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'मिशन इंद्रधनुष' को कामयाब बनाने के लिए नदी-नाले पार कर रहीं महिला स्वास्थ्यकर्मी

Sat, 14 Oct 2017 01:59 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा Updated Sat, 14 Oct 2017 01:59 PM IST
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Dedicated healthworkers cross difficult terrains for immunization of children in Sheopur MP
महिला हेल्थवर्कर नदी पार कर जाते हुए - फोटो : PIB

बेहतर स्वास्‍थ्य के लिए केवल सरकार ही नहीं लोग भी बेहद गंभीर हैं। यह तस्वीर इस बात की गवाह है कि बच्चों की सेहत के लिए ये महिलाएं किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह तस्वीर है मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले की। जहां ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बीमारियों से बचाव का टीका लगाने के लिए ये महिला स्वास्‍थ्यकर्मी दुरूह रास्तों को पार करने से पीछे नहीं हट रही हैं।

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गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने नवजातों को घातक बीमारी से बचाने के लिए एकबार फिर से मिशन इंद्रधनुष शुरू किया है। इसमें बच्चों को सात घातक बीमारियों के बचाव के टीके लगाए जाते हैं। पिछले दिनों सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मिशन इंद्रधनुष को एकबार फिर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मिशन के अंतर्गत राज्य के 13 जिलों में पांच साल तक के बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा और जिससे नौनिहालों को 9 जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकेगा। 2 वर्षों तक चलाए जाते वाले इस मिशन में लगभग 90,000 बच्चों को सात तरह की वैक्सीन दी जाएगी।
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दरसअल, पांच साल तक के बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण एक किफायती और सुरक्षित तरीका है। इसके लिए भारत सरकार ने साल 2014 में मिशन इंद्रधनुष के नाम से टीकाकरण का विशेष अभियान शुरू किया था।
 

मिशन इंद्रधनुष के पहले चरण में देश के 201 जिलों को टारगेट बनाया गया था।

Dedicated healthworkers cross difficult terrains for immunization of children in Sheopur MP
शिवराज सिंह चौहान - फोटो : ANI
​ मिशन इंद्रधनुष के पहले चरण में देश के 201 जिलों को टारगेट बनाया गया था। मध्यप्रदेश में पहले चरण में मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत विदिशा जिले में साल 2015 में हुई थी, उस दौरान प्रदेश के करीब 15 जिलों में मिशन चलाया गया था।

भारत सरकार के इंद्रधनुष मिशन के तहत पांच साल तक के बच्चों को जानलेवा सात बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगाए जाते है। इन बीमारियों में खसरा, टिटनस, पोलियो, टीबी, गलघोंटू, काली खांसी, हेपेटाईटिस 'बी', विटामिन 'ए' और हिमोफिलिस इंफल्यूऐंजा 'बी' शामिल हैं। पोलियो के अलावा सभी रोग पतिरक्षण टीके इंजेक्शन द्वारा दिए जाते हैं. पोलियो के टीके की दवा और विटामिन 'ए' की खुराक बच्चे को मुंह में पिलाई जाती है।
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