व्यापमं मामला: ग्वालियर में सीबीआई अदालत ने छह दोषियों को पांच साल जेल की सजा सुनाई, 3700 रुपये का जुर्माना भी लगाया
ग्वालियर में व्यापमं मामलों के विशेष न्यायाधीश ने परवेज खान उर्फ परवेज आलम तथा प्रदीप उपाध्याय (दूसरों की जगह परीक्षा देने वाले), राजेश बघेल और अवधेश कुमार (अभ्यर्थी) और हरी नरायण सिंह तथा वेद रतन सिंह (बिचौलिए) को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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मध्यप्रदेश के चर्चित व्यापमं मामले में ग्वालियर की सीबीआई अदालत ने छह दोषियों को सजा सुना दी है। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने व्यापमं मामले में अभ्यर्थियों और बिचौलियों समेत छह दोषियों को पांच साल की जेल की सजा सुनाई है।
ग्वालियर में व्यापमं मामलों के विशेष न्यायाधीश ने परवेज खान उर्फ परवेज आलम तथा प्रदीप उपाध्याय (दूसरों की जगह परीक्षा देने वाले), राजेश बघेल और अवधेश कुमार (अभ्यर्थी) और हरी नरायण सिंह तथा वेद रतन सिंह (बिचौलिए) को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्री-मेडिकल परीक्षा-2010 (पीएमटी-2010) से संबंधित मामले में प्रत्येक दोषियों पर 3,700 रुपये का जुर्माना भी लगाया। बता दें कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिसंबर 2015 में मामला दर्ज किया था और जांच शुरू की थी।
20 जून 2010 में गुना में आयोजित पीएमटी परीक्षा में उपाध्याय और खान मूल उम्मीदवार कुमार तथा बघेल के स्थान पर बैठे थे और पर्यवेक्षकों ने उन्हें पकड़ लिया था। सीबीआई जांच से पता चला है कि बघेल और कुमार ने ही पीएमटी-2010 के लिए ऑफलाइन मोड में बिचौलिए हरि नारायण सिंह के माध्यम से आवेदन किया था, जिसमें टेस्ट एडमिट कार्ड (टीएसी) की डिलीवरी की सुविधा के लिए एक सामान्य पता दिया गया था। सीबीआई ने परवेज खान का पता लगाया और फरवरी 2017 में उसे गिरफ्तार कर लिया।
उनकी जांच की गई और उनके नमूना हस्ताक्षर, लिखावट और अंगूठे के निशान के साथ-साथ उपाध्याय के नमूना हस्ताक्षर, लिखावट और अंगूठे का निशान प्राप्त किया और विशेषज्ञ राय के लिए केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) को भेजा गया। जांच में यह पाया गया कि बघेल और कुमार परीक्षा में शामिल नहीं हुए, बल्कि उनकी जगह परीक्षा देने वाले खान और उपाध्याय की लिखावट और अंगूठे का निशान उत्तर-पुस्तिकाओं में पाया गया।
जांच के दौरान हरि नारायण सिंह और वेद रतन सिंह (दोनों बिचौलिए) से भी पूछताछ की गई। जांच पूरी होने के बाद अगस्त 2017 में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद निचली अदालत ने आरोपियों को दोषी पाया और दोषी करार दिया।
