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MP Politics: उमा भारती बनी एमपी में ओबीसी की अलमबरदार, राजनीतिक रूप से खुद को जीवित रखने कर रही पैंतरेबाजी?
सार
भाजपा के सामने अब चुनौती है कि उमा भारती को कहां सेट किया जाए। पार्टी की वह कद्दावर नेत्री हैं, इसलिए संगठन उनपर कुछ बोलने से बचता है। न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है।
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पूर्व सीएम उमा भारती
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में है। इसके साथ ही पूर्व सीएम उमा भारती भी सक्रिय हो गई हैं। उन्होंने अब महिला आरक्षण बिल में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग कर दी है। उन्हें मध्यप्रदेश में भाजपा में महिला ओबीसी राजनीति का अलमबरदार बताया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी लाडली बहना योजना के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बदले माहौल से आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही है। इस बीच पूर्व सीएम उमा भारती भाजपा को असमंजस में डाल रही हैं। हाल ही में उमा भारती ने जन आशीर्वाद यात्रा में नहीं बुलाने पर राजनीति को भगवत प्राप्ति का साधन बताकर संन्यास नहीं लेने और अगला चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इससे उन्होंने पार्टी को साफ संकेत दिया कि उनको साइडलाइन नहीं किया जा सकता। इसके लिए वह अपने बयानों से पार्टी के लिए मुश्किलें भी खड़ी कर देती हैं।
अब केंद्र के महिला आरक्षण बिल में अन्य पिछड़ा वर्ग, एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसे उनके प्रदेश में महिला ओबीसी राजनीति की अगुआ बनने के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, पूर्व सीएम ओबीसी वर्ग से आती हैं। प्रदेश में अभी ओबीसी वर्ग के आसपास ही राजनीति घूम रही है। प्रदेश की आधी आबादी में 60 प्रतिशत महिलाएं ओबीसी वर्ग से आती है। जानकारों का कहना है कि पार्टी ने उमा को घर बैठा दिया है। यहीं वजह है कि अब वह फिर से राजनीतिक सक्रियता के लिए अपनी जमीन तलाश रही है।
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शराब नीति पर सरकार को झुकाया
पूर्व सीएम उमा भारती कई मौकों पर पार्टी की चिंता बढ़ा चुकी है। उन्होंने शराब नीति को खुलकर विरोध किया और आंदोलन छेड़ने का ऐलान भी किया। उमा ने शराब की दुकान के सामने धरने देने से लेकर पत्थर फेंकर विरोध भी किया। इससे ही पार्टी उनके इरादे समझ गई और उनके सामने झूकने को मजबूर हुई। सरकार ने उमा भारती की मांगों को मानते हुए नई शराब नीति में बदलाव किए।
भतीजे को मंत्री, करीबियों को दिलाया टिकट
भाजपा नेता उमा भारती को साधने के लिए हर जतन कर रहे हैं। हालांकि उनको सम्मान जनक पद देने में पार्टी अब तक असफल नजर आ रही है। इस बीच पार्टी ने उनके भतीजे राहुल सिंह लोधी को कैबिनेट में शामिल किया। इससे पहले हारी सीटों की पहली सूची में उनके करीबी प्रीतम लोधी को टिकट दिया। इन निर्णय को उमा को साधने वाला ही बताया जा रहा है।
2003 में उमा ने कराई थी सत्ता में वापसी
उमा भारती ने 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी ने उनको मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि 1994 के हुबली दंगों में गिरफ्तारी वारंट के चलते उमा भारती ने 2004 में तिरंगा यात्रा निकालते समय मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि वह आरोपों से बरी हो गई है।
कहां सेट करेगी पार्टी
वहीं, भाजपा के सामने अब चुनौती है कि उमा भारती को कहां सेट किया जाए। पार्टी की वह कद्दावर नेत्री हैं, इसलिए संगठन उनपर कुछ बोलने से बचता है। न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है। हालांकि सरकार और संगठन के लोग उमा भारती के भाव को समझ जरूर रहे हैं कि उनकी चाहत क्या है?
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भारतीय जनता पार्टी लाडली बहना योजना के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बदले माहौल से आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही है। इस बीच पूर्व सीएम उमा भारती भाजपा को असमंजस में डाल रही हैं। हाल ही में उमा भारती ने जन आशीर्वाद यात्रा में नहीं बुलाने पर राजनीति को भगवत प्राप्ति का साधन बताकर संन्यास नहीं लेने और अगला चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इससे उन्होंने पार्टी को साफ संकेत दिया कि उनको साइडलाइन नहीं किया जा सकता। इसके लिए वह अपने बयानों से पार्टी के लिए मुश्किलें भी खड़ी कर देती हैं।
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अब केंद्र के महिला आरक्षण बिल में अन्य पिछड़ा वर्ग, एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसे उनके प्रदेश में महिला ओबीसी राजनीति की अगुआ बनने के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, पूर्व सीएम ओबीसी वर्ग से आती हैं। प्रदेश में अभी ओबीसी वर्ग के आसपास ही राजनीति घूम रही है। प्रदेश की आधी आबादी में 60 प्रतिशत महिलाएं ओबीसी वर्ग से आती है। जानकारों का कहना है कि पार्टी ने उमा को घर बैठा दिया है। यहीं वजह है कि अब वह फिर से राजनीतिक सक्रियता के लिए अपनी जमीन तलाश रही है।
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शराब नीति पर सरकार को झुकाया
पूर्व सीएम उमा भारती कई मौकों पर पार्टी की चिंता बढ़ा चुकी है। उन्होंने शराब नीति को खुलकर विरोध किया और आंदोलन छेड़ने का ऐलान भी किया। उमा ने शराब की दुकान के सामने धरने देने से लेकर पत्थर फेंकर विरोध भी किया। इससे ही पार्टी उनके इरादे समझ गई और उनके सामने झूकने को मजबूर हुई। सरकार ने उमा भारती की मांगों को मानते हुए नई शराब नीति में बदलाव किए।
भतीजे को मंत्री, करीबियों को दिलाया टिकट
भाजपा नेता उमा भारती को साधने के लिए हर जतन कर रहे हैं। हालांकि उनको सम्मान जनक पद देने में पार्टी अब तक असफल नजर आ रही है। इस बीच पार्टी ने उनके भतीजे राहुल सिंह लोधी को कैबिनेट में शामिल किया। इससे पहले हारी सीटों की पहली सूची में उनके करीबी प्रीतम लोधी को टिकट दिया। इन निर्णय को उमा को साधने वाला ही बताया जा रहा है।
2003 में उमा ने कराई थी सत्ता में वापसी
उमा भारती ने 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी ने उनको मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि 1994 के हुबली दंगों में गिरफ्तारी वारंट के चलते उमा भारती ने 2004 में तिरंगा यात्रा निकालते समय मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि वह आरोपों से बरी हो गई है।
कहां सेट करेगी पार्टी
वहीं, भाजपा के सामने अब चुनौती है कि उमा भारती को कहां सेट किया जाए। पार्टी की वह कद्दावर नेत्री हैं, इसलिए संगठन उनपर कुछ बोलने से बचता है। न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है। हालांकि सरकार और संगठन के लोग उमा भारती के भाव को समझ जरूर रहे हैं कि उनकी चाहत क्या है?
