Exclusive: ‘धीरेंद्र शास्त्री भगवान नहीं हैं’, गलती थी मैंने उन्हें भगवान माना; खास बातचीत में बोलीं शिवरंजनी
Exclusive: बाबा बाग्श्वेर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के विवाह को लेकर चर्चाएं खूब होती है। सवाल कई बार उठा कि बाबा बागेश्वर शादी कब करेंगे। इस सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने मीडिया को दिये गए इंटरव्यू में अपनी शादी को लेकर बयान भी दिया था कि वो जल्द तारीख बता देंगे। इसके बाद उनके गुरु का कहना है कि अगर धीरेंद्र शास्त्री शादी करेंगे तो उनकी सारी विधाएं खत्म हो जाएंगी, लेकिन इन सबके बीच जब हम इनके विवाह की बात करते हैं तो एक नाम जरूर सामने आता है वो है शिवरंजनी का, अमर उजाला ने इन्हीं शिवरंजनी से बातचीत की, जानिये क्या कुछ कहा उन्होंने इस बातचीत में...
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सवाल- जिस तरह का अभी माहौल चल रहा है, जिस तरह के बयान धीरेंद्र शास्त्री को लेकर सामने आते हैं उसपर आपका क्या कहना है?
जवाब- देखिये, बाबा बागेश्वर धाम उर्फ धीरेंद्र शास्त्री जी पर जो भी बयान आते हैं, इस बयान पर हमारे श्रोता जो भी रिएक्शन देते हैं, वो बिल्कुल सही है, क्योंकि हमारा देश आजाद है, और अभी हमने अपने देश की आजादी मनाई है, तो इसलिए हर किसी को अपनी बात कहने की आजादी है।
सवाल- हम जब धीरेंद्र शास्त्री की बात करते हैं तो एक-एक करके उनके बयानों की बात करते हैं, हाल ही में उन्होंने एक बयान दिया कि जो वंदे मातरम नहीं कह सकता, उसे इस देश में रहने का हक नहीं है, इस बयान से कितना इत्तेफाक रखती है आप?
जवाब- देखिये हमारा जो देश है उसमें विभिन्न जातियों के लोग रहते हैं, कोई राम को मानता है, कोई रहीम को मानता है तो कोई भगवान बुद्ध को मानता है, हां अगर आप हमारे देश में रह रहे हैं तो आपको कहना पड़ेगा और आपको हमारे देश की बात माननी पड़ेगी, मेरा ऐसा मानना है कि हर किसी को अपने देश के प्रति ईमानदार होना चाहिए।
सवाल- शिवरंजनी आपने धीरेंद्र शास्त्री को प्राणनाथ कहा था, इस बयान पर काफी विवाद हुआ, आपको काफी धमकियां भी मिली, आपके कपड़ों को लेकर भी विवाद उपजा, इस पूरे मामले के बाद कितना फर्क पड़ा?
जवाब- सबसे पहले मैं अपने कपड़े पर हुई कंट्रोवर्सी पर बात रखना चाहूंगी, मुझसे ये कहा गया कि आपको भगवावस्त्र नहीं पहनना चाहिए, इसलिए जब मैंने उनसे मिलने (धीरेंद्र शास्त्री) के लिए यात्रा शुरू की थी तो मैंने उसमें भगवा वस्त्र की पहना हुआ था। यहां मैं कहना चाहूंगी कि ये अधिकारी किसी को नहीं है कि उसने कौन से रंग का कपड़ा पहना हुआ है, ये सबकी अपनी पर्सनल च्वॉइस है। ये जो धर्म के ठेकेदार बनते हैं, इनसे मैं इतना कहना चाहूंगी कि अभी मैंने अपने देश की आजादी मनाई है, इसलिए हमें बताने की जरूरत नहीं है कि हमें क्या पहनना है और क्या नहीं...हां मुझे कई बार धमकियां भी मिली है जान से मारने की, जब मैं अपने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करती थी तो मुझे वहां भी ट्रोल किया जाता था। लेकिन मैं ऐसे लोगों की इग्नोर करती हूं। अब सवाल धीरेंद्र शास्त्री जी के प्राणनाथ को लेकर है कि मैं उन्हें ये क्यों कहती हूं तो जैसे हर किसी कन्या के चार पति होते है। सबसे पहले पति होते हैं, राष्ट्रपति, दूसरे होते हैं कुलपति, तीसरे होते हैं धर्मपति जिनसे हमारा विवाह होता है और चौथे आते है हमारे प्राणपति जो हम भगवान को कह सकते हैं, अब जिस तरह से धीरेंद्र शास्त्री जी चमत्कार दिखा रहे हैं, तो मेरे हिसाब से ये एक भगवान का अवतार हैं, तो इसी लिए उन्हें मैंने प्राणपति कह दिया।
सवाल- आपने उन्हें अपना प्राणपति कहा तो क्या अभी भी आपके दिल में उनके लिए श्रद्धा बाकी है?
जवाब- देखिये जहां तक सवाल श्रद्धा का है तो भगवान कृष्ण को हमने आराध्य माना है। हमारी जिंदगी में उतार चढ़ाव होते हैं तो हम भी भगवान को कितना कुछ बोल देते हैं। हां बालाजी सरकार से मेरी आस्था थी अब उसे वो किस तरह से ले रहे हैं मुझे नहीं पता लेकिन हां जिस तरह से उनके हावभाव बदलते जा रहे हैं, तो शायद मेरी गलती थी मैंने उन्हें अपना भगवान माना।
