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रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मरीजों से लेते हैं सिर्फ पांच रुपये फीस, मिला पद्मश्री सम्मान
Tue, 29 Jan 2019 08:33 AM IST
अर्पना दुबे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: अर्पना दुबे
Updated Tue, 29 Jan 2019 08:33 AM IST
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Dr Shyama Prasad Mukherjee
- फोटो : ANI
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केंद्र सरकार ने इस साल कई ऐसे लोगों को पद्म पुरस्कार दिए हैं जो साइलेंट हीरो बनकर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। ऐसे ही लोगों में से एक हैं झारखंड के रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्हें केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है।
केंद्र द्वारा सम्मानित किये जाने पर उन्होंने कहा कि यह मेरे और मेरे मरीजों के लिए सम्मान का विषय है। मैंने मरीजों का इलाज करना तब से शुरू किया था जब मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। मैं अब भी फीस के रूप में केवल पांच रुपये ही लेता हूं।
मरीजों के लिए भगवान का रूप डॉ. मुखर्जी 1957 से अपने लालपुर की पैथ लैब में बैठ रहे हैं। यहां से होने वाली कमाई के जरिये ही वह मरीजों को पांच रूपये में दवाएं दे पाते हैं। मुखर्जी अब गरीबों के डॉक्टर के नाम से जाने जाने लगे हैं। वह कहते हैं कि मैंने यह सेवा किसी अवॉर्ड के लिए नहीं की मगर मेरे योगदान को देखते हुए अवॉर्ड के लिए चुना जाना गर्व का विषय है।
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केंद्र द्वारा सम्मानित किये जाने पर उन्होंने कहा कि यह मेरे और मेरे मरीजों के लिए सम्मान का विषय है। मैंने मरीजों का इलाज करना तब से शुरू किया था जब मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। मैं अब भी फीस के रूप में केवल पांच रुपये ही लेता हूं।
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Jharkhand: Dr Shyama Prasad Mukherjee, a Ranchi-based doctor who has been awarded Padma Shri, says, "This is a matter of happiness for me as well as my patients. I started treating patients soon after I completed my education. I still charge Rs.5 as consultation fee." pic.twitter.com/RN4gQyJDdI
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) January 28, 2019
मरीजों के लिए भगवान का रूप डॉ. मुखर्जी 1957 से अपने लालपुर की पैथ लैब में बैठ रहे हैं। यहां से होने वाली कमाई के जरिये ही वह मरीजों को पांच रूपये में दवाएं दे पाते हैं। मुखर्जी अब गरीबों के डॉक्टर के नाम से जाने जाने लगे हैं। वह कहते हैं कि मैंने यह सेवा किसी अवॉर्ड के लिए नहीं की मगर मेरे योगदान को देखते हुए अवॉर्ड के लिए चुना जाना गर्व का विषय है।
