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गर्भवती महिला को अस्पताल ने नहीं दिया स्ट्रेचर, जन्म लेते ही हुई बच्चे की मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Updated Sat, 03 Feb 2018 08:42 AM IST
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संसद भवन में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बजट होने का दावा करते हुए एक बहुत बड़ी राशि साल 2018-19 के लिए आवंटित की है। लेकिन उसी दिन हमारी लचर हेल्थ सिस्टम की सच्चाई की पोल मध्यप्रदेश से आई। जहां स्ट्रेचर ना मिलने की वजह से एक मां को जन्म देते ही अपने बच्चे की मौत का साक्षी बनना पड़ा। यह घटना मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की है।
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बुधवार को 25 साल की नीलू वर्मा जो खुद एक ट्रेन नर्स हैं, उन्हें बैतूल के जिला अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं करवाया गया। उसे प्रसवपूर्व देखभाल वार्ड में अस्पताल की अटेंडेंट ने प्रसव पीड़ा में चहलकदमी करने के लिए कहा। चलने के दौरान ही नीलू ने बच्चे को जन्म दे दिया। जिसकी वजह से बच्चा जमीन पर गिरा और उसकी मौत हो गई। अब पीड़िता उस पोस्टमार्टम रिपोर्ट को समझने में असमर्थ है जिसमें बच्चे की मौत का कारण जमीन पर गिरना नहीं बल्कि जन्म लेते ही मृत्यु हो जाना लिखा है।
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बैतूल में नीलू के साथ घटित हुई घटना से पहले उसे घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने जिला अस्पताल रेफर किया था, जहां उसका दावा है कि कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। पीड़िता के बच्चे की मौत और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा उसे बैतूल रेफर किए जाने की फिलहाल जांच चल रही है।
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नीलू के पति विकास वर्मा ने कहा- लापरवाह कर्मचारी और सरकारी सिस्टम इसके लिए जिम्मेदार है। अगर मेरे पास समय होता तो मैं उसे निजी अस्पताल ले जाता। उन्होंने आगे बताया- यदि प्रसूता को जिस एंबुलेंस में लाया गया था उसी से ही स्ट्रेचर या व्हील चेयर में ले जाया जाता तो बच्चा नीचे नहीं गिरता और ना ही उसकी मौत होती। अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से हमारी खुशियां मातम में बदल गई हैं।
