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ममलेश्वर मंदिर में VIP दर्शन पर सवाल: आम भक्त कतार में, गर्भगृह में प्रोटोकॉल वालों के विशेष दर्शन का आरोप

Sat, 05 Sep 2026 06:20 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 05 Sep 2026 06:20 PM IST
सार

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में वीआईपी प्रोटोकॉल दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई। आरोप है कि गर्भगृह में विशेष दर्शन के दौरान आम भक्तों को करीब आधे घंटे तक रोका गया। मंदिर समिति मामले की समीक्षा कर व्यवस्था सुधारने की तैयारी में है।

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Questions raised over VIP darshan at Mamleshwar Temple Allegations of special access for protocol-holders
भगवान के दरबार में कौन VIP-कौन आम? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान के दरबार में सभी भक्तों को समान मानने की भावना के बीच ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि वे आम श्रद्धालुओं की कतार में दर्शन के लिए खड़े रहे, जबकि प्रोटोकॉल के तहत आए कुछ लोगों को गर्भगृह में भगवान के सामने खड़े होकर दर्शन-पूजन कराया गया। श्रद्धालुओं का दावा है कि इस दौरान करीब आधे घंटे तक आम भक्तों के दर्शन प्रभावित रहे और कतार में भीड़ बढ़ती गई।

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आधे घंटे तक दर्शन रुकने का आरोप
राजस्थान के फुलेरा निवासी लाखन सिंह गुर्जर, महाराष्ट्र के परभणी निवासी संभाजी राव पाटील और अशोकनगर निवासी राम सिंह रघुवंशी ने दर्शन व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि वे आम श्रद्धालुओं की कतार में खड़े थे। इसी दौरान कुछ वीआईपी लोगों के गर्भगृह में दर्शन करने के कारण करीब आधे घंटे तक आम श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था प्रभावित रही। श्रद्धालुओं के अनुसार, इस दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में भक्त कतार में खड़े रहे। दर्शन रुकने से कतार लंबी होती गई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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श्रद्धालुओं ने उठाया समान दर्शन का सवाल
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे दूर-दराज से भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। कई लोग परिवार के साथ लंबी यात्रा करके मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में किसी विशेष व्यक्ति के दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं को लंबे समय तक रोकना उचित नहीं है। लाखन सिंह गुर्जर, संभाजी राव पाटील और राम सिंह रघुवंशी ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी श्रद्धालु समान होने चाहिए। यदि वीआईपी या प्रोटोकॉल के तहत आने वाले लोगों के लिए अलग व्यवस्था जरूरी है तो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे आम भक्तों के दर्शन बाधित न हों।
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प्रोटोकॉल के लिए अलग व्यवस्था की मांग
श्रद्धालुओं का कहना है कि सुरक्षा कारणों से किसी वीआईपी को विशेष व्यवस्था देनी हो तो मंदिर प्रशासन और प्रोटोकॉल अधिकारी इसके लिए अलग व्यवस्था कर सकते हैं। उनका कहना है कि प्रोटोकॉल के तहत आने वाले लोगों को भगवान के समीप से दर्शन करवाए जाएं, लेकिन इसके लिए आम श्रद्धालुओं की कतार को लंबे समय तक रोकना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, सैकड़ों-हजारों भक्तों को बाहर इंतजार करवाकर किसी विशेष व्यक्ति को लंबे समय तक गर्भगृह में दर्शन करवाने से श्रद्धालुओं में नाराजगी पैदा होती है।

मंदिर समिति को मिली मामले की जानकारी
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के व्यवस्थापक एवं मंदिर समिति के सदस्य दूल्हे सिंह ने बताया कि उन्हें गर्भगृह में प्रोटोकॉल के दौरान शस्त्र और चमड़े का बेल्ट ले जाने तथा भगवान के सामने खड़े होकर पूजन करवाए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर वे बाहर थे, इसलिए पूरे घटनाक्रम की प्रत्यक्ष जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले को खंडवा कलेक्टर के संज्ञान में लाया जाएगा। दूल्हे सिंह के अनुसार, प्रोटोकॉल दर्शन की व्यवस्था को लेकर जल्द ही मंदिर समिति के सदस्यों की बैठक होगी। इसमें सभी सदस्यों से चर्चा कर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी।


स्थानीय लोगों ने भी उठाया समान दर्शन का मुद्दा
मंदिर से जुड़े पंडितों और स्थानीय नागरिकों ने भी दर्शन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आम श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को यदि गर्भगृह से दूर रखकर दर्शन करवाए जाते हैं, जबकि प्रोटोकॉल के तहत आने वाले लोगों को भगवान के सामने खड़े होकर दर्शन की सुविधा मिलती है, तो इससे असमानता की भावना पैदा होती है।

प्रशासन के सामने व्यवस्था सुधारने की चुनौती
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन के सामने चुनौती प्रोटोकॉल, सुरक्षा और आम श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच संतुलन बनाने की है। वीआईपी की सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन आम श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा का ध्यान रखना भी जरूरी है। श्रद्धालुओं की मांग है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें प्रोटोकॉल के तहत आने वाले लोगों को सुरक्षित दर्शन मिल सकें और आम भक्तों की कतार तथा दर्शन व्यवस्था भी बाधित न हो। उनका कहना है कि भगवान के दरबार में हर व्यक्ति पहले भक्त है, कोई वीआईपी नहीं।

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