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सीएम से बातचीत के बाद सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त: 25 दिन काम करने वालों को अब मिलेंगे 18 से 20 हजार रुपए
Fri, 06 Nov 2026 09:42 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 06 Nov 2026 09:42 PM IST
सार
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रदेशभर के सफाई कर्मचारियों ने तीन दिन से जारी हड़ताल खत्म कर दी है। भोपाल में 2550 टन कचरा जमा होने और पानी की सप्लाई प्रभावित होने के बाद सरकार ने 25 दिवसीय कर्मचारियों का वेतन 18 से 20 हजार रुपये करने और 29 दिन काम करने वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया एक महीने में पूरी करने का भरोसा दिया है।
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कर्मचारियों के साथ कलेक्टर, कमिश्नर और महापौर फील्ड पर उतरे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल में तीन दिन तक सफाई व्यवस्था ठप रहने और सड़कों पर हजारों टन कचरा जमा होने के बाद आखिरकार सरकार और सफाई कर्मचारियों के बीच सहमति बन गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद सफाई कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है। सरकार ने कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग पर सकारात्मक निर्णय का भरोसा दिया है। इसके साथ ही शहर में सफाई का काम दोबारा शुरू हो गया है।समझौते के मुताबिक, 25 दिन काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन अब 18 से 20 हजार रुपये तक होगा। वहीं, 29 दिन काम करने वाले और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें यूनियन के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे। एक महीने में प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई है। अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों पर भी काम होगा।
मंत्रियों और अफसरों के बंगलों के सामने भी नहीं उठा कचरा
हड़ताल का असर भोपाल के आम मोहल्लों से लेकर वीआईपी इलाकों तक दिखाई दिया। चार इमली में मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के बंगलों के आसपास कचरे के ढेर लग गए। हनुमान मंदिर और साईं मंदिर के पास भी गंदगी जमा रही। अटल पथ पर भी कचरा फैला रहा। दो दिन पहले इसी सड़क पर भाजपा की रैली हुई थी। कोलार रोड पर गेस्ट हाउस के सामने सिक्सलेन के सेंटर वर्ज में तीन दिन से कचरा जमा था। मंत्रालय और वल्लभ भवन के आसपास भी डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों पर फैल गया। बुधवारा बाजार में कचरे के बीच जानवरों के शव पड़े होने की स्थिति सामने आई। कई इलाकों में लोगों ने कचरा उठाने के बजाय उसमें आग लगा दी, जिससे धुआं फैलने लगा।
2550 टन कचरा जमा, 400 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी रहीं
हड़ताल के कारण भोपाल में घरों से कचरा उठाने की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई। तीन दिनों में करीब 2550 टन कचरा जमा हो गया। शहर में कचरा संग्रहण के लिए चलने वाली 400 से ज्यादा गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी रहीं। सामान्य दिनों में ये गाड़ियां रोज दो से तीन चक्कर लगाती हैं। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों से कचरा कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी पहुंचाया जाता है। कचरा नहीं उठने से कई जगह डस्टबिन के बाहर तक गंदगी फैल गई। लोगों ने खाली प्लॉट और सड़क किनारे कचरा फेंकना शुरू कर दिया। कई स्थानों पर कचरा जलाने से प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी।
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10,500 रुपये वेतन पाने वालों ने मांगे थे 25 हजार
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, 25 दिवसीय वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को हर महीने केवल 10,500 रुपये मिलते हैं। इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। कर्मचारी इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग कर रहे थे। यूनियन के प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान ने बताया कि नगर निगम में करीब सात हजार कर्मचारी 25 दिवसीय वेतन पर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगें थीं। इनमें वेतन वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति, नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करना शामिल है। प्रदेशभर में एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों के आंदोलन से जुड़ने का दावा किया गया था।
पानी की सप्लाई भी हुई प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का असर केवल कचरा संग्रहण तक सीमित नहीं रहा। शुक्रवार को कई इलाकों में नल के वॉल्व नहीं खोले गए और टैंकरों से पानी पहुंचाने का काम भी प्रभावित हुआ। इससे बस्तियों में पानी की परेशानी खड़ी हो गई। भोपाल में करीब 2.30 लाख नल कनेक्शन हैं। हालांकि, कई स्थानों पर वॉल्व खोल दिए जाने से पानी का बड़ा संकट टल गया। कर्मचारियों के समर्थन में जलप्रदाय सहित नगर निगम के दूसरे विभागों के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए थे।
अटल भवन में लगा था ताला, 85 वार्डों का काम प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के समर्थन में 25 दिवसीय वेतनभोगी कर्मचारी भी हड़ताल पर उतर आए थे। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन की बिजली सप्लाई बंद कर ताला लगा दिया था। इसका असर नगर निगम मुख्यालय के साथ सभी 85 वार्डों और 21 जोन के कामकाज पर पड़ा। सफाई कर्मचारियों के साथ कंप्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, बिल्डिंग परमिशन, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल थे।
यह भी पढ़ें-भोपाल में धनतेरस: एक हजार करोड़ से ज्यादा के कारोबार की उम्मीद, सोना-चांदी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक बरसेगा धन
पहले मंत्री और महापौर से बातचीत, फिर सीएम के सामने रखी मांगें
कर्मचारियों ने तीन नवंबर को शाहजहांनी पार्क में प्रदर्शन शुरू किया था। ज्ञापन लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे तो कर्मचारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के साथ बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद मंत्री कृष्णा गौर, महापौर मालती राय और नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार के साथ बैठक हुई। शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद मांगों पर सहमति बनने का दावा किया गया। यूनियन अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, नियमितीकरण की प्रक्रिया शनिवार से शुरू करने की बात कही गई है। इसमें कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे।
दूसरे शहरों में भी दिखा हड़ताल का असर
भोपाल के अलावा शिवपुरी, विदिशा और प्रदेश के दूसरे शहरों में भी सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी आंदोलन में शामिल थे। विदिशा जिले के सिरोंज में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने पर विधायक उमाकांत शर्मा खुद सड़क पर झाड़ू लगाने उतरे। वहीं, राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में कपड़े सिलने की दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार नामदेव ने दुकान छोड़कर बाजार की सफाई की। उन्होंने झाड़ू और हाथ ठेला लेकर करीब डेढ़ घंटे तक कचरा समेटा।
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मंत्रियों और अफसरों के बंगलों के सामने भी नहीं उठा कचरा
हड़ताल का असर भोपाल के आम मोहल्लों से लेकर वीआईपी इलाकों तक दिखाई दिया। चार इमली में मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के बंगलों के आसपास कचरे के ढेर लग गए। हनुमान मंदिर और साईं मंदिर के पास भी गंदगी जमा रही। अटल पथ पर भी कचरा फैला रहा। दो दिन पहले इसी सड़क पर भाजपा की रैली हुई थी। कोलार रोड पर गेस्ट हाउस के सामने सिक्सलेन के सेंटर वर्ज में तीन दिन से कचरा जमा था। मंत्रालय और वल्लभ भवन के आसपास भी डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों पर फैल गया। बुधवारा बाजार में कचरे के बीच जानवरों के शव पड़े होने की स्थिति सामने आई। कई इलाकों में लोगों ने कचरा उठाने के बजाय उसमें आग लगा दी, जिससे धुआं फैलने लगा।
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2550 टन कचरा जमा, 400 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी रहीं
हड़ताल के कारण भोपाल में घरों से कचरा उठाने की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई। तीन दिनों में करीब 2550 टन कचरा जमा हो गया। शहर में कचरा संग्रहण के लिए चलने वाली 400 से ज्यादा गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी रहीं। सामान्य दिनों में ये गाड़ियां रोज दो से तीन चक्कर लगाती हैं। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों से कचरा कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी पहुंचाया जाता है। कचरा नहीं उठने से कई जगह डस्टबिन के बाहर तक गंदगी फैल गई। लोगों ने खाली प्लॉट और सड़क किनारे कचरा फेंकना शुरू कर दिया। कई स्थानों पर कचरा जलाने से प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी।
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10,500 रुपये वेतन पाने वालों ने मांगे थे 25 हजार
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, 25 दिवसीय वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को हर महीने केवल 10,500 रुपये मिलते हैं। इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। कर्मचारी इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग कर रहे थे। यूनियन के प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान ने बताया कि नगर निगम में करीब सात हजार कर्मचारी 25 दिवसीय वेतन पर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगें थीं। इनमें वेतन वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति, नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करना शामिल है। प्रदेशभर में एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों के आंदोलन से जुड़ने का दावा किया गया था।
पानी की सप्लाई भी हुई प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का असर केवल कचरा संग्रहण तक सीमित नहीं रहा। शुक्रवार को कई इलाकों में नल के वॉल्व नहीं खोले गए और टैंकरों से पानी पहुंचाने का काम भी प्रभावित हुआ। इससे बस्तियों में पानी की परेशानी खड़ी हो गई। भोपाल में करीब 2.30 लाख नल कनेक्शन हैं। हालांकि, कई स्थानों पर वॉल्व खोल दिए जाने से पानी का बड़ा संकट टल गया। कर्मचारियों के समर्थन में जलप्रदाय सहित नगर निगम के दूसरे विभागों के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए थे।
अटल भवन में लगा था ताला, 85 वार्डों का काम प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के समर्थन में 25 दिवसीय वेतनभोगी कर्मचारी भी हड़ताल पर उतर आए थे। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन की बिजली सप्लाई बंद कर ताला लगा दिया था। इसका असर नगर निगम मुख्यालय के साथ सभी 85 वार्डों और 21 जोन के कामकाज पर पड़ा। सफाई कर्मचारियों के साथ कंप्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, बिल्डिंग परमिशन, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल थे।
यह भी पढ़ें-भोपाल में धनतेरस: एक हजार करोड़ से ज्यादा के कारोबार की उम्मीद, सोना-चांदी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक बरसेगा धन
पहले मंत्री और महापौर से बातचीत, फिर सीएम के सामने रखी मांगें
कर्मचारियों ने तीन नवंबर को शाहजहांनी पार्क में प्रदर्शन शुरू किया था। ज्ञापन लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे तो कर्मचारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के साथ बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद मंत्री कृष्णा गौर, महापौर मालती राय और नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार के साथ बैठक हुई। शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद मांगों पर सहमति बनने का दावा किया गया। यूनियन अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, नियमितीकरण की प्रक्रिया शनिवार से शुरू करने की बात कही गई है। इसमें कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे।
दूसरे शहरों में भी दिखा हड़ताल का असर
भोपाल के अलावा शिवपुरी, विदिशा और प्रदेश के दूसरे शहरों में भी सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी आंदोलन में शामिल थे। विदिशा जिले के सिरोंज में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने पर विधायक उमाकांत शर्मा खुद सड़क पर झाड़ू लगाने उतरे। वहीं, राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में कपड़े सिलने की दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार नामदेव ने दुकान छोड़कर बाजार की सफाई की। उन्होंने झाड़ू और हाथ ठेला लेकर करीब डेढ़ घंटे तक कचरा समेटा।
