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MP News: दृष्टि IAS कोचिंग के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति की राम और सीता पर टिप्पणी का विरोध तेज, FIR की मांग
Fri, 11 Nov 2022 07:15 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 11 Nov 2022 07:15 PM IST
सार
संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्र शेखर तिवारी ने कहा कि डॉक्टर दिव्यकीर्ति ने अपनी कोचिंग में भगवान राम और सीता के प्रति जिस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी की है। उसका संस्कृति बचाओ मंच विरोध करता है और यह मांग करता है कि इस मामले में केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे और आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार करे।
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भोपाल: संस्कृति बचाव मंच के अध्यक्ष पंडित चंद्रशेखर तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल में दिल्ली की दृष्टि आईएएस कोचिंग के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति का विरोध तेज हो गया है। विकास दिव्यकीर्ति का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वे भगवान राम और माता सीता पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिख रहे हैं। इसको लेकर भोपाल में संस्कृति बचाव मंच ने दिव्यकीर्ति के खिलाफ एफआईआर की मांग की है।
संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्र शेखर तिवारी ने कहा कि डॉक्टर दिव्यकीर्ति ने अपनी कोचिंग में भगवान राम और सीता के प्रति जिस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी की है। उसका संस्कृति बचाओ मंच विरोध करता है और यह मांग करता है कि इस मामले में केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे और आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार करे। तिवारी ने कहा कि संस्कृति बचाओ मंच यह भी मांग करता है कि शीघ्र ईशनिंदा कानून को लाया जाए। जिससे कि हमारे देवी-देवताओं के प्रति हर कोई जो अनर्गल टिप्पणी करता है वह बंद हो जाए और इन जैसे निकृष्ठ लोगों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज होना चाहिए। दिव्यकीर्ति का सोशल मीडिया पर भी विरोध हो रहा है।
डॉ. दिव्यकीर्ति ‘दृष्टि आईएएस’ कोचिंग इंस्टीट्यूट के संस्थापक हैं। हरियाणा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे डॉ. दिव्यकीर्ति के माता-पिता दोनों हिंदी साहित्य के प्रोफेसर रह चुके हैं। इसलिए इनका बचपन से ही हिंदी के प्रति लगाव रहा है। दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, सिनेमा अध्ययन, सामाजिक मुद्दे और राजनीति विज्ञान उनकी रुचि के अन्य विषय हैं। इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में एमए, एमफिल और पीएचडी की है। इसके अलावा, ये दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय विद्या भवन से अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं।
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डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन-कार्य से की थी। डॉ. दिव्यकीर्ति ने अपने पहले ही प्रयास में, साल 1996 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। जिसके बाद इन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय में नियुक्ति मिली। लेकिन वहां पर ये ज्यादा समय तक काम नहीं कर पाए और एक साल बाद ही उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद इन्होंने साल 1999 में ‘दृष्टि आईएएस’ कोचिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की। दृष्टि आईएएस के यूट्यूब चैनल पर 70 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं। वहीं इंस्टाग्राम पर उनके 7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
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संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्र शेखर तिवारी ने कहा कि डॉक्टर दिव्यकीर्ति ने अपनी कोचिंग में भगवान राम और सीता के प्रति जिस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी की है। उसका संस्कृति बचाओ मंच विरोध करता है और यह मांग करता है कि इस मामले में केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे और आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार करे। तिवारी ने कहा कि संस्कृति बचाओ मंच यह भी मांग करता है कि शीघ्र ईशनिंदा कानून को लाया जाए। जिससे कि हमारे देवी-देवताओं के प्रति हर कोई जो अनर्गल टिप्पणी करता है वह बंद हो जाए और इन जैसे निकृष्ठ लोगों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज होना चाहिए। दिव्यकीर्ति का सोशल मीडिया पर भी विरोध हो रहा है।
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डॉ. दिव्यकीर्ति ‘दृष्टि आईएएस’ कोचिंग इंस्टीट्यूट के संस्थापक हैं। हरियाणा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे डॉ. दिव्यकीर्ति के माता-पिता दोनों हिंदी साहित्य के प्रोफेसर रह चुके हैं। इसलिए इनका बचपन से ही हिंदी के प्रति लगाव रहा है। दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, सिनेमा अध्ययन, सामाजिक मुद्दे और राजनीति विज्ञान उनकी रुचि के अन्य विषय हैं। इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में एमए, एमफिल और पीएचडी की है। इसके अलावा, ये दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय विद्या भवन से अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं।
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डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन-कार्य से की थी। डॉ. दिव्यकीर्ति ने अपने पहले ही प्रयास में, साल 1996 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। जिसके बाद इन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय में नियुक्ति मिली। लेकिन वहां पर ये ज्यादा समय तक काम नहीं कर पाए और एक साल बाद ही उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद इन्होंने साल 1999 में ‘दृष्टि आईएएस’ कोचिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की। दृष्टि आईएएस के यूट्यूब चैनल पर 70 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं। वहीं इंस्टाग्राम पर उनके 7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
