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भोपाल में पंचायत कर्मचारी भूख हड़ताल पर: चौकीदार-सफाईकर्मी और पंप चालकों में आक्रोश, न्यूनतम वेतनमान की मांग
Mon, 28 Sep 2026 03:41 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:41 PM IST
सार
बीजेपी कार्यालय के बाहर धरने से पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद ग्राम पंचायत कर्मचारियों ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भूख हड़ताल शुरू कर दी। चौकीदार, सफाईकर्मी, भृत्य और पंप चालक न्यूनतम वेतन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा, सेवा सुरक्षा और लंबित एरियर समेत कई मांगें उठा रहे हैं।
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कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ग्राम पंचायतों में काम करने वाले चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी और पंप चालकों का दो दिवसीय आंदोलन सोमवार से शुरू हो गया। विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी बीजेपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर बोर्ड ऑफिस चौराहे पहुंचाया। इसके बाद कर्मचारियों ने वहीं भूख हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से ग्राम पंचायतों में सुरक्षा, सफाई, पेयजल और रोजमर्रा के काम संभाल रहे हैं, लेकिन उन्हें न नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही सम्मानजनक वेतन। आंदोलनकारियों ने ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी और पंप चालकों को शासकीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है।
2 से 4 हजार रुपए तक मानदेय मिलने का दावा
आंदोलनकारी वासुदेव शर्मा के मुताबिक, ग्राम पंचायतों में काम करने वाले कई कर्मचारियों को सिर्फ 2 से 4 हजार रुपए महीने मिल रहे हैं। उनका कहना है कि कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल है। कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन लागू करने और वर्षों से लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग की है।
इन मांगों को लेकर भूख हड़ताल
कर्मचारियों ने सेवा-शर्तें तय करने, पीएफ-ईएसआई, चिकित्सा सुविधा, पेंशन या बीमा, वार्षिक वेतन वृद्धि और लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, इसलिए इस बार दो दिवसीय आंदोलन के साथ भूख हड़ताल शुरू की गई है।
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11 श्रेणी के कर्मचारी आंदोलन में शामिल
कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा के अनुसार, आंदोलन को ‘न्यूनतम वेतन दिलाओ उपवास आंदोलन’ नाम दिया गया है। इसमें ग्राम पंचायतों के चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य, सफाईकर्मी और लोकल यूथ सर्वेयर सहित अलग-अलग विभागों में काम करने वाले अंशकालीन और अस्थायी कर्मचारी शामिल हो रहे हैं।उनके अनुसार शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों और छात्रावासों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारियों को 4 से 5 हजार रुपए महीने मिल रहे हैं। उनका दावा है कि इन कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है।
अलग-अलग विभागों में मानदेय को लेकर दावा
स्कूल, छात्रावास और आयुष विभाग के अंशकालीन कर्मचारी : 4 से 5 हजार रुपए
ग्राम पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य और सफाईकर्मी : 3 से 4 हजार रुपए
स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी आउटसोर्स कर्मचारी : 7 से 8 हजार रुपए
लोक यूथ सर्वेयर : करीब 1 हजार रुपए
पेसा मोबिलाइजर : करीब 4 हजार रुपए
कोटवार : 2 से 5 हजार रुपए
मध्याह्न भोजन कार्यकर्ता : करीब 4 हजार रुपए
मनरेगा मेट : 2 हजार रुपए से कम
योग सहायक एवं प्रशिक्षक : करीब 4,500 रुपए
यह भी पढ़ें-एमपी में मानसून विदाई की उल्टी गिनती शुरू: 37.7 इंच बारिश, सामान्य कोटे से सिर्फ 0.2% दूर, अब धूप बढ़ेगी
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर उठाए सवाल
वासुदेव शर्मा ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। पत्र में दावा किया गया है कि वर्ष 2003 से प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थायी रोजगार के अवसर कम हुए हैं और बड़ी संख्या में काम अस्थायी तथा आउटसोर्स व्यवस्था के जरिए कराया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि इन पदों पर काम करने वाले गरीब, मजदूर, दलित, आदिवासी, ओबीसी और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं को रोजगार की स्थिरता और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, बोर्ड ऑफिस चौराहे पर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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2 से 4 हजार रुपए तक मानदेय मिलने का दावा
आंदोलनकारी वासुदेव शर्मा के मुताबिक, ग्राम पंचायतों में काम करने वाले कई कर्मचारियों को सिर्फ 2 से 4 हजार रुपए महीने मिल रहे हैं। उनका कहना है कि कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल है। कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन लागू करने और वर्षों से लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग की है।
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इन मांगों को लेकर भूख हड़ताल
कर्मचारियों ने सेवा-शर्तें तय करने, पीएफ-ईएसआई, चिकित्सा सुविधा, पेंशन या बीमा, वार्षिक वेतन वृद्धि और लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, इसलिए इस बार दो दिवसीय आंदोलन के साथ भूख हड़ताल शुरू की गई है।
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11 श्रेणी के कर्मचारी आंदोलन में शामिल
कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा के अनुसार, आंदोलन को ‘न्यूनतम वेतन दिलाओ उपवास आंदोलन’ नाम दिया गया है। इसमें ग्राम पंचायतों के चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य, सफाईकर्मी और लोकल यूथ सर्वेयर सहित अलग-अलग विभागों में काम करने वाले अंशकालीन और अस्थायी कर्मचारी शामिल हो रहे हैं।उनके अनुसार शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों और छात्रावासों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारियों को 4 से 5 हजार रुपए महीने मिल रहे हैं। उनका दावा है कि इन कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है।
अलग-अलग विभागों में मानदेय को लेकर दावा
स्कूल, छात्रावास और आयुष विभाग के अंशकालीन कर्मचारी : 4 से 5 हजार रुपए
ग्राम पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य और सफाईकर्मी : 3 से 4 हजार रुपए
स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी आउटसोर्स कर्मचारी : 7 से 8 हजार रुपए
लोक यूथ सर्वेयर : करीब 1 हजार रुपए
पेसा मोबिलाइजर : करीब 4 हजार रुपए
कोटवार : 2 से 5 हजार रुपए
मध्याह्न भोजन कार्यकर्ता : करीब 4 हजार रुपए
मनरेगा मेट : 2 हजार रुपए से कम
योग सहायक एवं प्रशिक्षक : करीब 4,500 रुपए
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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर उठाए सवाल
वासुदेव शर्मा ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। पत्र में दावा किया गया है कि वर्ष 2003 से प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थायी रोजगार के अवसर कम हुए हैं और बड़ी संख्या में काम अस्थायी तथा आउटसोर्स व्यवस्था के जरिए कराया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि इन पदों पर काम करने वाले गरीब, मजदूर, दलित, आदिवासी, ओबीसी और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं को रोजगार की स्थिरता और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, बोर्ड ऑफिस चौराहे पर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
