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नाबालिग रेप: फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की कमी के कारण आरोपियों को नहीं मिल पाती है सजा

Fri, 27 Jul 2018 10:25 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला
क्राइम डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 27 Jul 2018 10:25 AM IST
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Madhya Pradesh: lack of forensic infrastructur is responsible for lowest conviction rate

मध्यप्रदेश सरकार बेशक नाबालिग रेप से जुड़े कानूनों को सख्त बना रही है लेकिन फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में कमी के कारण केवल 28 फीसदी आरोपियों को ही सजा मिलती है। यानि हर चार आरोपियों में से एक को सजा मिलती है और बाकी के तीन बच निकलते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड व्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में पॉक्सो एक्ट के तहत कुल 36,022 मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन इनमें से केवल 10,114 मामले ही ऐसे थे जिनमें आरोपियों को सजा दी गई।

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ऐसे मामलों में आरोपियों के बच निकलने का एक कारण है फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की कमी। इसके अलावा नमूनों को इकट्ठा करने में विशेषज्ञता की कमी भी इस परेशानी का कारण बनती है। इस वजह से नमूनों के परीक्षण में भी काफी समय लग जाता है और रिपोर्ट आने में सालों साल लग जाते हैंं। जिसकी वजह से मामले की जांच और ट्रायल में देरी होती है।
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डीएनए परीक्षण की सुविधा केवल एक लैब में

मध्य प्रदेश में केवल चार फॉरेंसिक लैब्स हैं जो कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में हैं। इनमें से डीएनए परीक्षण की सुविधा केवल सागर में उपलब्ध है। राज्य में फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में 486 पदों में से लगभग आधे यानि 241 खाली हैं। वहीं फोटो सेक्शन में 67 कर्मियों की जरूरत होती है जिसकी जगह केवल 17 कर्मचारी हैं।
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निर्भया फंड

सरकार ने चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय प्रयोगशाला के आधुनिकीकरण के लिए निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके अलावा प्रयोगशाला के लिए आत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाने के लिए प्रस्ताव दिया गया है।

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