Chhatarpur: महाकुंभ में खुशबू बिखेर रहा बुंदेलखंड का फूल, बागेश्वर धाम में भी चढ़ाया जाता यहां का गेंदा-गुलाब
Chhatarpur: मौजूदा दौर में बुंदेलखंड के फूलों की डिमांड लगातार बढ़ रही है। एक तो शादियों का सीजन चल रहा तो वहीं जिले से लगे यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ का मेला चल रहा। जिस कारण फूलों की मांग ज्यादा बढ़ गई है। आइये खबर में जानते हैं बुंदेलखंड के फूलों की अहमियत...
विस्तार
बुंदेलखंड के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती में भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पानी की समस्या और पारंपरिक खेती की कठिनाइयों से जूझने के बाद किसानों ने कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर रुख किया है, जिससे वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। जिले में अब फूलों की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है, जिससे किसानों के चेहरे भी फूलों की तरह खिल उठे हैं।
फूलों की खेती से हो रही बंपर पैदावार
बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर जिले में करीब 65 हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती की जाती है। इस वर्ष विशेष रूप से गेंदा और गुलाब की खेती महाकुंभ के आयोजन को ध्यान में रखते हुए की गई थी, ताकि बढ़ी हुई मांग के अनुरूप आपूर्ति की जा सके और किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सके। किसानों का झुकाव अब पारंपरिक अनाज और दलहन की फसलों के बजाय फूलों की खेती की ओर बढ़ रहा है, जिससे वे प्रति एकड़ 60,000 से 70,000 रुपये तक का लाभ कमा रहे हैं।
महाकुंभ के कारण फूलों की बिक्री में वृद्धि
बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लंबे समय बाद महाकुंभ का आयोजन हुआ, जिसके चलते फूलों की मांग और बिक्री में कई गुना वृद्धि हुई है। माना जाता है कि गंगा स्नान के दौरान भगवान भोलेनाथ को जल और फूल अर्पण करना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में श्रद्धालु छतरपुर बाजार से फूल खरीदकर कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे हैं। सामान्य दिनों में छतरपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 10 क्विंटल फूलों की बिक्री होती है, लेकिन कुंभ के कारण यह बिक्री दोगुनी हो गई है।
बागेश्वर धाम में फूलों की बढ़ती मांग
बागेश्वर धाम, जो अब एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बन चुका है, वहां श्रद्धालुओं के बढ़ने के साथ-साथ गुलाब की मांग भी लगातार बढ़ रही है। छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित इस धार्मिक स्थल पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और बालाजी सरकार, भगवान भोलेनाथ तथा सन्यासी बाबा को गुलाब के फूल चढ़ाते हैं। किसानों ने इस बढ़ती मांग को देखते हुए फूलों की खेती को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।
जिले में फूलों की मांग और उत्पादन
छतरपुर जिले में गेंदा और गुलाब की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में यहां प्रति सप्ताह करीब 3 टन गेंदा और गुलाब की मांग है। पहले इस मांग को पूरा करने के लिए फूल अन्य राज्यों से मंगवाए जाते थे, लेकिन अब जिले के किसान ही इस आपूर्ति को पूरा कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इसके अलावा, जिला उद्यान विभाग भी किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
किसानों की बढ़ती संख्या
फूलों की खेती में मुनाफे को देखते हुए अब जिले में 30 से अधिक किसान इससे जुड़े हैं। चंद्रपुरा निवासी एक किसान ने बताया कि फूलों की खेती में लागत की तुलना में तीन गुना अधिक मुनाफा होता है। पहले खजुराहो क्षेत्र के किसानों ने गेंदे की खेती शुरू की थी, लेकिन अब जिले के अन्य गांवों के किसान भी इसे बड़े पैमाने पर अपनाने लगे हैं।
फूलों की खेती पर कीटों का प्रभाव कम
फूलों की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय बन रही है, क्योंकि इस पर कीटों का प्रभाव बहुत कम होता है। कृषि विशेषज्ञ हरिओम पटेल बताते हैं कि गेंदे के फूलों पर सब्जियों की तुलना में कीटों का असर कम होता है। हालांकि, इल्ली और मकड़ी से बचाव आवश्यक होता है, लेकिन यह अपेक्षाकृत आसान है। किसान यह सुनिश्चित करते हैं कि फूल खिलते ही उनकी तुड़ाई कर दी जाए ताकि नए फूल जल्दी आ सकें।
त्योहारों और सीजन में अधिक मुनाफा
त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान फूलों की मांग तेजी से बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उन्हें अधिक लाभ होता है। फूलों की खेती में किसी प्रकार का बड़ा जोखिम भी नहीं होता, जिससे किसान इसे एक स्थायी आय के रूप में अपना रहे हैं।
किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी
छतरपुर के आटारन गांव के किसान रामरतन पटेल ने बताया कि वे फूलों की खेती से प्रतिदिन 1,000 से 1,500 रुपये तक कमा लेते हैं। फूलों की फसल को तैयार होने में लगभग ढाई महीने लगते हैं और पूरे वर्ष अलग-अलग मौसम के अनुसार विभिन्न फूलों की खेती की जा सकती है।
फूलों का व्यापार और ऑनलाइन बिक्री
फूलों के व्यापार से जुड़े बाला प्रसाद चौरसिया का कहना है कि छतरपुर जिले के फूल बागेश्वर धाम और महाकुंभ में भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा, फूलों की ऑनलाइन बिक्री भी की जा रही है, जिससे प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी फूलों की आपूर्ति हो रही है। मांग इतनी अधिक है कि कई बार आपूर्ति पूरी करना मुश्किल हो जाता है।
सरकारी सहायता और सब्सिडी
फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। जिला उद्यानिकी अधिकारी जगदीश सिंह मुजाल्दा ने बताया कि छतरपुर जिले में 65 हेक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है और इसकी आपूर्ति महाकुंभ, बागेश्वर धाम, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में की जा रही है। सरकार सामान्य वर्ग के किसानों को 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के किसानों को 12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।
