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Judge Car Case: दोनों छात्रों को मिली जमानत, मानवीय संवेदना के आधार पर कोर्ट ने दिया फैसला
Mon, 18 Dec 2023 04:04 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, ग्वालियर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 18 Dec 2023 04:04 PM IST
सार
जज की कार छीनने के मामले में फंसे अभाविप के दो छात्र नेताओं को ग्वालियर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। दोनों छात्रों पर डकैती की धाराएं लगाई गई थीं।
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छात्र हिमांशु श्रोत्रिय और सुकृत शर्मा को मिली जमानत
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बीमार को बचाने के लिए न्यायाधीश की कार छीनने के मामले से सुर्खियों से दोनों छात्रों को कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने मानवीय संवेदना के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। बता दें कि मामले में छात्रों पर डकैती का मामला दर्ज किया गया था। मामले में प्रदेश के सीएम समेत कई दिग्गजों ने छात्रों पर रहम की गुहार लगाई थी।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सोमवार को छात्रों की जमानत याचिका की सुनवाई थी। दोनों छात्र नेताओं पर डकैती का मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने मानवीय संवेदना के आधार पर दोनों छात्र नेताओं को जमानत दे दी है। इससे पहले उनकी जमानत याचिका सेशन कोर्ट से रद्द कर दी गई थी। कोर्ट का मानना था कि किसी की मदद के लिए बल प्रयोग नहीं किया जा सकता।
क्या था मामला
बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र ग्वालियर में रेलवे स्टेशन पर बीमार पड़े शिवपुरी की पीके यूनिवर्सिटी के कुलपति रणजीत सिंह यादव को लेकर पहले जीआरपी थाने और रेलवे अधिकारियों के पास पहुंचे थे। लेकिन जब आधा घंटे तक उनका कोई उपचार नहीं हुआ तो वे स्टेशन से बाहर आए और वहां खड़ी एक जज की कार जबरन छीनकर हॉस्पिटल पहुंचे और वहां उपचार शुरू करके उनके परिजनों को इसकी सूचना दी। हालांकि, उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस बीच पड़ाव थाना पुलिस ने जज की गाड़ी जबरन ले जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस को कार भी जयारोग्य चिकित्सालय में खड़ी मिल गई। उसके बाद पुलिस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो छात्रों को गिरफ्तार किया था। छात्रों पर डकैती की धाराएं लगा दी गई थीं।
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सीएम ने भी लिया था संज्ञान
पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ छात्रों ने आंदोलन चलाया था। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों को माफ करने के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ को पत्र लिखा था। सीएम मोहन यादव ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए थे कि युवकों पर डकैती की धारा लगाना न्यायोचित नहीं लगता, क्योंकि युवक आपराधिक पृष्ठभूमि के नहीं हैं। यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है कि छात्रों का इरादा गलत नहीं था।
इंदौर महापौर ने लगाई जनहित याचिका
इधर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में दोनों छात्रों हिमांशु श्रोत्रिय व सुकृत् शर्मा पर लूट-डकैती का प्रकरण दर्ज करने के विरुद्ध इंदौर के महापौर एवं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें राज्य के प्रमुख सचिव को प्रतिवादी बनाया जाकर निवेदन किया गया है कि मध्य प्रदेश शासन तत्काल निर्देश जारी करे कि किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी में शासकीय वाहन का उपयोग करने की छूट प्रदान की जाए। साथ ही किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी में यदि कोई शासकीय कर्मचारी उसके आधिपत्य का शासकीय वाहन मेडिकल इमरजेंसी उपयोग के लिए देता है तो उक्त शासकीय कर्मचारी अथवा ड्राइवर के विरुद्ध कोई कार्यवाही न की जाए। भार्गव की ओर से दायर याचिका में एसपी ग्वालियर व थाना पड़ाव के थाना प्रभारी को प्रतिवादी बनाया जाकर एफआईआर निरस्त करने की सहायता चाही गई है। बताया गया कि दोनों छात्रों का कृत्य भादवि की धारा 81 की श्रेणी में आने से अपराध की परिभाषा में नहीं आता है।
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गौरतलब है कि हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सोमवार को छात्रों की जमानत याचिका की सुनवाई थी। दोनों छात्र नेताओं पर डकैती का मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने मानवीय संवेदना के आधार पर दोनों छात्र नेताओं को जमानत दे दी है। इससे पहले उनकी जमानत याचिका सेशन कोर्ट से रद्द कर दी गई थी। कोर्ट का मानना था कि किसी की मदद के लिए बल प्रयोग नहीं किया जा सकता।
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क्या था मामला
बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र ग्वालियर में रेलवे स्टेशन पर बीमार पड़े शिवपुरी की पीके यूनिवर्सिटी के कुलपति रणजीत सिंह यादव को लेकर पहले जीआरपी थाने और रेलवे अधिकारियों के पास पहुंचे थे। लेकिन जब आधा घंटे तक उनका कोई उपचार नहीं हुआ तो वे स्टेशन से बाहर आए और वहां खड़ी एक जज की कार जबरन छीनकर हॉस्पिटल पहुंचे और वहां उपचार शुरू करके उनके परिजनों को इसकी सूचना दी। हालांकि, उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस बीच पड़ाव थाना पुलिस ने जज की गाड़ी जबरन ले जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस को कार भी जयारोग्य चिकित्सालय में खड़ी मिल गई। उसके बाद पुलिस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो छात्रों को गिरफ्तार किया था। छात्रों पर डकैती की धाराएं लगा दी गई थीं।
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सीएम ने भी लिया था संज्ञान
पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ छात्रों ने आंदोलन चलाया था। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों को माफ करने के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ को पत्र लिखा था। सीएम मोहन यादव ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए थे कि युवकों पर डकैती की धारा लगाना न्यायोचित नहीं लगता, क्योंकि युवक आपराधिक पृष्ठभूमि के नहीं हैं। यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है कि छात्रों का इरादा गलत नहीं था।
इंदौर महापौर ने लगाई जनहित याचिका
इधर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में दोनों छात्रों हिमांशु श्रोत्रिय व सुकृत् शर्मा पर लूट-डकैती का प्रकरण दर्ज करने के विरुद्ध इंदौर के महापौर एवं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें राज्य के प्रमुख सचिव को प्रतिवादी बनाया जाकर निवेदन किया गया है कि मध्य प्रदेश शासन तत्काल निर्देश जारी करे कि किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी में शासकीय वाहन का उपयोग करने की छूट प्रदान की जाए। साथ ही किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी में यदि कोई शासकीय कर्मचारी उसके आधिपत्य का शासकीय वाहन मेडिकल इमरजेंसी उपयोग के लिए देता है तो उक्त शासकीय कर्मचारी अथवा ड्राइवर के विरुद्ध कोई कार्यवाही न की जाए। भार्गव की ओर से दायर याचिका में एसपी ग्वालियर व थाना पड़ाव के थाना प्रभारी को प्रतिवादी बनाया जाकर एफआईआर निरस्त करने की सहायता चाही गई है। बताया गया कि दोनों छात्रों का कृत्य भादवि की धारा 81 की श्रेणी में आने से अपराध की परिभाषा में नहीं आता है।
