दिग्विजय को हाईकोर्ट की कड़ी फटकार
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यापम घोटाला मसले पर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की याचिका खारिज करते हुए सही ढंग से अपील नहीं करने पर फटकार लगाई है।
कांग्रेस नेता को विधिवत तरीके से याचिका दाखिल करने को कहते हुए डिवीजनल बेंच ने कहा कि अदालतें राजनीति का अखाड़ा नहीं हैं और राजनीतिक विवादों में अदालतों को शामिल नहीं करना चाहिए।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सिंह ने ट्वीट कर कहा कि वह वकीलों से परामर्श लेकर तय करेंगे कि हाईकोर्ट में ही नई याचिका दाखिल की जाए अथवा सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई जाए।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने व्यापम घोटाले के संबंध में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी कि पत्र का हाईकोर्ट संज्ञान ले।
अब क्या करेंगे दिग्विजय सिंह?
हाईकोर्ट ने पत्र को याचिका के रूप में स्वीकार भी किया था, लेकिन सोमवार को जब इस पर सुनवाई हुई तो कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
चीफ जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस आलोक अराधे की डिवीजनल बेंच का कहना था कि हाईकोर्ट तक पहुंचने का दिग्विजय सिंह का ये तरीका ठीक नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा है कि अगर वह चाहे तो नियमित रूप से और कायदे से एक याचिका हाईकोर्ट में दायर कर सकते हैं। कोर्ट के फैसले के बाद दिग्गी के वकील ने कहा कि वह एक हफ्ते के भीतर इस पत्र में उठाए गए तमाम बिंदुओं के साथ विधिवत याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में दायर करेंगे।
बाद में दिग्विजय सिंह ने ट्वीट जारी कर कहा कि उनके पास दो ही विकल्प बचे हैं कि वे हाईकोर्ट में नई याचिका दायर करें अथवा सुप्रीम कोर्ट में अपील करें। वह वकीलों से परामर्श करने के बाद इस बारे में फैसला करेंगे।
दिग्विजय सात दिन के उपवास पर बैठे
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच की मांग और किसानों को बर्बाद हुई फसल का अभी तक मुआवजे का भुगतान नहीं होने के विरोध में सोमवार को कलेक्ट्रेट के पास सात दिन का उपवास शुरू किया।
उपवास शुरू करने से पहले एक प्रतिनिधिमंडल के साथ कांग्रेस नेता ने जिला कलेक्टर संदीप यादव से मुलाकात की और 20 जून को लिखे गए पत्र पर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
कलेक्टर के यह बताए जाने पर कि 20 जून के बाद अभी तक किसी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया है, सिंह ने उपवास करने का फैसला लिया। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया।
