{"_id":"5d8a2fd78ebc3e93c8165cbd","slug":"change-in-sit-formed-in-honeytrap-case-indore-sanjeev-shami-appointed-sit-chief","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंदौरः हनीट्रैप मामले में गठित एसआईटी में बदलाव, संजीव शमी बनाए गए एसआईटी प्रमुख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंदौरः हनीट्रैप मामले में गठित एसआईटी में बदलाव, संजीव शमी बनाए गए एसआईटी प्रमुख
Tue, 24 Sep 2019 09:04 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 24 Sep 2019 09:04 PM IST
विज्ञापन
हनी ट्रैप (सांकेतिक तस्वीर)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्यप्रदेश में नेताओं-अफसरों के आपत्तिजनक वीडियो बनाने वाली ब्लैकमेलर गैंग की करतूतों की जांच के लिए गठित एसआईटी में बदलाव किया गया है। संजीव शमी को एसआईटी की कमान सौंपी गई है। इससे पहले श्रीनिवास वर्मा को सोमवार को गठित की गई एसआईटी का प्रमुख बनाया गया था।
पुलिस के मुताबिक अब इस टीम में आठ अधिकारी शामिल हैं। नई टीम के सदस्य है :
इंदौर के चर्चित हनीट्रैप मामले में सोमवार को डीजीपी विजय कुमार सिंह ने 12 सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। इसके लिए 1997 बैच के आईपीएस डी. श्रीनिवास वर्मा को प्रमुख बनाया गया था। वर्मा इन दिनों आईजी सीआईडी हैं।
उधर, इंदौर नगर निगम के प्रभारी आयुक्त कृष्ण चैतन्य ने अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को निलंबित कर दिया है।
अपने आदेश में उन्होंने कहा कि हरभजन का कृत्य पहली दृष्टि में ही अशोभनीय होकर नैतिक पतन का परिचायक है। इस स्थिति को देखते हुए हरभजन को मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के तहत तत्काल प्रभाव से से निलंबित किया जाता है।
विज्ञापन
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक पलासिया थाने में 17 सितंबर 2019 को इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग मामला दर्ज किया गया था। भोपाल के सागर लैंडमार्क निवासी आरती दयाल पर आरोप था कि उसने हरभजन का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया है।
इंदौर पुलिस ने आरती दयाल के साथ मोनिका यादव, श्र्वेता विजय जैन, श्र्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी और आरती के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने कई मंत्रियों, नेताओं और अफसरों को उनके वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमिल किया था। उन्होंने लोगों से मोटी रकम भी वसूली थी।
इस मामले में इंदौर एसएसपी रूचि वर्धन मिश्र ने पलासिया थाना प्रभारी अजीत सिंह बैस को लाइन अटैच कर जांच का जिम्मा शशिकांत चौरसिया को दिया है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह द्वारा सोमवार को एसआईटी गठित की गई है।
डीजीपी सिंह ने एसआईटी को इस घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिए हैं। मामले में डीजीपी का कहना है कि जांच एक जिले तक सीमित नहीं है। बहुत सी जानकारियां सामने आ रही हैं, इसको देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है।
विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक अब इस टीम में आठ अधिकारी शामिल हैं। नई टीम के सदस्य है :
- संजीव शमी (एडीजी)
- श्रीमती रुचि वर्धन मिश्रा (एसएसपी, इंदौर)
- विकाश शहवाल (एसपी)
- जितेंद्र सिंह (एसपी)
- अमरेंद्र सिंह (अतिरिक्त एसपी)
- नीता चौबे (सीएसपी)
- मनोज शर्मा (सीएसपी)
- शशिकांत चौरसिया (एसएचओ, पलासिया थाना, इंदौर)
इंदौर के चर्चित हनीट्रैप मामले में सोमवार को डीजीपी विजय कुमार सिंह ने 12 सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। इसके लिए 1997 बैच के आईपीएस डी. श्रीनिवास वर्मा को प्रमुख बनाया गया था। वर्मा इन दिनों आईजी सीआईडी हैं।
विज्ञापन
उधर, इंदौर नगर निगम के प्रभारी आयुक्त कृष्ण चैतन्य ने अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को निलंबित कर दिया है।
अपने आदेश में उन्होंने कहा कि हरभजन का कृत्य पहली दृष्टि में ही अशोभनीय होकर नैतिक पतन का परिचायक है। इस स्थिति को देखते हुए हरभजन को मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के तहत तत्काल प्रभाव से से निलंबित किया जाता है।
विज्ञापन
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक पलासिया थाने में 17 सितंबर 2019 को इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग मामला दर्ज किया गया था। भोपाल के सागर लैंडमार्क निवासी आरती दयाल पर आरोप था कि उसने हरभजन का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया है।
इंदौर पुलिस ने आरती दयाल के साथ मोनिका यादव, श्र्वेता विजय जैन, श्र्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी और आरती के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने कई मंत्रियों, नेताओं और अफसरों को उनके वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमिल किया था। उन्होंने लोगों से मोटी रकम भी वसूली थी।
इस मामले में इंदौर एसएसपी रूचि वर्धन मिश्र ने पलासिया थाना प्रभारी अजीत सिंह बैस को लाइन अटैच कर जांच का जिम्मा शशिकांत चौरसिया को दिया है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह द्वारा सोमवार को एसआईटी गठित की गई है।
डीजीपी सिंह ने एसआईटी को इस घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिए हैं। मामले में डीजीपी का कहना है कि जांच एक जिले तक सीमित नहीं है। बहुत सी जानकारियां सामने आ रही हैं, इसको देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है।
