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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Damoh News ›   MP News: 26 people, including a 6-month-old child, were hanged at Damoh's Phansiya drain.

MP News: दमोह के फांसिया नाले का नीम का पेड़; यहां 6 माह के बच्चे सहित 26 को दी गई थी फांसी, पढ़ें पूरा मामला

Fri, 26 Jan 2024 03:09 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 26 Jan 2024 03:09 PM IST
सार

दमोह में एक नीम के पेड़ पर 6 माह के बच्चे सहित 26 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी, तभी से ये स्थान फांसिया नाले के रूप में पहचाने जाने लगा।

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MP News: 26 people, including a 6-month-old child, were hanged at Damoh's Phansiya drain.
जिले में ऐसे कई क्रांतिकारी पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

जिले में ऐसे कई क्रांतिकारी पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। दमोह में भी एक ऐसा स्थान है, जहां देश की 6 माह के बच्चे सहित 27 लोगों को साथ फांसी की सजा दी गई थी। ये स्थान जिले के नरसिंहगढ़ में फांसिया नाले के नाम से प्रसिद्ध है।
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आज 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर इन क्रांतिकारियों को याद किया जाएगा, क्योंकि ये वो क्रांतिकारी हैं जिन्होंने राष्ट्र के लिए फांसी के फंदे को स्वीकार किया था। नरसिंहगढ़ के फांसिया नाला में नीम के पेड़ के नीचे एक साथ 27 लोगों को अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था। इनमें 18 लोग दमोह जिले के थे। वहीं 9 लोग सागर जिले के रहने वाले थे। इनमें 6 माह का मां का दुधमुहा बच्चा भी शामिल था।
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ये है फांसिया नाले का इतिहास
जबलपुर से मद्रास रेजीमेंट के मेजर किनकिनी अपनी सेना को लेकर दमोह से होते हुए 17 सितंबर 1857 को नरसिंहगढ़ पहुंचे थे। जिन्होंने मराठा सूबेदार रघुनाथ राव करमाकर के किले पर हमला कर उन्हें व उनके फडविस रामचंद्र राव को पकड़ लिया। शाहगढ़ के राजा बखत बली के विद्रोही सैनिकों को अपने किले में शरण देने के कारण किले पर ही फांसी के फंदे पर लटका दिया व उनके दीवान पंडित अजब दास तिवारी सहित 18 परिजन जिसमे 6 माह का बच्चा भी शामिल था। सभी को पकड़कर जन सामान्य को भयभीत करने के लिए 18 सितंबर की सुबह नाले के किनारे लगे नीम के पेड़ से लटककर फांसी दे दी। तभी से इस नाले का नाम फांसिया नाला पड़ गया। इसी दौरान दमोह शहर की गजानन टेकरी के पीछे बालाकोट के जमीदार सोने सिंह और स्वरूप सिंह ने मराठा सूबेदार गोविंद राव का राजतिलक किया। जिन्होंने तीन दिन दमोह पर शासन किया था, जिन्हें बाद में अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं  हिंडोरिया के किशोर सिंह ने दमोह की जेल पर हमला कर दिया व क्रांतिकारियों को छुड़ाकर खजाना लूट लिया था। इन पर व कारीजोग खेजरा के ठाकुर पंचम सिंह पर एक-एक हजार का इनाम घोषित किया गया था।
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तेजगढ़ के राजा हिरदे शाह ने भी अंग्रेजों के खिलाफ की थी क्रांति
बुंदेला विद्रोह के नाम से इतिहास में दर्ज क्रांति के पूर्व तेजगढ़ के राजा ह्रदय शाह ने भी अग्रेजों के खिलाफ क्रांति की शुरुआत की थी वह क्रांति के शुरूआती नायक थे। इस जानकारी से अवगत कराते हुए दमोह के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल हर साल 15 अगस्त ओर 26 जनवरी को यहां पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि देते थे।   नरसिंहगढ़ प्रवास के दौरान उन्होंने बताया था कि राजा हृदय शाह की गिरफ्तारी के बाद जब बुंदेलाओं को लगा कि अंग्रेजी सरकार द्वारा धोखा किया गया है तब वह क्रांति में शामिल हुए और 1942 की क्रांति को बुंदेला विद्रोह का नाम मिला। जिसकी शुरुआत राजा हृदय शाह ने की थी। आज भी नरसिंहपुर जिले के हीरापुर में इनके वंशज रहते हैं। क्रांति के इतिहास के स्मरण के लिए तेजगढ़ में एक नाटक का आयोजन किया गया था जिनमें राजा हृदय शाह के वंशज भी आए थे।

12 वर्ष से आयोजित होने लगा कार्यक्रम
 वर्ष 2012 में नरसिंहगढ़ के युवा शैलेंद्र श्रीवास्तव ने एक संगठन बनाया जिसका नाम भारतीय युवा संगठन रखा गया और संगठन के सदस्यों ने सबसे पहले शहीद स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि देने की शुरुआत की थी। पिछले 12 साल से लगातार युवा संगठन के माध्यम से शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को याद किया जाता है। नरसिंहगढ़ में

शहीद स्थल को एक अलग पहचान मिली है। शैलेंद्र ने बताया कि यह स्थान उपेक्षा का शिकार है। वह चाहते हैं की जिस स्थान पर 6 माह के बच्चे सहित 18 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी वह स्थान पूरे देश में जाना जाए। इसलिए शासन, प्रशासन को इस स्थान का अच्छे से जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए।
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