। जब तक लोग बचाने आए तब तक वह करीब 90 फीसदी से अधिक झुलस चुकी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। श्रुति के पिता का नाम जितेंद्र है। माता-पिता दोनों काम के लिए फैक्टरी जाते हैं। घर में दादाजी थे जो घटना के समय सो रहे थे। बच्ची के शोर से उनकी नींद खुली। पड़ोसी भी पहुंचे मगर तब तक देर हो चुकी थी।
विज्ञापन
घटना महेश यादव नगर की है। चार साल की श्रुति घर की छत पर खेल रही थी। छत पर तुलसी का पौधा रखा है जहां दीया जल रहा था। खेलते-खेलते श्रुति दीये के पास पहुंच गई। इसी दौरान दीये की लौ से उसके कपड़े में आग लग गई। आग बढ़ने पर श्रुति चिल्लाई लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। जब तक लोग बचाने आए तब तक वह करीब 90 फीसदी से अधिक झुलस चुकी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। श्रुति के पिता का नाम जितेंद्र है। माता-पिता दोनों काम के लिए फैक्टरी जाते हैं। घर में दादाजी थे जो घटना के समय सो रहे थे। बच्ची के शोर से उनकी नींद खुली। पड़ोसी भी पहुंचे मगर तब तक देर हो चुकी थी।
विज्ञापन
