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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Gwalior: In Gwalior-Chambal, there will be an emphasis on illegal weapons in the elections, the police have prepared, the border with the rural areas will be monitored.

Gwalior: ग्वालियर-चंबल में चुनावों में अवैध हथियारों का रहेगा जोर, पुलिस ने की तैयारी, ग्रामीण इलाकों के साथ बॉर्डर पर रहेगी निगरानी

Wed, 08 Jun 2022 04:53 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 08 Jun 2022 04:53 PM IST
सार

पंचायत चुनावों के वक्त अवैध हथियारों को रोकना पुलिस के लिए एक बड़ा चैलेंज है इसलिए चंबल संभाग के सभी पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें अलग-अलग टीमें बनाई जा रही है जो ग्रामीण इलाकों के साथ साथ बॉर्डर पर निगरानी रखेगी। 

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Gwalior: In Gwalior-Chambal, there will be an emphasis on illegal weapons in the elections, the police have prepared, the border with the rural areas will be monitored.
चुनावों के समय अक्सर पकड़ाती है अवैध हथियारों की खेप। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

एमपी का ग्वालियर-चंबल इलाका वैसे तो डाकुओं के नाम से बदनाम है। इस इलाके में डाकू तो नहीं रहे, लेकिन अब यह इलाका अवैध हथियारों की तस्करी के लिए जाना और पहचाना जाता है। चुनावी माहौल में अवैध हथियारों की तस्करी कई गुना तक बढ़ जाती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने अलग टीम अवैध हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए गठित की है।
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बता दें कि ग्वालियर चंबल अंचल के सभी जिले के पुलिस अधीक्षकों ने हाल ही में एक बैठक आयोजित की, जिसमें अवैध हथियारों को रोकने के लिए टीमें गठित की हैं। ग्वालियर एसपी अमित सांघी ने कहा है कि इन पंचायत चुनावों के वक्त अवैध हथियारों को रोकना पुलिस के लिए एक बड़ा चैलेंज है इसलिए चंबल संभाग के सभी पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें अलग-अलग टीमें बनाई जा रही है जो ग्रामीण इलाकों के साथ साथ बॉर्डर पर निगरानी रखेगी। मध्य प्रदेश में जून में पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में हर बार देखा जाता है कि ग्वालियर, मुरैना, भिण्ड, दतिया जिले के पंचायत चुनाव में लोग अपनी राजनीतिक दुश्मनी के साथ-साथ, आपसी रंजिश और डराने, धमकाने के लिए अवैध हथियारों का सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि चुनाव के वक्त लाइसेंसी बंदूक थाने में जमा हो जाती हैं और इसी के चलते लोग अवैध हथियारों का ज्यादा उपयोग करते हैं।
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रिटायर्ड डीएसपी केडी सोनकिया ने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल में जब भी चुनाव होते हैं, तब अवैध हथियार लोगों के लिए सबसे ज्यादा मददगार बनते हैं। क्योंकि चुनावों में आपसी रंजिश और डराने-धमकाने के लिए अवैध हथियारों का उपयोग किया जाता है। अवैध हथियार के रूप में सबसे ज्यादा इस्तेमाल पिस्टल और कट्टे का होता है। जो अंचल के बॉर्डर से गुजर कर गांव-गांव सप्लाई करते हैं और उसके बाद इन अवैध हथियारों का उपयोग पंचायत चुनावों में होता है। हर बार पंचायत चुनावों में खून खराबा भी होता है इसके साथ ही पिछले चुनावों में इन अवैध हथियारों से चुनावी रंजिश को लेकर तीन लोगों की मौत की हुई थी। यह अवैध हथियार तस्कर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से हथियार लाकर यहां पर लोकल गैंग को सप्लाई करते हैं और यहां के बाद यह चारों तरफ फैल जाता है।
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जानकारी के अनुसार ग्वालियर-चंबल अंचल में लगभग एक लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं। अकेले ग्वालियर की बात करें तो 32 हजार लाइसेंसी बंदूक, मुरैना में 28 हजार और भिण्ड जिले में 24 हजार लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं जो प्रदेश में सबसे ज्यादा है। चुनाव के वक्त ये सभी शस्त्र लाइसेंस और हथियार थाने में जमा हो जाते हैं। ऐसे में चुनाव के वक्त सिर्फ अवैध हथियार ही काम आता है, यही वजह है कि अंचल में हथियारों की तस्करी करने वाले गिरोह ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। हथियारों की तस्करी करने वाले गिरोह उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से आकर अंचल में अवैध हथियार खपाते हैं। बताया जाता है कि अवैध कट्टा 3 से 5 हजार तक बेचा जाता है, तो वहीं पिस्टल 8000 से 12000 के बीच में बेची जाती है।
 
 
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