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Chhatarpur: 10 साल पहले जिस मगरमच्छ के बच्चे को पाला अब उसी से जान को खतरा, दहशत में जी रहे ग्रामीण
Tue, 26 Jul 2022 10:02 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Tue, 26 Jul 2022 10:02 AM IST
सार
छतरपुर के लवकुशनगर के सरवई इलाके के महयाबा गांव में ग्रामीण इन दिनों मगरमच्छ की दहशत में जीने को मजबूर हैं। मगरमच्छ ने जब से बकरे का शिकार किया है ग्रामीण तालाब के पास जाने से डर रहे हैं।
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तालाब में मगरमच्छ, दहशत में लोग।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छतरपुर जिले में ग्रामीण इन दिनों तालाब में मगरमच्छ की दहशत से चिंता में हैं। दरअसल जिले के लवकुशनगर के सरवई इलाके के महयाबा गांव में हाईस्कूल के पास बने दलेर तालाब में बीते 10 वर्षों साल से एक मगरमच्छ रह रहा है। बीते दिनों मगरमच्छ ने महयाबा निवासी लख्खू यादव के बकरे का पानी पीते समय शिकार कर लिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीण नारायण सिंह परमार, देवेंद्र सिंह परमार ने बताया की महयाबा- अजीतपुर मार्ग में जहां तालाब है, उसी के पास हाईस्कूल माध्यमिक व प्राथमिक शाला है। स्कूल के बच्चे तालाब के इर्द-गिर्द जाते रहते हैं। इसलिए बच्चों के साथ अनहोनी न हो जाए ग्रामीण इसी बात को लेकर चिंतित है और तालाब से मगरमच्छ को पकड़कर ले जाने की मांग कर रहे हैं।
10 साल पहले तालाब में पाला था मगरमच्छ
ग्राम सरपंच बिन्दा आरख देव सिंह यादव, राजेन्द्र सिंह गहलोत और राजू पचौरी ने बताया की खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बरियापुर व कूटने डैम से आने वाले पानी के सहारे मगरमच्छ करीब 10 साल पहले बह कर आया था। उस समय मगरमच्छ बहुत छोटा था लिहाजा ग्रामीणों ने उसे तालाब में डाल दिया था और उसका ध्यान रखते थे, लेकिन समय बीतने के साथ ही मगरमच्छ अब 10 साल का हो गया है वहीं, उसकी लंबाई बढ़कर 5 फीट का हो गई है। ग्रामीण अब मगरमच्छ के पास जाने से डर रहे हैं। वहीं, स्कूल प्रबंधन भी बच्चों को तालाब के पास न जाने की हिदायत दे रहा है।
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मगरमच्छ जब छोटा था, तब रोजाना ग्रामीण तालाब पहुंचकर मछली डालकर उसके पेट भरने का इंतजाम करते थे और दुलार भी करते थे, लेकिन अब मगरमच्छ बड़ा हो गया और शिकार करने लगा है, इससे ग्रामीण भयभीत हैं और वन विभाग से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान में भेजने की गुहार लगा रहे हैं।
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ग्रामीण नारायण सिंह परमार, देवेंद्र सिंह परमार ने बताया की महयाबा- अजीतपुर मार्ग में जहां तालाब है, उसी के पास हाईस्कूल माध्यमिक व प्राथमिक शाला है। स्कूल के बच्चे तालाब के इर्द-गिर्द जाते रहते हैं। इसलिए बच्चों के साथ अनहोनी न हो जाए ग्रामीण इसी बात को लेकर चिंतित है और तालाब से मगरमच्छ को पकड़कर ले जाने की मांग कर रहे हैं।
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10 साल पहले तालाब में पाला था मगरमच्छ
ग्राम सरपंच बिन्दा आरख देव सिंह यादव, राजेन्द्र सिंह गहलोत और राजू पचौरी ने बताया की खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बरियापुर व कूटने डैम से आने वाले पानी के सहारे मगरमच्छ करीब 10 साल पहले बह कर आया था। उस समय मगरमच्छ बहुत छोटा था लिहाजा ग्रामीणों ने उसे तालाब में डाल दिया था और उसका ध्यान रखते थे, लेकिन समय बीतने के साथ ही मगरमच्छ अब 10 साल का हो गया है वहीं, उसकी लंबाई बढ़कर 5 फीट का हो गई है। ग्रामीण अब मगरमच्छ के पास जाने से डर रहे हैं। वहीं, स्कूल प्रबंधन भी बच्चों को तालाब के पास न जाने की हिदायत दे रहा है।
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मगरमच्छ जब छोटा था, तब रोजाना ग्रामीण तालाब पहुंचकर मछली डालकर उसके पेट भरने का इंतजाम करते थे और दुलार भी करते थे, लेकिन अब मगरमच्छ बड़ा हो गया और शिकार करने लगा है, इससे ग्रामीण भयभीत हैं और वन विभाग से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान में भेजने की गुहार लगा रहे हैं।
