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Bhopal News: जातिगत आरक्षण खत्म करने करणी सेना की हुंकार, नारे लगे- देख मामा कौन आया, माई के लाल-माई के लाल
Sun, 08 Jan 2023 08:48 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 08 Jan 2023 08:48 PM IST
सार
करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि सरकार ने हमारी मांगे पूरी नहीं की तो हम चुनावी राजनीति में प्रवेश करने से भी परहेज नहीं करेंगे। सर्वण और पिछड़ा वर्ग हमारे साथ है। हम व्यवस्था बदलने आंदोलन कर रहे हैं। हमारी मांगों पर सरकार ने विचार नहीं किया तो हम सत्ता बदल देंगे।
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भोपाल में करणी सेना का जनआंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने समेत 21 सूत्रीय मांगों को लेकर रविवार को करणी सेना परिवार ने जंबूरी मैदान पर हुंकार भरी। इस दौरान युवा हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे। यहां पर दो लाख से ज्यादा लोग एकत्रित हो गए। युवा मैदान में पोस्टर दिखा कर नारेबाजी करते दिखे- देख मामा कौन आया, माई के लाल, माई के लाल। बता दें सात साल पहले शिवराज सिंह चौहान ने बयान दिया था कि कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। इसके बाद 2018 में बीजेपी की सरकार सत्ता से चली गई थी। हालांकि बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल होने के बाद दोबारा शिवराज सीएम बनें। अब आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर एक बार फिर करणी सेना ने जनआंदोलन शुरू किया है।
जंबूरी मैदान में करणी सेना का जनआंदोलन में भारी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मांगे पूरी नहीं हुई तो सरकार बदल देंगे
करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि सरकार ने हमारी मांगे पूरी नहीं की तो हम चुनावी राजनीति में प्रवेश करने से भी परहेज नहीं करेंगे। सवर्ण और पिछड़ा वर्ग हमारे साथ है। हम व्यवस्था बदलने आंदोलन कर रहे हैं। हमारी मांगों पर सरकार ने विचार नहीं किया तो हम सत्ता बदल देंगे। बता दें करणी सेना जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग, ऐट्रोसिटी एक्ट समेत 21 सूत्रीय मांगों को लेकर जन आंदोलन कर रही हैं।
करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि सरकार ने हमारी मांगे पूरी नहीं की तो हम चुनावी राजनीति में प्रवेश करने से भी परहेज नहीं करेंगे। सवर्ण और पिछड़ा वर्ग हमारे साथ है। हम व्यवस्था बदलने आंदोलन कर रहे हैं। हमारी मांगों पर सरकार ने विचार नहीं किया तो हम सत्ता बदल देंगे। बता दें करणी सेना जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग, ऐट्रोसिटी एक्ट समेत 21 सूत्रीय मांगों को लेकर जन आंदोलन कर रही हैं।
जंबूरी मैदान में महिला कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद
- फोटो : अमर उजाला
लाखों कार्यकर्ता जंबुरी मैदान पहुंचे
करणी सेना परिवार के कार्यकर्ताओं का शनिवार सुबह से ही भोपाल पहुंचना शुरू हो गया था। इसमें प्रदेश के कई जिलों के साथ ही राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। यह लोग बस, ट्रक, ट्रेन समेत अपने वाहनों से भोपाल पहुंचे। यह अपने साथ ठहरने के इंतजाम के साथ पहुंचे। जंबुरी मैदान में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के होने का अनुमान लगाया गया है। प्रशासन की तरफ से करणी सेना को रविवार शाम 5 बजे तक की ही अनुमति दी गई है।
करणी सेना परिवार के कार्यकर्ताओं का शनिवार सुबह से ही भोपाल पहुंचना शुरू हो गया था। इसमें प्रदेश के कई जिलों के साथ ही राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। यह लोग बस, ट्रक, ट्रेन समेत अपने वाहनों से भोपाल पहुंचे। यह अपने साथ ठहरने के इंतजाम के साथ पहुंचे। जंबुरी मैदान में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के होने का अनुमान लगाया गया है। प्रशासन की तरफ से करणी सेना को रविवार शाम 5 बजे तक की ही अनुमति दी गई है।
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जंबूरी मैदान में महिला कार्यकर्ताओं के हाथ में बैनर और पोस्टर
- फोटो : अमर उजाला
कई रास्ते डायवर्ट किए
जंबुरी मैदान में लाखों लोगों के एकत्रित होने से भोपाल में कई रास्तों पर जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। पुलिस की तरफ से लोगों को परेशानी से बचाने के लिए पहले से ही रूट डायवर्ट किया गया। इसके बावजूद भेल के अंदर कई मार्गों पर जाम जैसे हालत निर्मित हो गए।
सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया
इससे पहले करणी सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि करणी सेना के आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने पूरे इंतजाम किए। कई जिलों में बसों को अनुमति नहीं दी गई। इसके चलते कार्यकर्ता जिलों में भी आंदोलन कर रही है। सरकार ने जनआंदोलन को दबाने के लिए हर तरह की कोशिश की। मुख्यमंत्री निवास में क्षत्रिय समागम किया गया। यह समाज के लोगों की अवाज को दबाने का असफल प्रयास साबित हुआ।
जंबुरी मैदान में लाखों लोगों के एकत्रित होने से भोपाल में कई रास्तों पर जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। पुलिस की तरफ से लोगों को परेशानी से बचाने के लिए पहले से ही रूट डायवर्ट किया गया। इसके बावजूद भेल के अंदर कई मार्गों पर जाम जैसे हालत निर्मित हो गए।
सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया
इससे पहले करणी सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि करणी सेना के आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने पूरे इंतजाम किए। कई जिलों में बसों को अनुमति नहीं दी गई। इसके चलते कार्यकर्ता जिलों में भी आंदोलन कर रही है। सरकार ने जनआंदोलन को दबाने के लिए हर तरह की कोशिश की। मुख्यमंत्री निवास में क्षत्रिय समागम किया गया। यह समाज के लोगों की अवाज को दबाने का असफल प्रयास साबित हुआ।
