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MP News: मध्य प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना
Fri, 31 Jan 2025 10:59 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 31 Jan 2025 10:59 PM IST
सार
विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग के एसीएस संजय दुबे ने बताया कि भारत पहले से ही वैश्विक जीसीसी परिदृश्य में अग्रणी है, और इस क्षेत्र में भारत की 50% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है। 2023 में यह सेक्टर 46 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक 110 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
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मध्य प्रदेश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भारत की पहली समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति 2025 लागू की है। यह नीति राज्य के टियर-2 शहरों जैसे भोपाल, इंदौर और ग्वालियर को वैश्विक परिचालन केंद्रों के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे व्यवसायों को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा। आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम इंवेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2023 की सफलता को ध्यान में रखते हुए यह नीति राज्य को एक सशक्त जीसीसी इको सिस्टम देने के लिए तैयार की गई है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग के एसीएस संजय दुबे ने बताया कि भारत पहले से ही वैश्विक जीसीसी परिदृश्य में अग्रणी है, और इस क्षेत्र में भारत की 50% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है। 2023 में यह सेक्टर 46 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक 110 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश के लिए यह उपयुक्त समय है, क्योंकि यह राज्य 2030 तक अनुमानित 2,400 से अधिक जीसीसी केंद्रों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए तैयार है।
जीसीसी नीति में आईटी/आईटीईएस, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम और अन्य तकनीकी क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। राज्य में पांच विशेष आर्थिक क्षेत्र और 15 से अधिक आईटी पार्क हैं, जो उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए समर्पित उत्कृष्टता केंद्रों से लैस हैं।
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राज्य की स्वच्छता और कम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) इसे व्यवसायों और पेशेवरों के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। कम यात्रा समय, किफायती जीवनयापन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी मध्य प्रदेश में व्यवसाय संचालन की लागत मेट्रो शहरों से काफी कम है, जिससे यह कंपनियों के लिए आकर्षक स्थल बनता जा रहा है।
राज्य ने निवेशकों को सिंगल विंडो क्लियरेंस की सुविधा भी प्रदान की है, जिससे निवेश और व्यवसाय स्थापना को सरल बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को 40% पूंजीगत सब्सिडी, किराया सहायता, पेरोल सब्सिडी, अपस्किलिंग व री-स्किलिंग सहायता, मार्केटिंग समर्थन और आरएंडडी खर्चों पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग के एसीएस संजय दुबे ने बताया कि भारत पहले से ही वैश्विक जीसीसी परिदृश्य में अग्रणी है, और इस क्षेत्र में भारत की 50% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है। 2023 में यह सेक्टर 46 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक 110 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश के लिए यह उपयुक्त समय है, क्योंकि यह राज्य 2030 तक अनुमानित 2,400 से अधिक जीसीसी केंद्रों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए तैयार है।
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जीसीसी नीति में आईटी/आईटीईएस, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम और अन्य तकनीकी क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। राज्य में पांच विशेष आर्थिक क्षेत्र और 15 से अधिक आईटी पार्क हैं, जो उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए समर्पित उत्कृष्टता केंद्रों से लैस हैं।
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राज्य की स्वच्छता और कम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) इसे व्यवसायों और पेशेवरों के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। कम यात्रा समय, किफायती जीवनयापन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी मध्य प्रदेश में व्यवसाय संचालन की लागत मेट्रो शहरों से काफी कम है, जिससे यह कंपनियों के लिए आकर्षक स्थल बनता जा रहा है।
राज्य ने निवेशकों को सिंगल विंडो क्लियरेंस की सुविधा भी प्रदान की है, जिससे निवेश और व्यवसाय स्थापना को सरल बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को 40% पूंजीगत सब्सिडी, किराया सहायता, पेरोल सब्सिडी, अपस्किलिंग व री-स्किलिंग सहायता, मार्केटिंग समर्थन और आरएंडडी खर्चों पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी।
