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सत्ता संग्राम: ध्रुवीकरण की कठिन लड़ाई में फंसे दिग्विजय

Sun, 12 May 2019 03:28 AM IST
Avdhesh Kumar राजेश चतुदर्वेदी, भोपाल
राजेश चतुदर्वेदी, भोपाल Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 12 May 2019 03:28 AM IST
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Digvijay singh Stranded in battle of polarization
दिग्विजय सिंह - फोटो : Facebook
मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 8 सीटों पर रविवार को वोट डाले जाएंगे। यहां की भोपाल सीट देश की सबसे चर्चित सीटों में शुमार हो गई है। यहां से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मैदान में हैं। दिग्विजय कभी प्रज्ञा के बहाने हिंदू आतंकवाद को लेकर भाजपा को घेरते रहे हैं। हालांकि इस चुनाव में वे बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों से माफी मांगने के साथ शुरू उनका चुनाव अभियान क्षमा याचना पर ही खत्म हुआ। 
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72 साल के दिग्विजय ध्रुवीकरण को परास्त करने और भाजपा द्वारा दी गई ‘मिस्टर बंटाधार’ की छाप को मिटाने में जुटे रहे। वैशाख की भरी दोपहरी में भी वे गली-गली और मोहल्ले-मोहल्ले करबद्ध होकर घूमे। रास्ते में जो मंदिर आया, वहां शीश नवाकर ही आगे बढ़े। राघोगढ़ के इस राजा ने हर वो चीज की, जिससे वे परहेज करते थे, चाहे गाय को चारा खिलाती हुई तस्वीर हो या साधु-संतों के साथ हवन और रोड जैसे उपक्रम।
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दरअसल, उनकी पूरी रणनीति तब बदली जब भाजपा ने मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपी प्रज्ञा को उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने जुबान पर नियंत्रण किया। मीडिया से बात करने में ऐहतियात बरतते रहे। पीएम नरेंद्र मोदी तक ने हिंदू आतंकवाद के मुद्दे पर उनका नाम लेकर उकसाने की कोशिश की पर दिग्विजय मौन बने रहे। 
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वहीं, प्रज्ञा कहती हैं कि यह चुनाव उनके लिए धर्म युद्ध है। मुम्बई हमले में शहीद हेमंत करकरे के खिलाफ उनका बयान आलोचना का कारण बना तो संघ और भाजपा को उन्हें संभलकर बोलने की हिदायत देना पड़ी। मगर वे भगवा आतंकवाद शब्द का जनक बताकर दिग्विजय पर बराबर हमले करती रहीं। साढ़े 19 लाख वोटर वाले भोपाल में एक चौथाई अल्पसंख्यक हैं, 2 से ढाई लाख कायस्थ हैं, करीब डेढ़ लाख क्षत्रिय हैं। भाजपा के आलोक संजर मौजूदा सांसद हैं, जो पिछले साल 3 लाख 70 हजार वोटों से जीते थे।

गुनाः सिंधिया के गढ़ में हार-जीत के अंतर पर चर्चा

गुना भी हाईप्रोफाइल सीट है। कारण सिंधिया परिवार है। मौजूदा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार की विरासत के साथ पांचवा चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने पुराने कांग्रेसी केपी यादव को उम्मीदवार बनाया। भाजपा नेतृत्व पर इस बार भी सिंधिया परिवार के खिलाफ कमजोर उम्मीदवार उतारने का आरोप लगा। पानी और रोजगार बड़े मुद्दे हैं, लोग सिंधिया पर सवाल भी उठाते हैं। लेकिन अंततः बात हार जीत के अंतर पर रुक जाती है। मोदी का हल्ला है, पर महल के आगे कमजोर पड़ने लगता है। 

मुरैनाः तोमर को मिल रही कड़ी चुनौती

पिछली बार ग्वालियर-चंबल की इस सीट पर भाजपा का कब्जा था, पर पार्टी ने मौजूदा सांसद अनूप मिश्रा का टिकट काट केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चुनाव में उतारा है। मोदी लहर के बावजूद तोमर पिछला चुनाव ग्वालियर से महज 30 हजार वोट से जीत सके थे, इसलिए सीट बदल मुरैना से किस्मत आजमा रहे हैं। बसपा ने ऐन वक्त पर रामलखन सिंह की जगह अवतार सिंह भड़ाना को उम्मीदवार घोषित कर दिया। वहीं, कांग्रेस के रामनिवास रावत जातीय समीकरणों के सहारे तोमर को टक्कर देने में लगे हैं। 

राजगढ़ः गढ़ में दिग्विजय की प्रतिष्ठा दांव पर

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर पिछली बार भाजपा के रोडमल नागर ने जीत दर्ज की थी। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस की मोना सुस्तानी से है। सुस्तानी को दिग्विजय की सिफारिश पर ही टिकट मिला है। दिग्विजय भोपाल छोड़कर सिर्फ इसी सीट पर प्रचार करने गए थे। समझा जा सकता है कि खुद दिग्विजय की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। इसी कारण से दिग्विजय के अनुज और राजगढ़ से कई बार सांसद रहे लक्ष्मण सिंह, पुत्र जयवर्धन और भतीजे प्रियव्रत सिंह भिड़े हुए हैं। जयवर्धन और प्रियव्रत मंत्री हैं।

ग्वालियरः भाजपा और कांग्रेस में रोचक लड़ाई

मौजूदा सांसद नरेंद्र तोमर मुरैना शिफ्ट हुए तो भाजपा ने महापौर विवेक शेजवलकर को प्रत्याशी बना दिया। उनका मुकाबला कांग्रेस के अशोक सिंह से है, जो पिछला चुनाव मामूली अंतर से हारे थे। उन्हें दिग्विजय खेमे का माना जाता है। इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन पर उनका भविष्य निर्भर करता है। सिंह व्यवहार कुशल हैं और ग्रामीण इलाकों में उनकी अच्छी पकड़ है। वहीं शेजवलकर साफ सुथरी छवि और मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं। 

विदिशाः शिवराज की प्रतिष्ठा का सवाल

हिंदू महासभा और फिर जनसंघ का गढ़ माने जाने वाली विदिशा से कांग्रेस एक बार चुनाव जीती है। दो बार से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज विदिशा से लोकसभा में पहुंच रही थीं। इस बार स्वास्थ्य कारणों से वे चुनाव नहीं लड़ीं तो पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के खास रमाकांत भार्गव उम्मीदवार हैं। विदिशा के लोग कहते हैं- चुनाव तो शिवराज ही लड़ेंगे। सुषमा दीदी भी शिवराज के भरोसे पर ही विदिशा आई थीं। कांग्रेस ने सीहोर के रहने वाले पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल को उतारा है। 

भिंड और सागर : दोनों सीटों पर कड़ी टक्कर

भिंड में कांग्रेस के देवाशीष जरारिया और भाजपा की संध्या राय के बीच टक्कर है। दोनों का ही पहला चुनाव है। वहीं, बुंदेलखंड संभाग वाली सीट सागर में भाजपा के राजबहादुर सिंह व कांग्रेस के प्रभु सिंह ठाकुर के बीच मुकाबला है। भाजपा ने यहां से मौजूदा सांसद लक्ष्मीनारायण यादव का टिकट काट दिया था।
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