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Damoh News: अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में छह लोगों की हुई थी मौत, डेढ़ महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा

Tue, 19 Dec 2023 10:24 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 19 Dec 2023 10:24 PM IST
सार

दमोह जिले की अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में छह लोगों की मौत हुई थी। मौत होने के डेढ़ महीने बाद भी अभी तक पीड़ित परिवार को शासन की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया है।

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Damoh No compensation received in case of death of six people in illegal firecracker factory blast
अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दमोह में शहर के बीचों बीच बड़े पुल के पास संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री में 30 अक्तूबर को हुए विस्फोट में मालिक सहित छह मजदूरों की मौत हो गई थी। डेढ़ महीने बाद मृतकों और घायलों के परिजनों को कोई सहायता राशि नहीं मिल पाई है। इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच तय समय में नहीं हो पाई है। इसे 30 दिन में पूरा करना था, लेकिन 49 दिन गुजरने के बाद भी जांच का खुलासा नहीं हुआ है। जबकि जांच अधिकारी एडीएम ने दावा किया है कि उन्होंने जांच का प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंप दिया है।

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वहीं, कलेक्टर का कहना है कि अभी उन्होंने प्रतिवेदन खोला नहीं है। यहां पर पुलिस की जांच और धीमी गति से चल रही है। आईजी ने 15 दिन में जांच करने का आदेश दिया था। लेकिन उनकी जांच का कोई अता-पता नहीं है। ऐसी स्थिति में अभी तक तय नहीं हो पाया है कि छह लोगों की मौत के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
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इससे पहले जांच अधिकारी एडीएम मीना मसराम ने अलग-अलग पहलू जांच में शामिल किए थे। उन्होंने मौके पर जाकर पीड़ित और पड़ोसियों के बयान भी लिए थे। नगर पालिका, कोतवाली पुलिस और विस्फोटक लाइसेंस जारी करने वालों से पूरी जानकारी जुटाई और जांच प्रतिवेदन तैयार किया। सूत्रों के मुताबिक, 60 से अधिक लोगों के बयान जांच के दौरान लिए गए हैं। हालांकि, विभाग को अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालित होने की कोई पुख्ता शिकायत नहीं मिली है और न ही किसी ने इस तरह की संदिग्ध प्रतिविधियां संचालित होने की कोई सूचना दी।
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ऐसे में अधिकारियों ने पड़ोसियों और पीड़ित परिवार के परिजन के बयान लिए हैं, लेकिन उनका जांच प्रतिवेदन कलेक्टर ने अब तक नहीं खोला है। इधर, सागर रेंज के आईजी प्रमोद वर्मा ने 15 दिन के अंदर मजिस्ट्रियल जांच होने की बात कही थी। लेकिन पुलिस की जांच अभी तक सामने ही नहीं आई। ऐसे में पुलिस और प्रशासन दोनों की जांच पूरी नहीं हुई है।


बताते चलें, बड़ा पुल स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से फैक्ट्री मालिक और दो महिला मजदूरों की तुरंत मौत हो गई थी। उसके बाद एक-एक करके तीन महिला मजदूरों की और मौत हुई। छह मजदूर गंभीर घायल हो गए थे। मृतकों में रिंकी कोरी (30), अपूर्वा खटीक (19), फैक्ट्री मालिक अभय गुप्ता (44), रामकली कोष्ठी (47), विनीता रैकवार (55), उमा कोरी (22) शामिल थीं। इन पीड़ित परिवार को अभी तक किसी भी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। क्योंकि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी। कलेक्टर मयंक अग्रवाल का कहना है कि जांच हो गई है। अभी प्रतिवेदन नहीं देखा है। एक बार प्रतिवेदन देख लिया जाए, उसके बाद जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उस हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।

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