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भोपाल: पांच महीने से स्टाइपेंड, तीन महीने से वेतन नहीं, जेपी अस्पताल के तीन डॉक्टर भूख हड़ताल पर

Wed, 21 Oct 2026 06:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 21 Oct 2026 06:19 PM IST
सार

भोपाल के जेपी अस्पताल में पांच महीने से स्टाइपेंड और तीन महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाकर तीन डॉक्टरों ने 21 अक्टूबर से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की। डॉक्टरों ने ड्यूटी आवंटन में भेदभाव, वरिष्ठता की अनदेखी और मानसिक प्रताड़ना का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की है। वहीं, अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन का कहना है कि डॉक्टर बिना सूचना छुट्टी पर गए थे, इसलिए उनका वेतन रोका गया।

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No stipend for five months, no salary for three months: Three doctors at Bhopal’s JP Hospital go on a hunger s
भूख हड़ताल पर डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के जयप्रकाश जिला चिकित्सालय (जेपी अस्पताल) में वेतन और स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर विवाद गहरा गया है। पांच महीने से स्टाइपेंड और तीन महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए तीन डॉक्टरों ने बुधवार, 21 अक्टूबर से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। डॉक्टरों ने वेतन भुगतान में देरी के साथ ड्यूटी आवंटन में भेदभाव, वरिष्ठता की अनदेखी और मानसिक प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया है। मामले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सकों को काम देने और ड्यूटी तय करने में भी निष्पक्षता नहीं बरती जा रही। मांगों का समाधान नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी पहले ही दे दी थी। अब भूख हड़ताल के जरिए उन्होंने बकाया भुगतान और कार्य व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है।
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वेतन के साथ ड्यूटी व्यवस्था पर भी सवाल
डॉक्टरों ने अपने पत्र में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पिछले तीन महीने का लंबित वेतन तत्काल जारी करना, आपातकालीन और रात्रिकालीन ड्यूटी का निष्पक्ष एवं पारदर्शी वितरण तथा वरिष्ठता और समान कार्यभार का ध्यान रखना शामिल है। इसके अलावा चिकित्सकों को उनकी विषय विशेषज्ञता के अनुसार काम देने और वेतन भुगतान में अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। डॉक्टरों ने विभाग में ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था शुरू करने की मांग भी की है, ताकि चिकित्सकों की समस्याओं का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान हो सके। उनका कहना है कि शिकायतों के निराकरण के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें समस्याएं दर्ज होने के बाद उन पर कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट हो।
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अधीक्षक का जवाब- बिना सूचना छुट्टी पर गए थे डॉक्टर
दूसरी ओर, अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने डॉक्टरों के आरोपों पर अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि संबंधित डॉक्टर बिना पूर्व सूचना के छुट्टी पर चले गए थे, जिसके चलते उनका वेतन रोका गया। अधीक्षक के मुताबिक, बाकी दिनों का वेतन दिया जा चुका है।डॉ. जैन ने डॉक्टरों की भूख हड़ताल को शासकीय नियमों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि उन्हें आंदोलन करने के बजाय अपनी समस्या वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखनी चाहिए थी। इस तरह वेतन रोकने को लेकर डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के बीच मतभेद सामने आ गए हैं।
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अब भुगतान और जांच पर टिकी नजर
एक ओर डॉक्टर लंबित भुगतान, ड्यूटी में समानता और शिकायतों के निपटारे की मांग कर रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन वेतन रोकने के पीछे बिना सूचना अनुपस्थित रहने का कारण बता रहा है। ऐसे में विवाद के समाधान के लिए डॉक्टरों की अनुपस्थिति, वेतन रोकने के आधार और लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट होना अहम होगा। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से समाधान की क्या पहल होती है, इस पर नजर रहेगी।


 
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