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ग्वालियर की वाटर वूमेन: जिससे जानिए पानी का महत्व सूखे पड़े कुएं, बावड़ियों को सींचकर निकाला अरबों लीटर पानी

Fri, 07 Mar 2025 08:32 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: ग्वालियर ब्यूरो Updated Fri, 07 Mar 2025 08:32 PM IST
सार

सावित्री श्रीवास्तव जो जल संरक्षण की दिशा में देश भर में एक जाना माना नाम बन चुकी हैं। उनके द्वारा बनाए गए वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट पूरे देश भर में पानी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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Voter Women Gwalior importance water Billions of liters was extracted by irrigating dried wells stepwells
ग्वालियर की वोटर वूमेन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कितना मुश्किल होता है एक महिला का होना और उसके बाद अपने परिवार को सुरक्षित रखते हुए बच्चों को संभालते हुए सामाजिक रूप से अपनी पहचान बनाने के बाद उन्हें पालना, लेकिन इस सबके बावजूद जल संरक्षण की मुहिम का जुनून और लक्ष्य में आने वाली चुनौतियों और कठिनाइयों को दरकिनार करके इतिहास रचने वाली महिला हैं। सावित्री श्रीवास्तव जो जल संरक्षण की दिशा में देश भर में एक जाना माना नाम बन चुकी हैं, उनके द्वारा बनाए गए वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट पूरे देश भर में पानी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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पंजाब के पटियाला में एक आर्मी मैन की बेटी के रूप में जन्म लेने वाली सावित्री श्रीवास्तव की शिक्षा देश के अलग-अलग राज्यों में हुई है। पढ़ने की बहुत इच्छा होने के बाद भी बीएससी तक ही पढ़ाई की। क्योंकि पारंपरिक परिवार होने के कारण शादी कर दी गई और मध्यप्रदेश के शिवपुरी के छोटे से कस्बे करैरा में ब्याह कर आने वाली सावित्री श्रीवास्तव के लिए काम करना कितना कठिन रहा होगा ये वे ही जानती हैं। 18 वर्ष पहले जल संरक्षण मुहिम की शुरुआत करने वाली सावित्री श्रीवास्तव ने अपने घर से ही इसको शुरूआत की। वे बताती हैं कि नल से बहते एक-एक बूंद पानी, वॉशबेसिन से बहते वेस्ट पानी और लोगों द्वारा गाड़ी धोने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी के अलावा बारिश के पानी का बर्बाद होना, उनके लिए काफी तकलीफदेह होता था। इसके बाद उन्होंने जल संसाधनों को सुरक्षित करने की कोशिश की, जिसमें बहुत मेहनत के बाद उन्हें सफलता मिली।
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देश भर में अपने जल संरक्षण के प्रयासों के लिए जानी जाने वाली वाटर वूमन सावित्री श्रीवास्तव ने शासकीय अशासकीय संस्थान और सड़कों पर एक हजार से ज्यादा रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट लगाकर अरबों खरबों जल को सीधे जमीन के अंदर पहुंचाकर वाटर लेवल तो बढ़ाया ही है। इसके अलावा वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए आसपास हरियाली लाने में अपना योगदान दिया है। हाल ही में ग्वालियर से निकलते हाइवे पर उन्होंने जनसहभागिता के माध्यम से चालीस वाटर हार्वेस्टिंग पिट लगाकर करोड़ों लीटर पानी की बचत की है। आपको बता दें कि ग्वालियर संभाग के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान जीवाजी विश्विद्यालय और पूरे शहर भर में पिछले कई वर्षों से सूखे पड़े बोरवेल और कुएं बावड़ी को रिचार्ज कर उन्हें जीवनदान दिया है और इसके साथ ही वे मानवता की सेवा करने वाली वाटर वूमन के रूप मे जानी जाने लगी हैं।
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सावित्री श्रीवास्तव बताती हैं कि उनके द्वारा किए जाने वाले जल संरक्षण की मुहिम को लोग पहले मजाक के रूप में लेते थे। इसके चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। एक सामान्य परिवार से होने के कारण बीमार पति और छोटे बच्चों को संभालते हुए उन्हें अपना लक्ष्य भी प्राप्त करना था, जिसमें आर्थिक सामाजिक और पारिवारिक तौर पर बहुत सारी चुनौतियों से जूझना पड़ा। लेकिन आज वे अपने दोनों बच्चों दीपाली और आकाश के साथ सफलता पूर्वक देश भर के राज्यों में जल संरक्षण की दिशा में मानवता की निस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं और उनका बेटा आकाश और बेटी दीपाली दोनों ही इस काम में एक विश्वसनीय पार्टनर के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी बेटी दीपाली ने एचआर में एमबीए किया है। दीपाली कहती हैं कि मैंने अपनी मां के जल संरक्षण के काम को देखा मैंने सोचा कि मैं दूसरी कंपनी में काम करने से अच्छा है कि खुद का काम करूं, जिसमें बहुत सारी संभावनाएं होने के साथ पर्यावरण और देश की बेहतर ढंग से सेवा हो सकती है।

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