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कालेधन को लेकर मंत्रियों के नाम आने से मुश्किल में शिवराज सरकार, सिंधिया फौज भी बैकफुट पर

Tue, 22 Dec 2020 02:41 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: देव कश्यप Updated Tue, 22 Dec 2020 02:41 AM IST
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CBDT report lands Congress and BJP in a spot
Shivraj singh chauhan, Digvijay Singh and Kamal Nath - फोटो : Social Media

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान हुए आयकर छापों के खुलासे के बाद, भाजपा और कांग्रेस दोनों के सुर एक हो गए हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2019 में कालेधन के लेनदेन को लेकर सियासत गरमा गई है। जिन विधायकों के नाम केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट में आए हैं, वे कांग्रेस के हों या भाजपा के सभी के स्वर एक समान ही हैं।

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उनका कहना है कि हमें बदनाम करने की साजिश हुई है। सत्ता दल और विपक्ष दोनों के नेताओं का नाम होने से सरकार कार्रवाई पर फैसला नहीं ले पा रही है। पहले कार्रवाई को भाजपा नगरीय निकाय चुनाव में मुद्दा बनाने जा रही थी, उससे पहले ही कांग्रेस ने पुरानी रिपोर्ट उछालकर मामला बराबरी पर लाने की कोशिश तेज कर दी है।
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भाजपा-कांग्रेस के संदेही नेताओं ने आरोप से बचने के लिए सुर में सुर मिलाते हुए पूछा कि यदि हमने चुनाव में पैसा लिया है तो जांच एजेंसियों ने अब तक नोटिस क्यों नही दिया? पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बयान भी कुछ इसी तरह आया है। इसको लेकर सरकार भी मुश्किल में पड़ गई है। दरअसल, इस मामले में शिवराज सरकार के दो मंत्री और 11 विधायक भी फंस रहे हैं, जो कांग्रेस से भाजपा में आए हैं।
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सीबीडीटी की रिपोर्ट में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के मंत्री सहित 64 विधायकों के नाम हैं। इनमें से 13 विधायक रिपोर्ट आने से पहले भाजपा का दामन थाम चुके हैं। पार्टी बदलने के बाद भी उनके सुर भी रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस जैसे ही हैं।

 

इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम नहीं है, लेकिन दिग्विजय सिंह पर लोकसभा चुनाव में 90 लाख रुपए मिलने के आरोप हैं। इस पर सफाई देने के लिए दिग्विजय सिंह ने शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई थी। उन्होंने कहा कि हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। साथ ही, सवाल खड़ा किया कि 'यह कैसी जांच है, अभी तक मुझे एक भी नोटिस देकर बयान नहीं लिए गए।'

दिग्विजय जैसा ही बयान सिंधिया के कट्टर समर्थक और शिवराज सरकार के मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने दिया। तोमर ने कहा कि 'यदि लेन-देन में हम शामिल हैं तो अब तक नोटिस क्यों नहीं दिया गया?' शिवराज सरकार में उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव ने भी कहा कि आरोप झूठे हैं। हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं।
 

वहीं कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे लेकर आगे की जांच की निष्पक्षता को लेकर भाजपा से सवाल किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'कमलनाथ को बदनाम करने की साजिश लोकसभा चुनाव के पहले रची गई थी। सीबीडीटी की कपोल-कल्पित रिपोर्ट में शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों और कई विधायकों के भी नाम आए हैं। क्या उन पर भी एफआईआर होगी? या वे भाजपा में आने के बाद पवित्र हो गए हैं?


 

दोषी कोई भी हो, कार्रवाई होगी- शिवराज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में कहा है कि 'रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर दोषी कोई भी हो, वैधानिकता के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।' भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि 'कमलनाथ के गोरखधंधों की वजह से ही इन नेताओं ने कांग्रेस छोड़ी है। इस मामले में कोई भी लिप्त क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा।'

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