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इंदौर में मोतियाबिंद ऑपरेशन बिगड़ने से 10 मरीजों की आंखों की रोशनी बाधित

Sat, 17 Aug 2019 07:16 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 17 Aug 2019 07:16 PM IST
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Cataract operation in Indore disrupts eyesight of 10 patients
इंदौर आई हॅास्पिटल - फोटो : ANI

इंदौर में धार रोड स्थित इंदौर आई हॉस्पिटल में 11 मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 9 साल पहले जिस अस्पताल में 18 लोगों की रोशनी इसी कारण गई थी, उसी अस्पताल प्रबंधन ने 8 अगस्त की घटना को भी 8 दिन तक छिपाए रखा।

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खुलासे के बाद अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है वहीं पूरे मामले को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने भी गंभीरता से लिया है। सीएम ने सुबह ही दो ट्वीट कर पूरे मामले की जांच के आदेश दिए, वहीं शाम तक कमेटी का गठन भी हो गया।
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पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के आदेश भी हुए हैं। साथ ही सरकार इनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। इसके लिए चेन्नई से एक्सपर्ट डॉक्टर को भी बुलाया है, जो रविवार को इन मरीजों का चैकअप करेंगे।
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इधर मरीजों का अब भी कहना है कि उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। धार रोड स्थित इंदौर नेत्र चिकित्सालय में 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 13 मरीजों के ऑपरेशन किये गये थे। इनमें से तीन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन शेष 11 मरीजों ने दिखाई नहीं देने की शिकायत की थी। वे संक्रमण का शिकार हो गए और उनकी आंखों की रोशनी चली गई। तब से लेकर अब तक सारे मरीज अपनी रोशनी वापस लौटने का इंतजार कर रहे हैं। शनिवार को मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा।

हमारी लापरवाही होती तो सभी 14 मरीजों को संक्रमण होता

उस दिन 14 ऑपरेशन हुए थे, तीन मरीज पूरी तरह ठीक हैं। हमारी लापरवाही होती तो सभी मरीजों को संक्रमण हो जाता। हमें भी समझ नहीं आ रहा है कि आखिर संक्रमण किस कारण से हुआ। ओटी हमने 9 अगस्त को ही बंद करवा दिया था। इस तरह की कोई बड़ी जटिलता सामने आती है तो अन्य बाहरी विशेषज्ञों से भी सलाह ली जाती है। - डॉ. सुधीर महाशब्दे, नेत्र रोग विशेषज्ञ और जिन्होंने टीम के साथ ऑपरेशन किया

इंदौर कलेक्टर करेंगे जांच, सीएम बोले- बख्शेंगे नहीं

मुख्यमंत्री ने घटना की जांच इंदौर कलेक्टर को सौंपी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि 9 वर्ष पूर्व इसी हॉस्पिटल में हुई घटना के बाद भी कैसे हॉस्पिटल को वापस अनुमति प्रदान कर दी गई, जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। इधर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने प्रभावित मरीजों को 25-25 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।

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