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ईओडब्ल्यू का छापाः 950 रुपए मासिक वेतन से नौकरी शुरू करने वाला अशोकनगर नगर पालिका का अकाउंटेंट निकला करोड़पति
Wed, 27 Oct 2021 01:58 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 27 Oct 2021 01:58 PM IST
सार
ईओडब्ल्यू ने अशोकनगर नगर पालिका के अकाउंटेंट के ग्वालियर स्थित घर छापा मारकर करोड़ों रुपए की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा किया है।
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ग्वालियर स्थित इस घर पर मारा है छापा।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EoW) ने बुधवार को अशोकनगर नगर पालिका के अकाउंटेंट महेश दीक्षित के ग्वालियर स्थित घर पर छापा मारा। 950 रुपए मासिक वेतन के साथ 1990 में नौकरी शुरू करने वाले महेश दीक्षित के नाम आज करोड़ों रुपए की संपत्ति है। सुरेश नगर में तीन मंजिला मकान है, जो एक करोड़ रुपए से अधिक का मूल्य रखता है।
ईओडब्ल्यू की टीम महेश दीक्षित की बेहिसाब संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है। अपने 31 वर्ष की नौकरी में महेश दीक्षित ने भांडेर, आतंरी, बिलौआ, भिंड में भी अलग-अलग भूमिकाओं का निर्वहन किया है। ग्वालियर-भिंड की सीमा पर सेंथरी गांव में 37 बीघा से अधिक जमीन उसके नाम है। लाखों रुपए के जेवर, कैश और बैंकों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। ईओडब्ल्यू के एसपी अमित सिंह ने मीडिया को बताया कि महेश दीक्षित के बारे में गोपनीय शिकायत प्राप्त हुई थी। इसी आधार पर योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा गया है।
ज्यादातर CMO के चार्ज में रहा
महेश दीक्षित की भर्ती बाबू के रूप में हुई थी। आगे चलकर वह लेखा अधिकारी बना। अभी वह नगर पालिका अशोकनगर में अकाउंटेंट ही है। अपनी 31 साल की नौकरी में ज्यादातर समय वह चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर (सीएमओ) के तौर पर ही रहा है। वह दतिया के भांडेर, ग्वालियर के बिलौआ, आंतरी व भिंड में प्रभारी सीएमओ के चार्ज में ही रहा। ज्यादातर संपत्ति महेश दीक्षित की पत्नी रामबाई और बच्चों के नाम पर है। घर से 61 हजार रुपए कैश, 11 संपत्तियों के दस्तावेज और जेवरात मिले हैं। कई बैंक खातों की खोजबीन जारी है।
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ईओडब्ल्यू की टीम महेश दीक्षित की बेहिसाब संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है। अपने 31 वर्ष की नौकरी में महेश दीक्षित ने भांडेर, आतंरी, बिलौआ, भिंड में भी अलग-अलग भूमिकाओं का निर्वहन किया है। ग्वालियर-भिंड की सीमा पर सेंथरी गांव में 37 बीघा से अधिक जमीन उसके नाम है। लाखों रुपए के जेवर, कैश और बैंकों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। ईओडब्ल्यू के एसपी अमित सिंह ने मीडिया को बताया कि महेश दीक्षित के बारे में गोपनीय शिकायत प्राप्त हुई थी। इसी आधार पर योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा गया है।
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ज्यादातर CMO के चार्ज में रहा
महेश दीक्षित की भर्ती बाबू के रूप में हुई थी। आगे चलकर वह लेखा अधिकारी बना। अभी वह नगर पालिका अशोकनगर में अकाउंटेंट ही है। अपनी 31 साल की नौकरी में ज्यादातर समय वह चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर (सीएमओ) के तौर पर ही रहा है। वह दतिया के भांडेर, ग्वालियर के बिलौआ, आंतरी व भिंड में प्रभारी सीएमओ के चार्ज में ही रहा। ज्यादातर संपत्ति महेश दीक्षित की पत्नी रामबाई और बच्चों के नाम पर है। घर से 61 हजार रुपए कैश, 11 संपत्तियों के दस्तावेज और जेवरात मिले हैं। कई बैंक खातों की खोजबीन जारी है।
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