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मिलावटखोरों पर तीन करोड़ जुर्माना: वसूली सिर्फ उनतालीस फीसदी, प्रदेश में अठारह हजार से ज्यादा मामले अभी लंबित

Sat, 24 Oct 2026 05:23 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 24 Oct 2026 05:23 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में मिलावट के मामलों में 3.15 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया, लेकिन वसूली सिर्फ 1.23 करोड़ रुपये हुई। 22 अक्टूबर तक प्रदेश में 1,894 मामले लंबित थे। नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा 344, उज्जैन में 285 और भोपाल में 68 प्रकरण लंबित हैं। राजधानी में 54 मामलों का निराकरण हुआ और 4.36 लाख रुपये की वसूली दर्ज की गई।

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Three crore rupees in fines imposed on adulterators: only 39 percent recovered; over 18,000 cases still pendin
खाद्य विभाग की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों पर जुर्माना लगाने के बावजूद पूरी राशि वसूलने में खाद्य एवं औषधि प्रशासन पीछे है। विभाग के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 22 अक्टूबर 2026 के बीच मिलावट से जुड़े मामलों में कुल 3 करोड़ 15 लाख 83 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया, लेकिन वसूली 1 करोड़ 23 लाख 71 हजार 150 रुपये ही हुई। यानी लगाए गए जुर्माने की करीब 39 प्रतिशत राशि ही सरकारी खजाने में जमा हुई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में प्रदेशभर में 1,081 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जबकि 1,894 मामले अब भी लंबित हैं। ये आंकड़े मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के साथ जुर्माने की वसूली और लंबित मामलों के निपटारे की स्थिति पर भी सवाल खड़े करते हैं।
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भोपाल में 68 मामले लंबित, 54 का निराकरण
राजधानी भोपाल में मिलावट से संबंधित 68 प्रकरण लंबित हैं, जबकि 54 मामलों का निराकरण किया गया है। इन मामलों में 6 लाख 50 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया और 4 लाख 36 हजार 500 रुपये की वसूली दर्ज की गई।
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नर्मदापुरम और उज्जैन में सबसे ज्यादा लंबित मामले
जिलावार आंकड़ों में नर्मदापुरम में सबसे अधिक 344 प्रकरण लंबित दर्ज हैं। उज्जैन में 285, भिंड में 189, जबकि जबलपुर और मुरैना में 121-121 मामले लंबित हैं। धार में 92 और भोपाल में 68 प्रकरण लंबित हैं। जुर्माने की राशि के मामले में धार जिले में 79 लाख 95 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। ग्वालियर में 66 लाख 84 हजार और भिंड में 45 लाख 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
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सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, वसूली का भी
खाद्य पदार्थों में मिलावट लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने के साथ उसकी प्रभावी वसूली और लंबित प्रकरणों का समय पर निराकरण भी जरूरी है। विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 22 अक्टूबर तक प्रदेश में 1,894 मामले लंबित थे और अधिरोपित अर्थदंड की तुलना में वसूली काफी कम रही। अब इन मामलों के निपटारे और शेष जुर्माने की वसूली पर विभाग की कार्रवाई अहम होगी।

 
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