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Damoh News: उपवनमंडल अधिकारी ने बिन पिता की बेटी का किया कन्यादान, धूमधाम से कराई शादी, लोगों ने की सराहना

Sat, 20 Apr 2024 10:11 AM IST
दमोह ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Sat, 20 Apr 2024 10:11 AM IST
सार

उपवनमंडल अधिकारी हेमंत यादव ने बताया कि जिस बेटी की शादी की है, उसके पिता की मौत बहुत पहले हो गई थी। मैंने उसी समय उसकी शादी करने का संकल्प लिया था और वह संकल्प 17 अप्रैल को मेरे पिता और अन्य परिजनों के सहयोग से पूरा किया है।  

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Forest officer of Damoh took Kanyadaan of fatherless daughter got the marriage done
अपनी पत्नी के साथ बेटी का कन्यादान करते अधिकारी

विस्तार

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक के गुंहची गांव के रहने वाले युवा उपवनमंडल अधिकारी हेमंत यादव ने एक बिन पिता की बेटी का कन्यादान करते हुए धूमधाम से उसका विवाह किया। उन्होंने पालक पिता की तरह बेटी को विदा किया, 17 अप्रैल को धूमधाम से उसका विवाह संपन्न हुआ। अब युवा अधिकारी द्वारा किए गए नेक कार्य की चारों ओर सराहना हो रही है। 
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दरअसल, गुंहची गांव की पहचान मुनि तरूण सागर जी के नाम से है। पूरी दुनिया में अपने प्रवचनों से पहचाने जाने वाले इन महान संत का जन्म भी यहीं हुआ था। इसी गांव में जन्मे हेमंत यादव का चयन उपवनमंडल अधिकारी के पद पर हुआ था और उनके पिता रिटायर्ड शिक्षक हैं। वर्तमान में यादव सागर जिले के दक्षिण वन मंडल में उपवनमंडल अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। गुंहची गांव की रहने वाली यादव परिवार की बेटी अनुराधा यादव के पिता का निधन उसके जन्म के पहले ही हो गया था। बेटी वर्तमान में बीए सेकेंड की पढ़ाई कर रही है। परिवार के लोगों ने बेटी का विवाह दमोह के केवलारी उपाध्याय गांव में तय किया और 17 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई। 
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हेमंत यादव को इसकी जानकारी लगी कि जिस बेटी के कन्यादान का संकल्प वह पहले ले चुके हैं, अब उसका विवाह हो रहा है। 
तब वे बेटी के परिवार के लोग भी मिलने पहुंचे और विवाह का खर्च उठाने की बात कही। 17 अप्रैल को बारात गुंहची गांव पहुंची तो उपवनमंडल अधिकारी हेमंत ने पालक पिता की भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ अनुराधा का कन्यादान किया और विवाह संपन्न कराकर बेटी को हंसी, खुशी विदा किया। एक अधिकारी द्वारा किए गए इस नेक कार्य की जानकारी लोगों को लगी तो उन्होंने उनकी सराहना की। हेमंत के एक भाई आईआईटी रुड़की में प्रोफेसर हैं, लेकिन उन्होंने अपनी जन्मभूमि के प्रति समर्पण दिखाते हुए जिस तरह से बिना पिता की बेटी का विवाह कराया है वह तारीफ के लायक है।
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सभी को करने चाहिए इस प्रकार के कार्य
उपवनमंडल अधिकारी ने बेटी की विवाह की सूचना अपने फेसबुक एकाउंट पर लिखते हुए सभी लोगों को आमंत्रित भी किया था। कई लोग इस आयोजन में शामिल भी हुए थे। उन्होंने लिखा कि जीवन की भागदौड़ में हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने और समाज के लिए वक्त नहीं बचता, लेकिन जीवन में कुछ काम ऐसे करने चाहिए जिससे आप अपने आप में गौरवांवित महसूस कर सकें। इसी कड़ी में मैने एक ऐसी बच्ची का कन्यादान कर विवाह किया जिसके पिता का देहांत जन्म के पहले ही हो गया था। 

इस सराहनीय कार्य के बारे में झलौन और आसपास लगे गांव के लोगों से बात की तो उन्होंने युवा अधिकारी के कार्य को सराहनीय बताया। साथ ही समाज और क्षेत्र में एक अच्छी पहल शुरू होने की बात है।


उपवनमंडल अधिकारी हेमंत यादव ने कहा कि जिस बच्ची की उन्होंने शादी की है वह उनके दूर के रिश्तेदार हैं। बेटी के पिता की मौत बेटी के जन्म से पहले करंट लगने से हो गई थी। मैंने उसी समय बेटी की शादी करने का संकल्प ले लिया था और वह संकल्प 17 अप्रैल को मेरे रिटायर्ट शिक्षक पिता रामप्रसाद यादव, अन्य परिजनों और बेटी के भाइयों के सहयोग से पूरा किया है। मैं समाज के लोगों से अपील करता हूं कि यदि ऐसे कोई परिवार मिलते हैं तो उनकी मदद के लिए आगे आएं। मैंने जो किया उसके बाद मुझे बड़ा सुकून मिला है, भविष्य में भी ऐसे कार्य करने का प्रयास करूंगा।
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