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Damoh: क्रिश्चियन कॉलोनी में मकान में मिले 12 बच्चों को दी जा रही थी ईसाई धर्म की शिक्षा, दो पर मामला दर्ज
Sat, 01 Feb 2025 10:31 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2025 10:31 AM IST
सार
बाल आयोग के सदस्य ओमकार सिंह ने बताया कि सभी बच्चे नाबालिग हैं। इनको 18 साल के होने पर धर्मांतरण करने के उद्देश्य से रखा गया था और ईसाई धर्म की शिक्षा भी दी जा रही थी, जिसके प्रमाण के रूप में ईसाई धर्म से संबंधित पुस्तकें मिली हैं।
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कार्रवाई करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दमोह शहर के क्रिश्चियन कॉलोनी में एक मकान में 12 नाबालिग बच्चे मिलने के मामले में दो लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। बुधवार की रात यहां पुलिस, महिला बाल विकास और बाल कल्याण आयोग की टीम ने छापा मारा था। शुक्रवार को दमोह पहुंचे मध्य प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य ओमकार सिंह ने बताया कि मकान में अवैध छात्रावास संचालित किया जा रहा था।
जिसमें प्रवीण शुक्ला नाम के व्यक्ति द्वारा 12 बच्चों को रखा गया था। इनमें 1 बच्चा मंडला का और 11 बच्चे झाबुआ के हैं जो सभी नाबालिग हैं। इन बच्चों को 18 साल के होने पर धर्मांतरण करने के उद्देश्य से रखा गया था और ईसाई धर्म की शिक्षा भी दी जा रही थी, जिसके प्रमाण के रूप में ईसाई धर्म से संबंधित पुस्तकें भी मिली हैं। प्रवीण शुक्ला और उसकी सहायक अनामिका क्रोजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिसमें पुलिस ने धारा 143(3), 143(4), 3/5 धार्मिक स्वतंत्रता, किशोर न्याय अधिनियम 42,75, 3,2,5 एससीएसटी एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
आयोग के सदस्य ओमकार सिंह ने बताया कि इन बच्चों का प्रवेश नवजागृति स्कूल में कराया गया था और प्रवेश के लिए बच्चों के अभिभावकों की जगह प्रवीण एवं एवं उसके बेटे प्रणय उर्फ शनि के हस्ताक्षर मिले हैं, जिसकी जांच कराई जा रही है। प्रवीण धर्मांतरित होकर ईसाई शिक्षा से बच्चों को जोड़ रहा है जिन बच्चों को दमोह लाया गया है, उसमें उनके गांव से नेटवर्क जोड़ा गया था। जबकि आरटीई के तहत 3 किमी तक नजदीकी स्कूल में प्रवेश दिलाए जाने का प्रावधान है। जिसका भी उल्लंघन किया गया है।
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बच्चों से कराया जाता था घरेलू काम
पूर्व बाल कल्याण समिति सदस्य अधिवक्ता दीपक तिवारी ने बताया कि उन्हें बच्चों द्वारा बताया गया है कि उनसे गाय का गोबर साफ कराया जाता था। कुत्ते की गंदगी साफ करवाई जाती थी, घर में साफ सफाई सहित अन्य घरेलू काम करवाए जाते थे और इसके बदले मजदूरी भी दी जाती थी।
दो साल पहले भी की थी कार्रवाई
बाल आयोग सदस्य ने बताया कि सूचना मिलने पर दो साल पहले भी टीम ने रेट की थी, लेकिन खबर लीक होने के कारण मौके पर बच्चे नहीं मिल पाए थे। इस बार बच्चे मिल गए। सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति सागर के संरक्षण में रखा गया है और समिति के माध्यम से अभिभावकों को सौंपा जाएगा।
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जिसमें प्रवीण शुक्ला नाम के व्यक्ति द्वारा 12 बच्चों को रखा गया था। इनमें 1 बच्चा मंडला का और 11 बच्चे झाबुआ के हैं जो सभी नाबालिग हैं। इन बच्चों को 18 साल के होने पर धर्मांतरण करने के उद्देश्य से रखा गया था और ईसाई धर्म की शिक्षा भी दी जा रही थी, जिसके प्रमाण के रूप में ईसाई धर्म से संबंधित पुस्तकें भी मिली हैं। प्रवीण शुक्ला और उसकी सहायक अनामिका क्रोजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिसमें पुलिस ने धारा 143(3), 143(4), 3/5 धार्मिक स्वतंत्रता, किशोर न्याय अधिनियम 42,75, 3,2,5 एससीएसटी एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
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आयोग के सदस्य ओमकार सिंह ने बताया कि इन बच्चों का प्रवेश नवजागृति स्कूल में कराया गया था और प्रवेश के लिए बच्चों के अभिभावकों की जगह प्रवीण एवं एवं उसके बेटे प्रणय उर्फ शनि के हस्ताक्षर मिले हैं, जिसकी जांच कराई जा रही है। प्रवीण धर्मांतरित होकर ईसाई शिक्षा से बच्चों को जोड़ रहा है जिन बच्चों को दमोह लाया गया है, उसमें उनके गांव से नेटवर्क जोड़ा गया था। जबकि आरटीई के तहत 3 किमी तक नजदीकी स्कूल में प्रवेश दिलाए जाने का प्रावधान है। जिसका भी उल्लंघन किया गया है।
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बच्चों से कराया जाता था घरेलू काम
पूर्व बाल कल्याण समिति सदस्य अधिवक्ता दीपक तिवारी ने बताया कि उन्हें बच्चों द्वारा बताया गया है कि उनसे गाय का गोबर साफ कराया जाता था। कुत्ते की गंदगी साफ करवाई जाती थी, घर में साफ सफाई सहित अन्य घरेलू काम करवाए जाते थे और इसके बदले मजदूरी भी दी जाती थी।
दो साल पहले भी की थी कार्रवाई
बाल आयोग सदस्य ने बताया कि सूचना मिलने पर दो साल पहले भी टीम ने रेट की थी, लेकिन खबर लीक होने के कारण मौके पर बच्चे नहीं मिल पाए थे। इस बार बच्चे मिल गए। सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति सागर के संरक्षण में रखा गया है और समिति के माध्यम से अभिभावकों को सौंपा जाएगा।
