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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   During time of coal and electricity crisis Madhya Pradesh thermal power stations burnt 80000 MT extra coal

Electricity Crisis: बिजली संकट से जूझ रहा देश, मध्य प्रदेश के पॉवर प्लांट्स में मात्र नौ दिनों में फूंक दिया 88 हजार मीट्रिक टन कोयला

Mon, 11 Oct 2021 12:59 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 11 Oct 2021 12:59 PM IST
सार

एक यूनिट बिजली उत्पादन के लिए 620 ग्राम कोयले की आवश्यकता होती है, लेकिन मप्र के प्लांटों में एक यूनिट बिजली के लिए 768 ग्राम कोयला खपाया गया।  

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During time of coal and electricity crisis Madhya Pradesh thermal power stations burnt 80000 MT extra coal
कोयला - फोटो : pixabay

विस्तार

एक तरफ पूरे देश में बिजली संकट को लेकर हाहाकार मच रहा है। कई राज्यों में पॉवर प्लांट्स बंद हो चुके हैं, तो कुछ राज्यों के पास मात्र तीन से चार दिन का कोयला ही बचा है। राज्य सरकारें केंद्र से मदद मांग रही हैं। ऐसे समय में मध्य प्रदेश के पॉवर प्लांटो में 88 हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त कोयला फूंक दिया गया, जिसकी कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह कोयला एक अक्तूबर से नौ अक्तूबर के बीच खपाया गया। 

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एक यूनिट बिजली के लिए 620 ग्राम कोयला
रिपोर्ट के मुताबिक, एक यूनिट बिजली का उत्पादन करने के लिए 620 ग्राम कोयले की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन मध्य प्रदेश के पॉवर प्लांटों में एक यूनिट बिजली के लिए 768 ग्राम कोयले का प्रयोग किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के चार थर्मल पॉवर स्टेशन सतपुड़ा, श्री सिंगाजी, संजय गांधी और अमरकंटक पॉवर स्टेशन में चार लाख मीट्रिक टन कोयले का इस्तेमाल मात्र नौ दिन में हुआ और यहां पर 5229 लाख मीट्रिक टन बिजली पैदा की गई। 
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कोयले की गुणवत्ता में भी समस्या 
मध्यप्रदेश की सभी यूनिटों में 620 ग्राम की बजाय औसतन 768 ग्राम कोयले का इस्तेमाल एक यूनिट बिजली उत्पादन के लिए किया गया है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा कोयले का इस्तेमाल श्री सिंगाजी प्लांट पर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां एक यूनिट बिजली उत्पादन के लिए 817 ग्राम कोयले का इस्तेमाल हुआ। हालांकि, सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर का कहना है कि कोयले की गुणवत्ता काफी खराब मिल रही है, जिस कारण ऐसा हो रहा है। 

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