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इंदौरः स्वच्छता अभियान के इंजीनियर ने खाली किया सरकारी खजाना, छापे में मिले बेहिसाब संपत्ति के सुराग
भाषा, इंदौर
Updated Thu, 11 Oct 2018 04:49 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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पुलिस के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के एक सहायक इंजीनियर के ठिकानों पर गुरुवार को छापे मारे और उन्हें करीब 15 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति के सुराग मिले हैं। यह अधिकारी देश के सबसे स्वच्छ शहर के स्थानीय निकाय में केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'स्वच्छ भारत अभियान' के प्रभारी हैं।
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ईओडब्ल्यू के एक आला अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि आईएमसी के सहायक इंजीनियर अभय सिंह राठौर के खिलाफ शिकायत मिली थी कि उन्होंने भ्रष्ट तरीकों से बड़े पैमाने पर संपत्ति अर्जित की है। इस शिकायत के आधार पर अधिकारी के घर और उनके नजदीकी रिश्तेदारों के कुल चार ठिकानों पर छापा मारा गया।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 में सरकारी सेवा में आने वाले राठौर को इंदौर नगर निगम से फिलहाल हर महीने लगभग 50,000 रुपये का वेतन मिलता है। लेकिन ईओडब्ल्यू के छापों में उनके द्वारा लगभग 15 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति बनाने के सुराग मिले हैं। यह उनकी आय के ज्ञात स्रोत से कहीं अधिक है।
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अधिकारी ने बताया कि इन छापों में राठौर और उनके नजदीकी संबंधियों के अलग-अलग ठिकानों से लगभग 20 लाख रुपये की नकदी मिली है। इन स्थानों में बड़ी संख्या में सोने के जेवरात और इस मूल्यवान धातु के कुछ बिस्किट भी पाये गये हैं।
उन्होंने बताया कि संदेह है कि राठौर ने कुछ अचल सम्पत्तियां अपनी बेटी, छोटे भाई, बहन और अन्य नजदीकी रिश्तेदारों के नाम से खरीदी है। इस सिलसिले में चार भूखंड और आवासीय तथा वाणिज्यिक इस्तेमाल की पांच इमारतें ईओडब्ल्यू की जांच के घेरे में हैं। अधिकारी ने बताया कि पुलिस के आर्थिक अपराध रोधी दस्ते को छापों के दौरान राठौर कुनबे के सदस्यों के नाम से शुरू की गयीं 36 जीवन बीमा योजनाओं में करीब 20 लाख रुपये के निवेश के भी सबूत मिले हैं।
उन्होंने बताया कि नगरीय निकाय के सहायक इंजीनियर का छोटा भाई संतोष सिंह राठौर इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में टाइमकीपर के तृतीय श्रेणी कर्मचारी के पद पर है। संतोष की संपत्ति की भी छानबीन की जा रही है जिसमें उसकी भव्य कोठी शामिल है। अधिकारी ने बताया कि विस्तृत जांच और आकलन के बाद मामले में बेहिसाब संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
