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नगरीय निकायों में गड़बड़ी: 146 अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई, सात को निकाला, 76 के इन्क्रीमेंट रोके

Fri, 23 Oct 2026 07:51 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय Updated Fri, 23 Oct 2026 07:51 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के 62 मामलों में 146 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक सात कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया, 76 के इंक्रीमेंट रोके गए और 38 कर्मचारियों से वित्तीय नुकसान की वसूली के आदेश दिए गए हैं। 

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mp urban local bodies financial irregularities 146 officials action
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के 62 मामलों में 146 अधिकारी व कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार सात कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है, जबकि 76 कर्मचारियों के इंक्रीमेंट रोके गए हैं। इसके अतिरिक्त 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती की गई है और 38 कर्मचारियों से वित्तीय हानि वसूलने के आदेश दिए गए हैं। जांच में आरोप सिद्ध न होने पर 22 कर्मचारियों को दोषमुक्त घोषित किया गया है, जबकि दो कर्मचारियों की मृत्यु के कारण कार्रवाई समाप्त की गई है।
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नगरीय निकायों में खरीदी और विकास कार्यों में अनियमितताओं को लेकर प्रदेश में राजनीति गर्मा गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के एक वीडियो को लेकर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। इस विवाद के बीच राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी और विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट में पूरी कार्रवाई का ब्योरा सामने आया है। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि 146 का आंकड़ा उन सभी कर्मचारियों का है जिनके प्रकरण दर्ज हुए थे।
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जेम पोर्टल से खरीदी में अनियमितताएं
जेम पोर्टल से सामग्री खरीदी में अधिकारियों ने स्वीकृत नियमों की अनदेखी की। छिंदवाड़ा जिले के न्यूटन चिखली में तत्कालीन सीएमओ नितिन बिजवे ने अपनी पत्नी के नाम से ऑनलाइन संस्था पंजीकृत कराई और जेम पोर्टल से खरीदी की। शासन ने उनके तीन इंक्रीमेंट रोकने तथा निलंबन अवधि को ड्यूटी न मानने का निर्णय लिया। सतना के कोटर में बाजार दर से अधिक कीमत पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और 3,000 लीटर का वाटर टैंकर खरीदा गया। तत्कालीन प्रभारी सीएमओ अंबिका प्रसाद साहू की मृत्यु के कारण उन पर दंड नहीं लगा, लेकिन निकाय को हुई 3,95,215 रुपये की क्षति की भरपाई उनके सेवानिवृत्ति लाभों से की गई।
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इसी प्रकरण में उपयंत्री देवरत्न सोनी का एक इंक्रीमेंट रोका गया और उनसे 1,45,215 रुपये वसूलने का आदेश जारी हुआ। सिवनी में शौचालय-मूत्रालय सामग्री, हाईमास्ट पोल, लाइट और 26 वाट की एलईडी लाइटें महंगी दर पर खरीदी गईं। तत्कालीन सीएमओ पूजा बुनकर के दो इंक्रीमेंट रोककर 7.16 लाख रुपये वेतन से वसूलने के निर्देश दिए गए। संबंधित उपयंत्रियों के भी इंक्रीमेंट रोककर नुकसान की आनुपातिक राशि वसूलने का आदेश दिया गया। गुना में प्रशासनिक मंजूरी के बिना 20 के स्थान पर केवल 10 कचरा वाहन खरीदे गए, जिसमें तत्कालीन प्रभारी सीएमओ संजय श्रीवास्तव और प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी हरीशबाबू शाक्यवार का एक-एक इंक्रीमेंट रोका गया।

टेंडर और कोटेशन में नियमविरुद्ध कार्य
टेंडर और कोटेशन से खरीदी में भी बड़ी अनियमितता सामने आई। धार में डामरीकरण सामग्री और डेलीनेटर खरीदी प्रकरण में सेवानिवृत्त मुख्य लिपिक विजय कुमार शर्मा की पेंशन में दो साल तक 10 प्रतिशत कटौती का फैसला हुआ। डेलीनेटर मामले में विजय कुमार शर्मा और पुनीत तिवारी से 1,43,325-1,43,325 रुपये की वसूली तय की गई। गुना में कीटनाशक पाउडर खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया से बचने खातिर एक-एक लाख रुपये से कम की अलग-अलग फाइलें बनाकर कोटेशन पर सामग्री खरीदी गई। इसमें संजय श्रीवास्तव और हरीशबाबू शाक्यवार का एक-एक इंक्रीमेंट रोका गया।

निवाड़ी के तरीचरकलां में बाजार दर से अधिक कीमत पर घटिया सामग्री खरीदने से निकाय को 26.16 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सेवानिवृत्त प्रभारी सीएमओ श्रवण कुमार द्विवेदी के लाभों से 13.08 लाख रुपये की वसूली और दो साल तक पेंशन महंगाई राहत में 10 प्रतिशत कटौती का निर्णय हुआ। शहडोल के ब्यौहारी में नलकूप खुदाई और सामग्री खरीद में अधिक दर देने पर तत्कालीन प्रभारी सीएमओ महेंद्र मिश्रा के दो इंक्रीमेंट रोककर 1.18 लाख रुपये वसूलने तथा तत्कालीन प्रभारी सीएमओ यशवंत वर्मा के दो इंक्रीमेंट रोकने का फैसला हुआ। भिंड के गोहद में वर्ष 2017 में डस्टबिन खरीदी में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ सुरेंद्र शर्मा और स्वच्छता निरीक्षक राघवेंद्र शर्मा के एक-एक इंक्रीमेंट रोककर दोनों से 39-39 हजार रुपये वसूलने के निर्देश दिए गए।

वित्तीय नुकसान के बड़े आंकड़े
विभागीय आंकड़ों के अनुसार शहडोल संभाग की कुछ नगर परिषदों में नियमविरुद्ध संविलियन से लगभग 3.20 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति हुई है। इसके अलावा सीहोर में सड़क निर्माण से जुड़े मामले में 29.08 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। बिजुरी में अलग-अलग मामलों में 26.78 लाख रुपये और 19 लाख रुपये की क्षति हुई है। वहीं पेटलावद में शासकीय दुकान आवंटन प्रक्रिया में 19.87 लाख रुपये की हानि हुई है।


विभागीय स्तर पर दंडात्मक निर्णय
शासकीय खजाने को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए शासन ने दोषियों के खिलाफ वसूली के कड़े कदम उठाए हैं। जिन मामलों में संबंधित कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनकी पेंशन और देयों से राशि काटी जा रही है। वहीं जिन मामलों में कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है, वहां उनसे जुड़ी विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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