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ग्वालियर में फर्जीवाड़ा: जिंदा वृद्धा को पटवारी ने बताया मृत, जमीन और मकान कराए अपने नाम
Mon, 14 Feb 2022 08:39 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 14 Feb 2022 08:39 PM IST
सार
ग्वालियर में एक पटवारी की जालसाजी सामने आई है। आरोप है कि उसने एक वृद्धा का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और उसका मकान-दुकान अपने नाम करा लिए। महिला अब अपने जिंदा होने का सबूत लेकर यहां-वहां भटक रही है।
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वृद्धा शिकायत करने कलेक्टर और एसपी के पास पहुंची।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक पटवारी ने 89 साल की बुजुर्ग महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर उसकी सम्पत्ति अपने नाम कर ली है। इस बात का खुलासा तब हुआ है जब महिला कलेक्टर और एसपी के पास पहुंची। हैरानी की बात तो यह है कि बुजुर्ग नारायणी देवी जिंदा है वह अपने बेटे के साथ पुलिस के चक्कर लगा रही है। हालांकि पुलिस ने उनकी शिकायत पर रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है।
शहर के गोला मंदिर इलाके में रहने वाली यह बुजुर्ग 89 साल की नारायणी देवी है। जहां इनका एक पुश्तैनी मकान है। उस मकान में कुछ दुकानें हैं, जिसका किराया भी आता है। भगवान सिंह नाम के एक पटवारी ने इनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और वसीयत अपने नाम कराकर सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर दी और पुश्तैनी मकान अपने नाम कर लिया। इसकी जानकारी नारायणी देवी को तब लगी जब इनके बेटे आनंद तोमर ने जमीन के किसी काम से संबंधित ऑनलाइन प्रमाण पत्र निकालना चाहा। जब सर्वे नंबर में अपने पुश्तैनी मकान का नंबर देखा तो उसके मालिक के आगे भगवान सिंह लिखा हुआ था। यह देख नारायणी देवी और उसके बेटे के पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों ही अपने कागज लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे हैं।
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र 2005 को बनवाया गया। जबकि मृत्यु 2001 में बताई गई है। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के 16 साल तक पीड़ित परिवार को पता ही नहीं चला। 2011 तक उनकी संपत्ति के कागजों में कोई गड़बड़ी नहीं थी। लेकिन 28 जनवरी 2022 को जब कुछ सरकारी काम के लिए उनके बेटे ने ऑनलाइन चेक किया तो... पटवारी भगवान सिंह मकान मालिक बन गया। बहरहाल जिस तरह से मृत्यु प्रमाण पत्र और मकान के कागजों में हेराफेरी को गोपनीय रखा गया। उससे जाहिर होता है कि जालसाज पटवारी नारायणी देवी के मरने का इंतजार कर रहा था और उसके बाद वो संपत्ति पर अपना अधिकार जमा लेता।
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शिकायत के बाद पुलिस सरकारी रिकॉर्ड में जानकारी तलब कर रही है। साथ ही फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में किसकी भूमिका रही उसकी भी जांच करेगी। हालांकि पुलिस ने अभी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। पुख्ता जानकारी मिलते ही पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने की बात कर रही है।क्राइम ब्रांच के एएसपी राजेश दंडोतिया ने कहा है कि इस मामले की अभी जांच की जा रही है जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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शहर के गोला मंदिर इलाके में रहने वाली यह बुजुर्ग 89 साल की नारायणी देवी है। जहां इनका एक पुश्तैनी मकान है। उस मकान में कुछ दुकानें हैं, जिसका किराया भी आता है। भगवान सिंह नाम के एक पटवारी ने इनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और वसीयत अपने नाम कराकर सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर दी और पुश्तैनी मकान अपने नाम कर लिया। इसकी जानकारी नारायणी देवी को तब लगी जब इनके बेटे आनंद तोमर ने जमीन के किसी काम से संबंधित ऑनलाइन प्रमाण पत्र निकालना चाहा। जब सर्वे नंबर में अपने पुश्तैनी मकान का नंबर देखा तो उसके मालिक के आगे भगवान सिंह लिखा हुआ था। यह देख नारायणी देवी और उसके बेटे के पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों ही अपने कागज लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे हैं।
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फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र 2005 को बनवाया गया। जबकि मृत्यु 2001 में बताई गई है। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के 16 साल तक पीड़ित परिवार को पता ही नहीं चला। 2011 तक उनकी संपत्ति के कागजों में कोई गड़बड़ी नहीं थी। लेकिन 28 जनवरी 2022 को जब कुछ सरकारी काम के लिए उनके बेटे ने ऑनलाइन चेक किया तो... पटवारी भगवान सिंह मकान मालिक बन गया। बहरहाल जिस तरह से मृत्यु प्रमाण पत्र और मकान के कागजों में हेराफेरी को गोपनीय रखा गया। उससे जाहिर होता है कि जालसाज पटवारी नारायणी देवी के मरने का इंतजार कर रहा था और उसके बाद वो संपत्ति पर अपना अधिकार जमा लेता।
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शिकायत के बाद पुलिस सरकारी रिकॉर्ड में जानकारी तलब कर रही है। साथ ही फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में किसकी भूमिका रही उसकी भी जांच करेगी। हालांकि पुलिस ने अभी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। पुख्ता जानकारी मिलते ही पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने की बात कर रही है।क्राइम ब्रांच के एएसपी राजेश दंडोतिया ने कहा है कि इस मामले की अभी जांच की जा रही है जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
