इंदौर में मोतियाबिंद ऑपरेशन बिगड़ने से 10 मरीजों की आंखों की रोशनी बाधित
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इंदौर में धार रोड स्थित इंदौर आई हॉस्पिटल में 11 मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 9 साल पहले जिस अस्पताल में 18 लोगों की रोशनी इसी कारण गई थी, उसी अस्पताल प्रबंधन ने 8 अगस्त की घटना को भी 8 दिन तक छिपाए रखा।
खुलासे के बाद अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है वहीं पूरे मामले को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने भी गंभीरता से लिया है। सीएम ने सुबह ही दो ट्वीट कर पूरे मामले की जांच के आदेश दिए, वहीं शाम तक कमेटी का गठन भी हो गया।
पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के आदेश भी हुए हैं। साथ ही सरकार इनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। इसके लिए चेन्नई से एक्सपर्ट डॉक्टर को भी बुलाया है, जो रविवार को इन मरीजों का चैकअप करेंगे।
Indore: 11 patients lose their eye sight after undergoing operation for cataract at Indore Eye Hospital. CMHO Dr Pravin Jadia says, "treatment of 11 patients has begun. We'll investigate the cause. Administration has ordered to submit a report in 72 hours." #MadhyaPradesh pic.twitter.com/6UqS8ZR832
— ANI (@ANI) August 17, 2019
इधर मरीजों का अब भी कहना है कि उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। धार रोड स्थित इंदौर नेत्र चिकित्सालय में 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 13 मरीजों के ऑपरेशन किये गये थे। इनमें से तीन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन शेष 11 मरीजों ने दिखाई नहीं देने की शिकायत की थी। वे संक्रमण का शिकार हो गए और उनकी आंखों की रोशनी चली गई। तब से लेकर अब तक सारे मरीज अपनी रोशनी वापस लौटने का इंतजार कर रहे हैं। शनिवार को मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा।
