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यूनियन कार्बाइड मामला : हाईकोर्ट में पेश हुई नई रिपोर्ट, अब अगली सुनवाई 27 नवंबर को

Sat, 17 Oct 2026 05:36 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 17 Oct 2026 05:36 PM IST
सार

यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निपटान मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नई रिपोर्ट पेश की है। इसमें कचरा जलाने के बाद बची राख में पारे की मौजूदगी से संबंधित जानकारी है। अदालत ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 तय की है।

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यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे के निपटान से जुड़े मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाईकोर्ट में नई रिपोर्ट पेश की है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे के निपटान से जुड़े मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाईकोर्ट में नई रिपोर्ट पेश की है। प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट में कचरे को जलाने के बाद बची राख में पारे की मौजूदगी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित कर दी है।
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वकीलों की व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अगली तिथि पर अपना पक्ष रखने वाले वकीलों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दलीलें नहीं सुनी जाएंगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी पूरी तरह साफ कर दिया कि इस प्रकरण को अब अनावश्यक रूप से आगे नहीं टाला जाएगा। आगामी 27 नवंबर को होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई में सभी संबंधित पक्ष रिपोर्ट के आधार पर अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रखेंगे।
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2004 में दायर हुई थी जनहित याचिका
यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे के निपटान की मांग को लेकर आलोक प्रताप सिंह ने वर्ष 2004 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को संज्ञान याचिका के रूप में लगातार जारी रखा। बाद में अदालत के आदेश पर ही यूनियन कार्बाइड परिसर के जहरीले कचरे का निपटान धार जिले के पीथमपुर में किया गया था।


दूषित पानी की आपूर्ति और विशेषज्ञ जांच
मामले की पिछली सुनवाइयों के दौरान अदालत को जानकारी दी गई थी कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीला कचरा हटाए जाने के बाद भी आसपास के कई वार्डों में दूषित पानी की आपूर्ति का गंभीर खतरा बना हुआ है। इस स्थिति पर हाईकोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के माध्यम से पानी के नमूनों की गहन जांच करवाकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए थे।

पिछली सुनवाई के दौरान बोर्ड की ओर से पानी की जांच रिपोर्ट पेश कर दी गई थी। इसके उपरांत ही राख में पारे की मौजूदगी का मुद्दा सामने आया था, जिस पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। यद्यपि इससे पहले सरकार की ओर से बताया गया था कि बोर्ड की जांच में सभी निर्धारित मानक तय सीमा के भीतर ही पाए गए हैं, किंतु अब राख से संबंधित नई रिपोर्ट को भी अदालत ने अपने रिकॉर्ड पर ले लिया है।
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