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Big News: सवाल एक समुदाय के वक्फ पर क्यों...भारत में बाकी धर्मों के पास भी बड़ी तादाद में जमीनें
Fri, 20 Sep 2024 03:48 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 20 Sep 2024 03:48 PM IST
सार
देश में मौजूद वक्फ प्रॉपर्टी को लेकर अब अन्य समुदाय की संपत्तियों से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें वक्फ संपत्तियों की तादाद बहुत कम और अन्य धर्मों के पास अधिक जायदाद बताई जा रही है।
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वक्फ बोर्ड, एमपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर चर्चाएं तेज हैं। इस संशोधन के जरिए जहां जरूरतमंद लोगों की मदद और मौजूद संपत्तियों के मुनासिब उपयोग की बात की जा रही है। वहीं, एक समुदाय इसे अपने धार्मिक मामलों में सरकार की सीधी दखल अंदाजी करार दे रहा है। देश में मौजूद वक्फ प्रॉपर्टी को लेकर अब अन्य समुदाय की संपत्तियों से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें वक्फ संपत्तियों की तादाद बहुत कम और अन्य धर्मों के पास अधिक जायदाद बताई जा रही है।
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केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर लगातार यह प्रचारित किया जा रहा है कि देश में मौजूद वक्फ प्रॉपर्टी रेलवे और सेना के बाद तीसरी सबसे बड़ी संपत्ति है। जबकि वास्तविकता यह है कि हिंदू बोर्ड के पास 150 लाख एकड़ जमीनें देशभर में मौजूद हैं। जबकि वक़्फ़ बोर्ड के पास मात्र 9.5 लाख एकड़ जमीन ही उपलब्ध हैं।
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किसके पास कितनी जमीन
सिर्फ तमिलनाडु के हिंदू बोर्ड के पास 3.5 लाख एकड़ और आंध्र प्रदेश में चार लाख 65 हजार एकड़ जमीन जायदाद है। जबकि वक्फ की पूरे भारत में कुल संपत्ति 9.5 लाख एकड़ है। कम से कम हर प्रदेश में हिंदू बोर्ड के पास पांच लाख एकड़ जमीन होनी ही चाहिए, जिसमें मंदिर, आश्रम, मठ, अखाड़े, वेद पाठशालाएं, सरस्वती शिशु मंदिर, घाट, वृद्ध आश्रम, अनाथालय, नारी निकेतन, दरबार और गुफाएं शामिल हैं।
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यह दिया जा रहा तर्क
सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों में जारी चर्चाओं में कहा जा रहा है कि भारत में 29 राज्य और आठ यूनियन टेरिटरी हैं, पांच लाख एकड़×28=140 लाख एकड़ जमीन तो सिर्फ़ भारत के प्रदेशों में होगी और आठ यूनियन टेरिटरी में भी 10 लाख एकड़ ज़मीन को मिला लिया जाए तो हिंदू बोर्ड के पास कुल संपत्ति 150 लाख एकड़ हो जाती है।
यह बता रहे मंशा
वक्फ बोर्ड संशोधन का विरोध करने वालों का मानना है कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। वह मुसलमानों से उनकी धार्मिक जमीन छीनने की शुरुआत कर रही है। इसके बाद ये ही काम सिखों, ईसाइयों, बौद्धों, जैनियों के साथ भी होगा। कहा जा रहा है कि सरकार का असली टारगेट तो हिंदू बोर्ड की ज़मीन, मंदिर मठ का सोना और चढ़ावा है।
पहले हो चुकी मंदिरों के तहखाने खुलवाने की कोशिश
चर्चाओं में तर्क दिया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विधानसभा में नुज़ूल बिल पास करवा ही लिया है, जिसकी वजह से करोड़ों हिंदू बेघर हो सकते हैं। इसलिए विधान परिषद ने बिल पास नहीं किया। उसे कमेटी को भेज दिया गया। क्योंकि बीजेपी के विधायक ही इस बिल के खिलाफ विधानसभा और विधान परिषद में बोल रहे थे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के कहने पर ही ये बिल रुका है।
हिंदू का नुकसान, मुसलमानों के प्रचार के साथ
देश में हिंदुओं के खिलाफ कई संविधान विरोधी कानून लाए जा रहे हैं। लेकिन उनका प्रचार-प्रसार मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने के साथ किया भी जाता है, जिससे नफरती व समर्थक लोग सत्य को जान व समझ न सकें। उस असंवैधानिक कानून के खिलाफ सबसे पहले बोलता भी मुसलमान ही है, बाकी लोग तो जब बोलना शुरू करेंगे, जब उनका नंबर आएगा।
निशाने पर यह भी
जानकर कहते हैं कि देश में हिंदुओं के कई पंथ हैं, जिसकी वजह से एक तरह का बोर्ड संभव नहीं है, लेकिन बोर्ड तो हर प्रदेश में बना हुआ है। कहीं राम मंदिर ट्रस्ट है तो कहीं शिव ट्रस्ट है। कहीं कृष्णा ट्रस्ट है तो तिरूपति-बालाजी तो कहीं हनुमान ट्रस्ट है। इसी तरह मुस्लिमों के भी शिया वक्फ बोर्ड व सुन्नी वक्फ बोर्ड बने हैं। सिखों में भी गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी बनी हुई है।
