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Chhatarpur News: तेरहवीं पर मृत्यु भोज की जगह अनाथ बेटी के हाथ पीले किए, परिवार ने पेश की अनूठी मिसाल
Sat, 21 Feb 2026 04:19 PM IST
छतरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: छतरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 04:19 PM IST
सार
छतरपुर के नौगांव में एक परिवार ने तेरहवीं भोज की परंपरा छोड़कर मानवता की मिसाल पेश की है। दिवंगत परिजन की स्मृति में खर्च होने वाली राशि से अनाथ बेटी के विवाह की जिम्मेदारी उठाकर उन्होंने समाज को नई सोच का संदेश दिया है।
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तेरहवीं पर मृत्यु भोज के बजाय गरीब बेटी के हाथ पीले किए
- फोटो : credit
विस्तार
जिले के नौगांव से एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी है। नगर के प्रतिष्ठित सर्राफा व्यवसायी स्वर्गीय गोपाल कठेल के निधन के बाद उनके परिवार ने परंपरागत मृत्यु भोज न करने का निर्णय लिया। परिवार ने तय किया कि दिखावे पर खर्च होने वाली राशि से किसी जरूरतमंद की मदद की जाएगी।
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करीब 13 दिन पहले झांसी में हृदय गति रुकने से गोपाल कठेल का निधन हो गया था। घर में शोक का माहौल था। उनकी तीन बेटियां और 6 वर्षीय पुत्र कान्हा हैं। तेरहवीं के अवसर पर जहां सामान्यतः भोज का आयोजन होता है, वहीं कठेल परिवार ने एक अनोखी पहल करते हुए अनाथ बेटी के विवाह के लिए संपूर्ण सामग्री भेंट की।
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जानकारी के अनुसार परिवार ने 21 वर्षीय अनाथ लक्ष्मी अनुरागी का विवाह अपने खर्च पर कराने का संकल्प लिया। 22 फरवरी को होने वाले विवाह से पहले तेरहवीं के दिन विवाह सामग्री भेंट की गई। इस दौरान मासूम कान्हा ने भाई बनकर कन्यादान की रस्म निभाई। मृतक की बहन और समाज सेविका तृप्ति कठेल ने बेटी को लगभग 40 प्रकार की गृहस्थी सामग्री भेंट की और 20 हजार रुपये की एफडी भी कराई।
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विवाह मंडप में एक ओर दिवंगत गोपाल कठेल की तस्वीर सजाई गई थी तो दूसरी ओर विवाह सामग्री रखी थी। यह भावुक दृश्य देख उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। दुल्हन की मौसी सोमवती अनुरागी ने बताया कि 22 फरवरी को विवाह संपन्न होगा। तृप्ति कठेल ने तेरहवीं भोज के बजाय बेटी के हाथ पीले कर मानवता की मिसाल पेश की है।
तृप्ति कठेल ने समाज से अपील की कि मृत्युभोज जैसी कुप्रथाओं पर खर्च करने के बजाय जरूरतमंदों की मदद की जाए। उनका कहना है कि इससे दिवंगत आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि मिलती है और समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। कठेल परिवार की इस पहल की पूरे जिले में चर्चा हो रही है और इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक प्रेरक कदम माना जा रहा है।
