'भाजपा विकास के किसी मानक पर खरी नहीं'

जयप्रकाश पाराशर,भोपाल Updated Sat, 23 Nov 2013 03:35 PM IST
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'कोई फर्क नहीं पड़ता। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी बहुमत हासिल करके सरकार बना रही है। प्रदेश का मतदाता कांग्रेस को सत्ता में लाना चाहता है। बागी लोगों से कोई विपरीत असर कांग्रेस के विजय अभियान पर नहीं पड़ेगा।'
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मौका था ज्योतिरादित्य सिंधिया से मध्यप्रदेश चुनाव के बारे में बातचीत का। और उन्होंने अपनी पार्टी और प्रतिद्वंदियों के बारे में खुलकर बातचीत की। पढ़िए पूरी बातचीत।
*टिकटों के बंटवारे में बहुत असंतोष देखा गया। क्या आप टिकटों के मौजूदा बंटवारे से पूरी तरह संतुष्ट हैं?
कांग्रेस पार्टी में टिकट वितरण की एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत पार्टी उम्मीदवार का चयन करती है। पार्टी में न कोई असंतोष था, न मुझसे और न ही अन्य कोई वरिष्ठ नेता टिकट वितरण से नाराज है।

*शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि यह एक राजघराने और साधारण परिवार से आए शख्स के बीच की लड़ाई है?
जो अपने आपको साधारण परिवार का बताकर मतदाताओं की सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके चाल, चरित्र और चेहरे से पूरे प्रदेश का जनमानस परिचित हो गया है। उनके पास प्रदेश के जनमानस को बताने के लिए कोई ठोस उपलब्धियां नहीं हैं।

*कहा जा रहा है शिवराज अपनी छवि पर वोट मांग रहे हैं?
शिवराज सिंह अपनी उपलब्धियां गिनाते हैं। दिग्विजय सिंह सरकार से तुलना करते हैं। मोदी कहते हैं कि सबको विकास दिखता है, कांग्रेस को नहीं दिखता। क्या आपको लगता है कि शिवराज सरकार की सफलताएं केवल प्रचार में हैं, वास्तविकता में नहीं? ये केवल प्रचार है। असलियत में तो भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है। हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। कांग्रेस ने हमेशा सत्ता के विकेंद्रीकरण में विश्वास रखा है। वास्तव में ये सरकार विकास के किसी भी मानक पर खरी नहीं उतरी।

*कांग्रेस ने आपको मुख्यमंत्री के तौर पर क्यों प्रोजेक्ट नहीं किया? आपको प्रचार अभियान प्रमुख बनाया गया है। ऐसा क्यों?
मैं कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता हूं। पार्टी ने मुझे प्रदेश में प्रचार अभियान की जिम्मेदारी सौंपी है। उसे मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभा रहा हूं।

*क्या सुरेश पचौरी को अचानक विधानसभा चुनाव में उतारना किसी रणनीति का हिस्सा है? क्या मुख्यमंत्री विधायकों में से ही चुना जाएगा?

सुरेश पचौरी जी कांग्रेस के लोकप्रिय और अनुभवशाली नेता हैं। विधानसभा चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाने से कार्यकर्ताओं में नए उत्साह व ऊर्जा का संचार हुआ है। पहला लक्ष्य कांग्रेस को बहुमत में लाना है। चुनाव के नतीजे आ जाने के बाद ही मुख्यमंत्री पद पर विचार किया जाएगा।

*मोदी को मध्य प्रदेश में उतारा गया है। वे साढ़े तीन दिन में 14 सभाएं कर रहे हैं। क्या शिवराज के मुकाबले मोदी से निपटना ज्यादा मुश्किल है?

प्रदेश का मतदाता बुद्धिमान है। भाजपा सरकार की कथनी और करनी सबके सामने है। मतदाता को मालूम है कि घोषणावीरों और सपनों के सौदागरों से कैसे निपटना है।
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