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Indore Agriculture College: कृषि महाविद्यालय के लिए दिग्विजय सिंह भी उतरे मैदान में, शिवराज को लिखा पत्र

Tue, 16 Aug 2022 05:06 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 16 Aug 2022 05:06 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर के कृषि महाविद्यालय को शिफ्ट करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर महाविद्यालय न हटाने की अपील की है। 

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Former MP CM Digvijay Singh has opposed the proposal to shift the Agriculture College of Indore
पूर्व सीएम इन दिनों रेत माफियाओं पर लगातार हमलावर हैं। - फोटो : ANI

विस्तार

इंदौर में कृषि महाविद्यालय को शिफ्ट करने के प्रस्ताव के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों और किसान नेताओं को अब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का साथ मिल गया है। उन्होंने खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कृषि महाविद्यालय को न हटाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि तीसरी बार मध्यप्रदेश सरकार और इंदौर जिला प्रशासन ने महाविद्यालय के अनुसंधान केंद्र की जमीन हड़पने की योजना बनाई है। 
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दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में राष्ट्रीय किसान नेता योगेंद्र यादव और स्थानीय समाचार पत्रों का हवाला दिया है। अमर उजाला ने भी यह मुद्दा गंभीरता से उठाया था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश के किसान नेता केदार सिरोही ने उन्हें जानकारी दी कि जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने नेताओं व बिल्डरों से मिलकर वर्षों से ऑक्सीजन ज़ोन का काम कर रहे रेसीडेंसी एरिया के स्थान पर कृषि महाविद्यालय परिसर की जमीन पर ऑक्सीजन ज़ोन और सिटी फॉरेस्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले दो साल से भी अधिक समय से शहर के बीचोंबीच स्थित रेसीडेंसी एरिया में लगे हजारों-हजार हरे-भरे वृक्ष इन्दौर को शुद्ध हवा देने का काम कर रहे हैं। इन्दौर के भू-माफिया की इस बेशकीमती जमीन पर नजर है। वे तिकड़मबाजी कर रेसीडेंसी एरिया को व्यवसाय और वाणिज्य क्षेत्र में बदलवाने की कुचेष्टा कर रहे हैं। कुछ शीर्ष स्तर के अधिकारी भी इन्दौर के पर्यावरण से खिलवाड़ करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। 
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राष्ट्रपिता ने भी सराहा था महाविद्यालय को
दिग्विजय ने लिखा कि जिस तरह रेसिडेंसी एरिया की हरियाली इंदौर की पहचान है उसी तरह ब्रिटिश टाईम से बना कृषि महाविद्यालय भी उन्नत कृषि की आधारशिला रख रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इंदौर भ्रमण के समय इस केन्द्र के कार्यो की सराहना की थी। यहां यह उल्लेखनीय है कि मालवा की खेती पूरी दुनिया में सराही जाती है। यहां के किसानों ने सभी प्रकार की फसलों की पैदावार में मालवा का नाम रोशन किया है। इन्दौर का कृषि महाविद्यालय किसानों की आशाओं का केन्द्र बिन्दु है। हर साल सैकड़ों छात्र यहां से पास होकर मालवा की मिट्टी का कर्ज उतार रहे है। 
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1905 से चल रही है जैविक खेती
सिरोही ने बताया है कि कृषि महाविद्यालय के अनुसंधान केन्द्र की भूमि पर जैविक खेती का कार्य सन 1905 से प्रारंभ होकर विश्व प्रसिद्ध काम्पोस्ट विधि द्वारा जैविक खाद का उत्पादन किया जा रहा है। अनुसंधान परिसर वर्ष 1924 से आय.पी.आय. संस्थान, कृषि अनुसंधान एवं प्रसार के अतिरिक्त कृषि शिक्षण में भी योगदान देता आ रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी द्वारा 23 अप्रैल 1935 को केन्द्र में भ्रमण के दौरान कम्पोस्ट विधि से उत्पादित खाद के महत्व को बताते हुए कृषकों व वैज्ञानिकों को यह परामर्श दिया था कि यदि हम रासायनिक खाद का उपयोग अपने खेतों में करेंगे तो आने वाले 60-70 वर्षो पश्चात 80 प्रतिशत जनता जहरीला खाद्यांन ग्रहण करेगी। 


प्रस्ताव पर अमल हुआ तो कृषि कार्य प्रभावित होंगे
किसान नेताओं का कहना है कि कृषि महाविद्यालय इन्दौर का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महाविद्यालय की भूमि पर सिटी फारेस्ट या आक्सीजन झोन बनाने के इस प्रस्ताव से कृषि अनुसंधान, बीज उत्पादन, कृषि शिक्षा आदि प्रभावित होगें। इससे कृषि एवं किसानों की उन्नति में गतिरोध उत्पन्न होगा। किसान नेता श्री योगेन्द्र यादव ने कृषि महाविद्यालय इन्दौर की भूमि पर प्रस्तावित कार्यो को निरस्त कर भूमि को यथावत रखे जाने का निवेदन किया है। दिग्विजय ने शिवराज स कहा कि मेरा आपसे अनुरोध है कि प्रदेश के कृषि क्षेत्र की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कृषि महाविद्यालय इन्दौर की भूमि पर प्रस्तावित सिटी फॉरेस्ट और आक्सीजन झोन के प्रस्ताव को निरस्त करते हुए महाविद्यालय को यथावत रखे जाने के निर्देश प्रदान करने का कष्ट करें।
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