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Bageshwar Dham: जहां की पढ़ाई, वहीं धीरेंद्र शास्त्री ने फहराया तिरंगा; जानें किससे कहा कि देश छोड़कर चले जाओ

Thu, 15 Aug 2024 06:14 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 15 Aug 2024 06:14 PM IST
सार

पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंज में कक्षा 9 से 12 तक अध्यनरत रहे हैं। जहां उन्होंने आज स्कूल पहुंचकर ध्वजारोहण किया एवं जिस कक्ष में उन्होंने पढ़ाई की, उस कक्ष में पहुंच कर विद्यालय के छात्र-छात्राओं से मिले।

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Chhatarpur: Pandit Dhirendra Krishna Shastri of Bageshwardham reached his childhood school
छतरपुर के गंज में बागेश्वरधाम सरकार ने ध्वजारोहण किया। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने 78वें स्वतंत्रता दिवस पर गंज के हायर सेकेण्डरी स्कूल में ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होंने उन लोगों को भी देश छोड़कर जाने की सलाह दे डाली, जिन्हें व्ंदे मारतम बोलने में भी दिक्कत है। 
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बता दें पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंज में कक्षा 9 से 12 तक अध्यनरत रहे हैं। जहां उन्होंने आज स्कूल पहुंचकर ध्वजारोहण किया एवं जिस कक्ष में उन्होंने पढ़ाई की, उस कक्ष में पहुंच कर विद्यालय के छात्र-छात्राओं से मिले। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जो देश के लिए नहीं जी सकता, वो किसी के लिए नहीं जी सकता। राष्ट्र के लिए जीना बहुत जरूरी है। राष्ट्र के लिए प्यार होना बहुत अच्छा है। कई लोगों को तो वंदे मातरम बोलने से भी दिक्कत है. उन लोगों को कहेंगे कि देश छोड़कर चले जाना चाहिए। 
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बागेश्वरधाम सरकार जैसे ही आज स्कूल पहुंचे उनका स्कूल के छात्र छात्राओं और शिक्षकों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान ध्वजारोहण के बाद बागेश्वर सरकार ने कहा कि आपके जीवन में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप कितने बड़े स्कूल में पढ़ते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप कितनी बड़ी सोच रखते हैं। हमारे घर में लाइट नहीं होती थी फिर भी हम पढ़ाई करते थे। कौन कहता है कि लाइट नहीं होती है तो पढ़ाई नहीं होती है। अगर आप में जुनून की लाइट हो तो अंधेरे में भी पढ़ाई की जाती है और होती है। 

उन्होंने कहा कि यह बात उन दिनों की है जब वे पैदल चलकर अपने गढ़ा गांव से गंज तक इसी स्कूल में पढ़ने आया करते थे। तब हम भी आप लोगों जैसे ही थे और ऐसे ही पढ़ाई किया करते थे।
 
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