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Damoh News: भक्तों की पीड़ा हरने भगवान हो गए बीमार, 15 दिन नहीं होंगे भगवान जगन्नाथ के दर्शन
Sun, 04 Jun 2023 07:20 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sun, 04 Jun 2023 07:20 PM IST
सार
दमोह में जगन्नाथ स्वामी का मंदिर 15 दिन बंद रहेगा। भगवान बीमार हो गए हैं और 15 दिन आराम करेंगे। पंडितों ने रविवार को जलाभिषेक किया और 15 दिन के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
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दमोह का जगन्नाथ मंदिर, जो 15 दिन के लिए बंद रहेगा.
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
क्या भगवान भी बीमार हो सकते हैं? यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह में ऐसा होता है। पुराना थाना क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर है, जो अगले 15 दिन के लिए बंद कर दिया गया है। कारण यह है कि भक्तों को बीमारियों से बचाने के लिए भगवान हर साल बीमार हो जाते हैं। इस दौरान वे आराम करेंगे ताकि भक्त सेहतमंद बने रहे।
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पुराना थाना जगदीश स्वामी मंदिर के महंत नर्मदा प्रसाद गर्ग ने बताया कि ओडिशा के जगन्नाथ स्वामी मंदिर के साथ ही देशभर के सभी जगन्नाथ स्वामी मंदिरों में ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा से आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तक भगवान बीमार रहते हैं। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया रथ दोज को भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर भ्रमण के लिए निकलेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे।
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काढ़े का लगेगा भोग
भगवान जगन्नाथ को साल में एक बार स्नान कराया जाता है, जिसे स्नान यात्रा कहते हैं। स्नान यात्रा के बाद हर साल 15 दिन के लिए भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ते हैं। प्रभु की रसोई भी बंद कर दी जाती है। उन्हें 56 भोग नहीं खिलाया जाता। उन्हें आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है। फलों का रस भी दिया जाता है। रोजाना शीतल लेप भी लगाया जाता है। रात में सोने से पहले मीठा दूध अर्पित होता है। दमोह में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर प्रभु जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाएगी। यह बताने के लिए कि भगवान जगन्नाथ स्वस्थ हो गए हैं। मान्यता के मुताबिक भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को बीमारी से बचाने हर साल खुद बीमार पड़ते हैं।
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यह है भगवान की बीमारी की कथा
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ के एक भक्त माधव दास रहते थे। एक बार वे बीमार हो गए। कमजोर और दुर्बल हो गए। इसके बाद भी वे मदद नहीं लेते थे। कहते थे कि मेरे तो बस जगन्नाथ हैं, वह ही मेरी रक्षा करेंगे। तब जगन्नाथ भगवान स्वयं सेवक बनकर उनके घर पहुंचे। जब माधव दास को होश आया तो उन्होंने प्रभु को पहचान लिया। माधव दास ने उनसे पूछा कि आप तो त्रिलोक के स्वामी हैं, आप चाहते तो चुटकी बजाते ही मेरा रोग दूर कर देते। तब भगवान ने कहा कि प्रारब्ध के भोग सबको भोगने होते हैं। जब भी भक्त दुखी होते हैं तो मुझे दुख होता है। मैं तुम्हारे 15 दिन का रोग स्वयं पर लेता हूं और तुम्हें ठीक कर देता हूं। तब से यह मान्यता है कि भक्तों के प्रारब्ध में से 15 दिन की बीमारी प्रभु खुद लेते हैं और आराम करते हैं।
