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वुमेन्स डे: आर्ट ऑफ बर्थिंग से बदला लेबर रूम का माहौल,अल्टरनेटिव पोजीशन से प्रसव,महिला डीन-HOD की टीम की पहल
Sun, 08 Mar 2026 07:39 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 08 Mar 2026 07:39 AM IST
सार
गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के प्रसूति विभाग में ‘आर्ट ऑफ बर्थिंग’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत लेबर रूम में अरोमा और म्यूजिक थेरेपी, साथ ही अलग-अलग मुद्राओं में प्रसव की सुविधा दी जा रही है, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और सकारात्मक मातृत्व अनुभव मिल सके।
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डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज डॉ. कविता सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महिला दिवस के मौके पर राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के हमीदिया अस्पताल से का प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में एक नई पहल शुरू की गई है। यहां महिला डॉक्टरों की टीम प्रसव प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, आसान और सकारात्मक बनाने के लिए लेबर रूम में बदलाव कर रही है। विभागाध्यक्ष डॉ शबाना सुल्तान के नेतृत्व में आर्ट ऑफ बर्थिंग की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि हर मां के लिए प्रसव के अनुभव को बेहतर और तनावमुक्त बनाना है। डॉ. शबाना सुल्तान ने बताया कि विभाग पिछले कई समय से इस पहल पर काम कर रहा था। अब लेबर रूम में ऐसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान अधिक सुविधा मिल सके और उनका अनुभव सकारात्मक रहे।
विभागाध्यक्ष डॉ शबाना सुल्तान
अलग-अलग मुद्राओं में प्रसव की सुविधा
अक्सर यह माना जाता है कि प्रसव केवल पीठ के बल लेटकर ही होता है, लेकिन अब यहां अल्टरनेटिव पोजीशन का विकल्प दिया जा रहा है। इसमें महिला अपनी सुविधा के अनुसार बैठकर, घुटनों के बल या सहारा लेकर खड़े होकर भी प्रसव कर सकती है। इससे प्रसव की प्रक्रिया कुछ मामलों में आसान और कम दर्दनाक हो सकती है।
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अरोमा और म्यूजिक थेरेपी का इस्तेमाल
प्रसव के दौरान महिलाओं का तनाव कम करने के लिए लेबर रूम में अरोमा थेरेपी और म्यूजिक थेरेपी की व्यवस्था भी की गई है। शांत वातावरण और हल्का संगीत महिलाओं को मानसिक रूप से सहज महसूस कराने में मदद करेगा।
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मां और बच्चे के लिए बेहतर माहौल
इस पहल के तहत मां और नवजात शिशु की सुरक्षा के साथ-साथ एक मदर-फ्रेंडली माहौल तैयार किया जा रहा है, जहां मरीजों के साथ सम्मान और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए।
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महिलाओं को सुरक्षित और तनाव मुक्त माहौल देने की पहल
डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज डॉ कविता सिंह ने कहा कि यह पहल केवल लेबर रूम के ढांचे को सुधारने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान महिलाओं को सुरक्षित, गरिमापूर्ण और तनावमुक्त माहौल देना है, ताकि हर मां यहां से अच्छा अनुभव लेकर जाए।
वहीं विभागाध्यक्ष डॉ शबाना सुल्तान ने कहा कि विभाग अब इलाज के साथ-साथ समग्र देखभाल पर भी ध्यान दे रहा है। अरोमा और म्यूजिक थेरेपी जैसी सुविधाएं प्रसव के दौरान महिलाओं का तनाव कम करने में मदद करेंगी। साथ ही उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार प्रसव की मुद्रा चुनने का विकल्प भी दिया जा रहा है।
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विभागाध्यक्ष डॉ शबाना सुल्तान
अलग-अलग मुद्राओं में प्रसव की सुविधा
अक्सर यह माना जाता है कि प्रसव केवल पीठ के बल लेटकर ही होता है, लेकिन अब यहां अल्टरनेटिव पोजीशन का विकल्प दिया जा रहा है। इसमें महिला अपनी सुविधा के अनुसार बैठकर, घुटनों के बल या सहारा लेकर खड़े होकर भी प्रसव कर सकती है। इससे प्रसव की प्रक्रिया कुछ मामलों में आसान और कम दर्दनाक हो सकती है।
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अरोमा और म्यूजिक थेरेपी का इस्तेमाल
प्रसव के दौरान महिलाओं का तनाव कम करने के लिए लेबर रूम में अरोमा थेरेपी और म्यूजिक थेरेपी की व्यवस्था भी की गई है। शांत वातावरण और हल्का संगीत महिलाओं को मानसिक रूप से सहज महसूस कराने में मदद करेगा।
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मां और बच्चे के लिए बेहतर माहौल
इस पहल के तहत मां और नवजात शिशु की सुरक्षा के साथ-साथ एक मदर-फ्रेंडली माहौल तैयार किया जा रहा है, जहां मरीजों के साथ सम्मान और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए।
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महिलाओं को सुरक्षित और तनाव मुक्त माहौल देने की पहल
डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज डॉ कविता सिंह ने कहा कि यह पहल केवल लेबर रूम के ढांचे को सुधारने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान महिलाओं को सुरक्षित, गरिमापूर्ण और तनावमुक्त माहौल देना है, ताकि हर मां यहां से अच्छा अनुभव लेकर जाए।
वहीं विभागाध्यक्ष डॉ शबाना सुल्तान ने कहा कि विभाग अब इलाज के साथ-साथ समग्र देखभाल पर भी ध्यान दे रहा है। अरोमा और म्यूजिक थेरेपी जैसी सुविधाएं प्रसव के दौरान महिलाओं का तनाव कम करने में मदद करेंगी। साथ ही उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार प्रसव की मुद्रा चुनने का विकल्प भी दिया जा रहा है।
