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Damoh News: न्यायालय के आदेश पर दो साल बाद खुला बूंदा बहू मंदिर का लॉकर, सोने के आभूषण नहीं मिलने से उठे सवाल
Thu, 20 Aug 2026 03:43 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 03:43 PM IST
सार
बूंदा बहू मंदिर के लॉकर और दान पेटी खुलते ही मंदिर की संपत्ति को लेकर सवाल फिर उठ खड़े हुए हैं। लॉकर से केवल चांदी के आभूषण मिले, जबकि सोने के गहने नहीं मिलने पर आचार्य ने आपत्ति जताई है। प्रशासन सामान की सूची बनाकर पुराने रिकॉर्ड से मिलान कर रहा है।
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मंदिर के लॉकर से निकले आभूषण
- फोटो : credit
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विस्तार
शहर के प्रसिद्ध बूंदा बहू मंदिर के लॉकर और दान पेटी बुधवार को न्यायालय के आदेश पर करीब दो साल बाद खोले गए। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार रॉबिन जैन, आरआई अभिषेक जैन, राजस्व अमला और मंदिर से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। लॉकर से चांदी के आभूषण मिलने की जानकारी सामने आई है, जबकि सोने के आभूषण नहीं मिलने पर मंदिर के आचार्य ने सवाल उठाए हैं। फिलहाल दान पेटी से प्राप्त राशि और लॉकर में मिली सामग्री की गणना कर सूची तैयार की जा रही है।
आचार्य बोले- पहले सोने के आभूषणों से होता था शृंगार
मंदिर के आचार्य चंद्र गोपाल पौराणिक ने कहा कि लॉकर खोलने पर केवल चांदी के आभूषण मिले लेकिन सोने का कोई आभूषण नहीं मिला। उनका दावा है कि वे कई वर्षों से मंदिर से जुड़े हैं और पहले माता का शृंगार सोने के आभूषणों से होते देखते रहे हैं। ऐसे में सोने के आभूषण नहीं मिलने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
आचार्य के अनुसार मंदिर कमेटी के सदस्यों ने लॉकर और दान पेटी की चाबियां रिसीवर को नहीं सौंपी थीं। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। अदालत ने 7 अगस्त को लॉकर और दान पेटी खोलकर उनमें मौजूद नकदी और सामग्री की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश के तहत बुधवार को कार्रवाई की गई।
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बैंक लॉकर को लेकर भी उठे सवाल
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार कोऑपरेटिव बैंक में भी मंदिर का एक लॉकर है। मंदिर कमेटी की ओर से उसके खाली होने की बात कही गई है। आचार्य ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि लॉकर खाली है तो उसका किराया क्यों दिया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: Khargone/Khandwa: मुनाफे से नीलामी तक पहुंची पूर्व मंत्री की जवाहर कॉटन मिल, चढ़ा 24.16 करोड़ का कर्ज
जानकारी के मुताबिक यह बैंक लॉकर 10 जून 2016 को प्रेमलाल अग्रवाल के नाम से खोला गया था। इसके बाद उसमें क्या सामग्री रखी गई और कब निकाली गई, इसका रिकॉर्ड मंदिर कमेटी के पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। लॉकर की चाबी नहीं मिलने पर नियमानुसार नई चाबी बनवाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के बाद ट्रस्ट भंग
बूंदा बहू मंदिर ट्रस्ट पिछले करीब दो वर्षों से विवादों में है। मंदिर से जुड़े लोगों ने तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों पर करीब 80 लाख रुपए की कथित हेराफेरी के आरोप लगाए थे। इसके अलावा करोड़ों रुपए की अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। मामले के बाद न्यायालय के निर्देश पर ट्रस्ट को भंग कर तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया गया था। इसके बाद मंदिर के लॉकर और दान पेटी खोलकर नकदी और आभूषणों का हिसाब तैयार करने की मांग की जा रही थी लेकिन चाबियां उपलब्ध नहीं होने के कारण यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित थी।
पुराने रिकॉर्ड से होगा मिलान
तहसीलदार रॉबिन जैन ने बताया कि बूंदा बहू मंदिर ट्रस्ट से संबंधित प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत के आदेश के अनुसार लॉकर और दान पेटी खोलकर उनमें मौजूद राशि और सामग्री की सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि मंदिर कमेटी की ओर से वह पुराना रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसमें करीब दो वर्ष पहले नकदी और आभूषणों की गणना का विवरण दर्ज था। वर्तमान में दान पेटी में मिली राशि की गिनती और लॉकर से प्राप्त आभूषणों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद पुराने रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जाएगा।
बैंक लॉकर की भी हो सकती है जांच
प्रशासन के अनुसार मंदिर के बैंक लॉकर की चाबी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर की संपत्ति, नकदी और आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और बाद में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों से मिलान किया जा सके। कार्रवाई के दौरान आरआई अभिषेक जैन, पटवारी बृजेश पटेल, अवधेश प्रताप सिंह, हरिओम सोनी, प्रज्ञा मिश्रा और मंदिर ट्रस्ट की ओर से कीरत सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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आचार्य बोले- पहले सोने के आभूषणों से होता था शृंगार
मंदिर के आचार्य चंद्र गोपाल पौराणिक ने कहा कि लॉकर खोलने पर केवल चांदी के आभूषण मिले लेकिन सोने का कोई आभूषण नहीं मिला। उनका दावा है कि वे कई वर्षों से मंदिर से जुड़े हैं और पहले माता का शृंगार सोने के आभूषणों से होते देखते रहे हैं। ऐसे में सोने के आभूषण नहीं मिलने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
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आचार्य के अनुसार मंदिर कमेटी के सदस्यों ने लॉकर और दान पेटी की चाबियां रिसीवर को नहीं सौंपी थीं। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। अदालत ने 7 अगस्त को लॉकर और दान पेटी खोलकर उनमें मौजूद नकदी और सामग्री की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश के तहत बुधवार को कार्रवाई की गई।
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बैंक लॉकर को लेकर भी उठे सवाल
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार कोऑपरेटिव बैंक में भी मंदिर का एक लॉकर है। मंदिर कमेटी की ओर से उसके खाली होने की बात कही गई है। आचार्य ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि लॉकर खाली है तो उसका किराया क्यों दिया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक यह बैंक लॉकर 10 जून 2016 को प्रेमलाल अग्रवाल के नाम से खोला गया था। इसके बाद उसमें क्या सामग्री रखी गई और कब निकाली गई, इसका रिकॉर्ड मंदिर कमेटी के पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। लॉकर की चाबी नहीं मिलने पर नियमानुसार नई चाबी बनवाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के बाद ट्रस्ट भंग
बूंदा बहू मंदिर ट्रस्ट पिछले करीब दो वर्षों से विवादों में है। मंदिर से जुड़े लोगों ने तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों पर करीब 80 लाख रुपए की कथित हेराफेरी के आरोप लगाए थे। इसके अलावा करोड़ों रुपए की अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। मामले के बाद न्यायालय के निर्देश पर ट्रस्ट को भंग कर तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया गया था। इसके बाद मंदिर के लॉकर और दान पेटी खोलकर नकदी और आभूषणों का हिसाब तैयार करने की मांग की जा रही थी लेकिन चाबियां उपलब्ध नहीं होने के कारण यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित थी।
पुराने रिकॉर्ड से होगा मिलान
तहसीलदार रॉबिन जैन ने बताया कि बूंदा बहू मंदिर ट्रस्ट से संबंधित प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत के आदेश के अनुसार लॉकर और दान पेटी खोलकर उनमें मौजूद राशि और सामग्री की सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि मंदिर कमेटी की ओर से वह पुराना रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसमें करीब दो वर्ष पहले नकदी और आभूषणों की गणना का विवरण दर्ज था। वर्तमान में दान पेटी में मिली राशि की गिनती और लॉकर से प्राप्त आभूषणों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद पुराने रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जाएगा।
बैंक लॉकर की भी हो सकती है जांच
प्रशासन के अनुसार मंदिर के बैंक लॉकर की चाबी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर की संपत्ति, नकदी और आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और बाद में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों से मिलान किया जा सके। कार्रवाई के दौरान आरआई अभिषेक जैन, पटवारी बृजेश पटेल, अवधेश प्रताप सिंह, हरिओम सोनी, प्रज्ञा मिश्रा और मंदिर ट्रस्ट की ओर से कीरत सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
