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Guna: गुना कोषालय में करोड़ों का स्टाम्प घोटाला, खंजाची पर FIR से मचा हड़कंप; डबल लॉक सिस्टम तोड़कर हेराफेरी

Thu, 29 Jan 2026 07:39 PM IST
गुना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना Published by: गुना ब्यूरो Updated Thu, 29 Jan 2026 07:39 PM IST
सार

Guna: जिला कोषालय में करोड़ों के स्टांप घोटाले का खुलासा हुआ है। निरीक्षण में डिजिटल रिकॉर्ड और स्टॉक में 2.70 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया। खंजाची केशव वर्मा पर नियम उल्लंघन, भ्रष्टाचार और आर्थिक हेराफेरी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

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Stamp scam worth crores exposed in Guna, FIR registered against treasurer
स्टांप बिक्री में करोड़ों का घोटाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुना जिले के शासकीय कोषालय से जुड़े करोड़ों रुपये के स्टाम्प घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। जिला कलेक्टर के सख्त रुख के बाद थाना कैंट में कोषालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 (खंजाची) केशव वर्मा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। यह मामला शासकीय स्टाम्पों में की गई गंभीर वित्तीय हेराफेरी से जुड़ा हुआ है।

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इस पूरे प्रकरण का खुलासा दिसंबर 2025 में उस समय हुआ, जब ग्वालियर से आए संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा की टीम ने जिला कोषालय का नियमित निरीक्षण किया। जांच के दौरान IFMIS डिजिटल रिकॉर्ड और भौतिक रूप से उपलब्ध स्टाम्प स्टॉक का मिलान किया गया। इसमें प्रारंभिक तौर पर 3 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक का अंतर पाया गया। बाद में कुछ चालानों की प्रविष्टियां मिलने पर यह अंतर घटकर 2 करोड़ 70 लाख 25 हजार 310 रुपये रह गया, लेकिन संबंधित कर्मचारी इस राशि का संतोषजनक हिसाब प्रस्तुत नहीं कर सका।

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वरिष्ठ कोषालय अधिकारी राकेश कुमार द्वारा थाना कैंट में दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी खंजाची ने वर्ष 2018 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश कोषालय संहिता 2020 के नियमों की अनदेखी करते हुए कार्य किया। जांच में सामने आया कि बिना सक्षम अनुमति, बिना कंप्यूटर प्रविष्टि और बिना किसी पावती के ही स्टाम्प वेंडरों को बड़ी मात्रा में शासकीय स्टाम्प जारी किए गए।

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प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि आरोपी द्वारा कोषालय में लागू ‘डबल लॉक सिस्टम’ की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन किया गया। बिना अधिकृत अनुमति स्टाम्पों को कोषालय से निकालकर उनका वितरण किया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

मामले में खंजाची केशव वर्मा ने अपने लिखित बयान में यह स्वीकार किया है कि यह कार्यवाही उससे भूलवश हुई और उसने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी। हालांकि पुलिस और प्रशासन इस कृत्य को सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला मान रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(क) के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। फिलहाल 72 पन्नों की जांच रिपोर्ट और ऑडिट दस्तावेजों के आधार पर जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

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