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कोरोना वायरस के कारण दाहसंस्कार करने में आ रही परेशानी, अस्थी विसर्जन पर भी लगी रोक
Sun, 12 Apr 2020 09:00 PM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Sun, 12 Apr 2020 09:00 PM IST
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सांकेतिक
- फोटो : Social Media
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कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए लगाए गए लॉकडाउन के कारण मध्य प्रदेश के मुरैना शहर में श्मशान बंद हैं। इसका मतलब यह है कि लोग अंतिम संस्कार और आस-पास की नदियों में राख विसर्जित नहीं कर सकते हैं।
यहां कोरोना वायरस फैलने की घटना बड़ी ही अजीब है। दरअसल इस क्षेत्र में एक आदमी दुबई से लौटा, जो बाद में कोरोना पॉजिटीव पाया गया। यह आदमी और इसकी पत्नी ने 20 मार्च को आसपास के कई सौ लोगों के लिए "मृत्यु भोज" का आयोजन किया। इस आयोजन में भाग लेने वाले दस लोग बाद में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए।
मुरैना बड़ोखर श्मशान प्रबंध समिति के पदाधिकारी सुरेश गुप्ता ने बताया, " लॉकडाउन की घोषणा के बाद से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से हो चुकी है। ऐसे में इनके परिजन दाहसंस्कार के बाद की विधि नहीं कर पाए हैं। ऐसे में मृतक की राख वाले कुछ 10 कलश हमारे लॉकर में रखे जाते हैं।"
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उन्होंने कहा, "चूंकि जिले की सीमाएं लॉकडाउन के कारण सील कर दी गई हैं, इसलिए लोग राख को विसर्जित करने के लिए पवित्र नदियों में कलश नहीं ले जा सकते हैं। लोग ज्यादातर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में सेरोन से बहने वाली गंगा में राख विसर्जित करने के लिए जाते थे।"
स्थानीय निवासी दीपक शर्मा ने कहा कि उनकी मां का निधन 27 मार्च को हुआ था, लेकिन उन्हें लॉकडाउन के दौरान यात्रा करने के लिए अधिकारियों से अनुमति मिलने के बावजूद सेरोन में पुजारियों द्वारा दूर कर दिया गया था।
शर्मा ने कहा, "पुजारी कानूनी नतीजों से डरते थे। मैं अपनी मां की राख से युक्त कलश लेकर लौटा और उसे बडोखर श्मशान के लॉकर में रख दिया।" दरअसल यहां अधिकारियों ने वायरस के प्रकोप से लड़ने के लिए हर तरह के कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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यहां कोरोना वायरस फैलने की घटना बड़ी ही अजीब है। दरअसल इस क्षेत्र में एक आदमी दुबई से लौटा, जो बाद में कोरोना पॉजिटीव पाया गया। यह आदमी और इसकी पत्नी ने 20 मार्च को आसपास के कई सौ लोगों के लिए "मृत्यु भोज" का आयोजन किया। इस आयोजन में भाग लेने वाले दस लोग बाद में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए।
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मुरैना बड़ोखर श्मशान प्रबंध समिति के पदाधिकारी सुरेश गुप्ता ने बताया, " लॉकडाउन की घोषणा के बाद से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से हो चुकी है। ऐसे में इनके परिजन दाहसंस्कार के बाद की विधि नहीं कर पाए हैं। ऐसे में मृतक की राख वाले कुछ 10 कलश हमारे लॉकर में रखे जाते हैं।"
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उन्होंने कहा, "चूंकि जिले की सीमाएं लॉकडाउन के कारण सील कर दी गई हैं, इसलिए लोग राख को विसर्जित करने के लिए पवित्र नदियों में कलश नहीं ले जा सकते हैं। लोग ज्यादातर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में सेरोन से बहने वाली गंगा में राख विसर्जित करने के लिए जाते थे।"
स्थानीय निवासी दीपक शर्मा ने कहा कि उनकी मां का निधन 27 मार्च को हुआ था, लेकिन उन्हें लॉकडाउन के दौरान यात्रा करने के लिए अधिकारियों से अनुमति मिलने के बावजूद सेरोन में पुजारियों द्वारा दूर कर दिया गया था।
शर्मा ने कहा, "पुजारी कानूनी नतीजों से डरते थे। मैं अपनी मां की राख से युक्त कलश लेकर लौटा और उसे बडोखर श्मशान के लॉकर में रख दिया।" दरअसल यहां अधिकारियों ने वायरस के प्रकोप से लड़ने के लिए हर तरह के कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
