Damoh News: न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए टूरिस्ट प्लेस तैयार, धार्मिक स्थलों पर भी रहेगी भारी भीड़
Damoh News: वर्ष का पहला दिन लोगों के दिलों में नई उमंग, जोश व आशाएं लेकर आता है और लोग इस दिन को बेहतर तरीके से बिताते हैं। जिसमें अनेक रमणीय स्थलों पर जाकर वर्ष का पहला दिन मनाना भी एक सुखद एहसास होता है। नए वर्ष के जश्न मनाने के लिए युवा आज दमोह के अनेक पयर्टन स्थलों का रुख करेंगे। ऐसे में जिले के पर्यटन स्थलों पर भी नए वर्ष के पहले ही दिन लोगों की बड़ी संख्या में दस्तक देखने को मिलेगी।
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विस्तार
जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर दमोह कटनी सड़क एवं रेल मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल जागेश्वर नाथ धाम बांदकपुर में नए वर्ष के उपलक्ष्य में भक्त अपने परिजनों के साथ पहुंचकर भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का अभिषेक करते हुए पूजन अर्चन कर रहे हैं। आदर्श ग्राम का दर्जा प्राप्त क्षेत्र में मौजूद शिवलिंग के दर्शन से लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता रखते हैं। वहीं यहां माता पार्वती का मंदिर सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य दायक माना गया है। इसी क्षेत्र के समीप भगवान भोलेनाथ की ससुराल रोहनिया में है, जहां से भोलेनाथ की लगुन भी आती है। इस वर्ष भी लोग सोमवार भी होने के कारण बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजन अर्चन के साथ नए वर्ष की शुरूआत कर रहे है।
राजनगर तालाब
शहर की समीप ही एक स्थान नगर से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित राजनगर तालाब वर्तमान में पयर्टन का एक आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां पर नगर में जल सप्लाई के लिए स्टोर किया जाने वाला पानी एक नैसर्गिक सुंदरता पैदा करता है। साथ ही यहां प्रशासन ने भी लोगों के घूमने फिरने के लिए कई इंतजाम किए हैं। जो इसे और भी बेहतर बनाते हैं। लोगों की एक अच्छी पसंद बन चुका है।
निदान कुंड प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना
दमोह जबलपुर मार्ग पर दमोह से 60 किलोमीटर की दूरी पर सिग्रामपुर के समीप पहाड़ियों के बीच स्थित निदान कुंड अपने अंदर प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना समेटे हुए हैं। यहां आने वाले पयर्टकों के लिए प्रकृति के बीच घने जंगल के बीच पहाड़ों के ऊपर से कल-कल का जल प्रताप देखते ही बनता है और इसके समीप ही नजारा पॉइंट जहां से सारी जंगल की सुंदरता को निहारा जा सकता है। यह स्थान पयर्टन की दृष्टि से जिले के अलावा अन्य स्थानों पर भी अपनी एक अलग ही पहचान रखता है। यहां पर नए वर्ष का जश्न मनाने के लिए लोग पहुंचेंगे और नए वर्ष का आगाज करेंगे।
जलप्रपात भी यहां की पहचान
क्षेत्र में मौजूद निदान,मटक कुंड के जलप्रपात भी यहां की विशिष्ट पहचान रखते हैं। जबेरा जनपद के रानी दुर्गावती अभ्यारण सिग्रामपुर से लेकर बंसीपुर टापू तक प्राकृतिक सौंदर्य सहित ऐतिहासिक धरोहरों को देखते हुए पयर्टन की संभावना को बढ़ाया गया है। तत्कालीन जबेरा विधायक व मंत्री स्वर्गीय रत्नेश सालोमन ने वर्ष 1996 में रानी दुर्गावती अभ्यारण की नींव रखी थी, जिसके बाद यहां के कई क्षेत्र लोगों की नजर में आए और वहां सैलानियों की पहुंच होने लगी और इस क्षेत्र को विकसित किए जाने के लगातार प्रयासों के बाद यहां पर भी नववर्ष को मनाने लोग बड़ी संख्या में पहुंचेंगे।
नोह्लेश्वर मंदिर नोहटा कल्चुली इतिहास की गौरवशाली झलक
जिले के नोहटा ग्राम में स्थित प्राचीन नोहलेश्वर शिव मंदिर अपनी प्राचीनता के साथ कलचुरी कालीन इतिहास की झलक दिखाता है। इस क्षेत्र में नोहलेश्वर समारोह के साथ एक आयोजन भी होता था। नव वर्ष पर लोग इस मंदिर के दर्शनों के लिए भी लोग पहुंचते हैं।
जैन तीर्थ स्थल कुंडलपुर जहां बड़े बाबा हैं अतिशय कारी रूप में
जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर पटेरा तहसील के प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल कुंडलपुर में भी धार्मिक दृष्टि के साथ पयर्टन के क्षेत्र में भी अपना विशेष स्थान रखता है। यहां जैन धर्मावलंबी सहित अन्य धर्म के लोग पहुंचकर वर्ष की एक सकारात्मक शुरुआत करते हैं। पहाड़ियों पर स्थित जैन तीर्थ स्थल में मौजूद 108 मंदिर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं। वहीं इसी क्षेत्र में ही प्राचीन रुकमणी मठ भी है जो धार्मिक व पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और लोगों की भीड़ देखी जायेगी।
मडकोलेश्वर सीतानगर
तीन नदियों के संगम पर बना क्षेत्र देश के धार्मिक व सनातन परंपरा की दृष्टि सहित सबसे प्राचीन नगरों में शामिल प्रयागराज जहां अपनी तीन नदियों के संगम के लिए जाना जाता है। उसी तरह जिले के सीता नगर के मर्डकोलेश्वर धाम में भी तीन नदियों का संगम होता है। जो लोगों के लिए धार्मिक महत्व को बताता है। यहां पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां एक अत्यंत प्राचीन भगवान श्री राम की प्राचीन प्रतिमा भी थी। जो कुछ वर्षों पूर्व चोरी हो गई लेकिन उसके बाद भी इस क्षेत्र का महत्व कम नहीं हुआ है। नव वर्ष पर हमेशा की तरह लोग यहां भी बड़ी संख्या में आएंगे और नववर्ष के आगमन का लुफ्त उठाएंगे।
गणेश मंदिर झागर
भगवान श्री गणेश की अलौकिक प्रतिमा सागर दमोह मार्ग से 22 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क से 5 किलोमीटर अंदर पथरिया तहसील के ग्राम झागर में स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिर लोगों के धार्मिक और आकर्षण का केंद्र है। यहां पर भगवान श्री गणेश की अलौकिक अत्यंत प्राचीन प्रतिमाओं को भक्तों द्वारा सिंदूर चढ़ाया जाता है। इन प्रतिमाओं के दर्शन के लिए दूर-दूर से सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
वन्य क्षेत्र सिग्रामपुर अनेक पयर्टन स्थलों को अपने अंदर समेटे हुए
जिले के जबलपुर की सीमा पर लगे जबेरा तहसील अंतर्गत आने वाले क्षेत्र सिग्रामपुर प्राकृतिक सौंदर्य,पयर्टन सहित ऐतिहासिक स्थलों को भी अपने अंदर समेटे हुए हैं। यहां पयर्टकों के लिए सेंचुरी में घूमने के लिए बड़ा चक्कर, छोटा चक्कर, मझला चक्कर, बहनी ड्राइव का आनंद लेकर वन्य जीवन की झलक देख सकते हैं। यहां मौजूद कुंड में भालू को देखा जा सकता है। इसके अलावा सिग्रामपुर से 5 किलोमीटर की दूरी पर भैंसा फाल के साथ ग्राम चौरई के पास बावन बजरिया, अलोनी में कलचुरी कालीन शिव मंदिर,अलोनी में ही 44 किलोमीटर लंबी प्राचीर निकली हुई है। ग्राम दोनी में कलचुरी कालीन शिव मंदिर के जीण शीण अवस्था में 7 मंदिरों का समूह प्राचीन बावड़ी में भी है। इसके अलावा अलौली मुख्य मार्ग से 10 किलोमीटर अंदर तालाब से 5 किलोमीटर जंगल के अंदर प्राचीन किला है। जहां कई मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। इसके अलावा सुंदर बंदरिया फाल सहित क्षेत्र किशनगढ़ भी है।
