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MP News: IAS शैलबाल मार्टिन ने मंदिरों के ध्वनि प्रदूषण पर उठाए सवाल, हिंदू संगठन बोले- हस्तक्षेप ना करें
Mon, 21 Oct 2024 10:43 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 21 Oct 2024 10:43 AM IST
सार
मध्य प्रदेश की आईएएस अधिकारी शैलबाला मार्टिन ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या मंदिरों के लाउड स्पीकरों से ध्वनि प्रदूषण से किसी को कोई असुविधा नहीं होती? इस पर संस्कृति बचाव मंच ने ऐतराज जताया है। साथ ही कहा कि ऐसे मुद्दों पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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आईएएस शैलबाला मार्टिन और संस्कृति बचाव मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
धार्मिक स्थलों से ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर मध्य प्रदेश में चर्चा में है। प्रदेश की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शैलबाला मार्टिन ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मामले को लेकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने धार्मिक स्थलों, खासकर मंदिरों पर लगाए गए लाउड स्पीकरों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर सवाल उठाए हैं। शैलबाला मार्टिन, जो वर्तमान में जीएडी में एडिशनल सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं, ने एक ट्वीट का जवाब देते हुए मंदिरों से आधी रात तक बजने वाले लाउड स्पीकरों की आवाज से होने वाले असर को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंदिरों के लाउड स्पीकरों से ध्वनि प्रदूषण से किसी को कोई असुविधा नहीं होती? वहीं, आईएएस के सवाल पर संस्कृति बचाव मंच ने कड़ा ऐतराज जताया है। मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि इस प्रकार के विवाद में शैलबाला मार्जिन जी को नहीं पड़ना चाहिए।
मार्टिन की यह टिप्पणी उस ट्वीट पर आई, जिसमें मस्जिदों के बाहर तेज आवाज में बजने वाले डीजे पर सवाल उठाया गया था। उस ट्वीट में मस्जिदों से लाउड स्पीकर हटाने पर डीजे और नारेबाजी के बंद होने की संभावना पर चर्चा की गई थी। मार्टिन ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार मस्जिदों के लाउड स्पीकरों पर सवाल उठाए जाते हैं, उसी प्रकार मंदिरों के लाउड स्पीकरों से भी ध्वनि प्रदूषण होता है, और इसे भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पहले भी उठा चुकी है सवाल
शैलबाला मार्टिन ने इससे पहले भी X पर ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को उन्होंने भोपाल के चार इमली इलाके का जिक्र करते हुए कहा था कि वहां तेज आवाज में डीजे के साथ झांकियां निकाली गईं, जहां राज्य के मंत्री और पुलिस कमिश्नर रहते हैं, लेकिन इस पर कोई रोक नहीं लगाई गई। उनकी यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई, जिसमें मध्य प्रदेश में डीजे पर नाचते हुए 13 साल के एक बच्चे की मौत हो गई थी।
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मोहन सरकार ने पहला निर्णय लिया था
बता दें डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद ही पहला निर्णय धार्मिक स्थलों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने वाला लिया था, जिस पर काफी राजनीतिक बहस हुई थी। मार्टिन की इस टिप्पणी से एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे इस पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
संस्कृति बचाव मंच करेगा विरोध
संस्कृति बचाव मंच के अध्यक्ष पंडित चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शैलाबाला मार्टिन को विवाद में नहीं पड़ना चाहिए। हिंदू धर्म की आस्था को कोई ठेस पहुंचाने का काम करेगा तो संस्कृति बचाव मंच उसका विरोध करेगा। मंदिरों में सुरीली आवाज में आरती और मंत्रोचारण होता है। मार्टिन मैडम कह रही है कि डीजी और झांकी वाले जाकर नारे लगाते है। तिवारी ने सवाल पूछते हुए कहा कि उनको बताना चाहिए कि कब किसी मोहर्रम के जुलूस पर पथराव हुआ। कभी किसी मस्जिद के सामने कोई अनर्गल काम किया गया। आप देखेंगे कि रामनवमी, हनुमान जयंती के जुलूस पर पथराव हो रहा है। गरबे पर पथराव हो रहा है। उन्होंने शैलबाला मार्टिन से सवाल करते हुए कहा कि पूरे देश की घटनाओं का आकलन कीजिए। फिर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए। आपको कोई अधिकार नहीं है हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का।
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मार्टिन की यह टिप्पणी उस ट्वीट पर आई, जिसमें मस्जिदों के बाहर तेज आवाज में बजने वाले डीजे पर सवाल उठाया गया था। उस ट्वीट में मस्जिदों से लाउड स्पीकर हटाने पर डीजे और नारेबाजी के बंद होने की संभावना पर चर्चा की गई थी। मार्टिन ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार मस्जिदों के लाउड स्पीकरों पर सवाल उठाए जाते हैं, उसी प्रकार मंदिरों के लाउड स्पीकरों से भी ध्वनि प्रदूषण होता है, और इसे भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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पहले भी उठा चुकी है सवाल
शैलबाला मार्टिन ने इससे पहले भी X पर ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को उन्होंने भोपाल के चार इमली इलाके का जिक्र करते हुए कहा था कि वहां तेज आवाज में डीजे के साथ झांकियां निकाली गईं, जहां राज्य के मंत्री और पुलिस कमिश्नर रहते हैं, लेकिन इस पर कोई रोक नहीं लगाई गई। उनकी यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई, जिसमें मध्य प्रदेश में डीजे पर नाचते हुए 13 साल के एक बच्चे की मौत हो गई थी।
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मोहन सरकार ने पहला निर्णय लिया था
बता दें डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद ही पहला निर्णय धार्मिक स्थलों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने वाला लिया था, जिस पर काफी राजनीतिक बहस हुई थी। मार्टिन की इस टिप्पणी से एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे इस पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
संस्कृति बचाव मंच करेगा विरोध
संस्कृति बचाव मंच के अध्यक्ष पंडित चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शैलाबाला मार्टिन को विवाद में नहीं पड़ना चाहिए। हिंदू धर्म की आस्था को कोई ठेस पहुंचाने का काम करेगा तो संस्कृति बचाव मंच उसका विरोध करेगा। मंदिरों में सुरीली आवाज में आरती और मंत्रोचारण होता है। मार्टिन मैडम कह रही है कि डीजी और झांकी वाले जाकर नारे लगाते है। तिवारी ने सवाल पूछते हुए कहा कि उनको बताना चाहिए कि कब किसी मोहर्रम के जुलूस पर पथराव हुआ। कभी किसी मस्जिद के सामने कोई अनर्गल काम किया गया। आप देखेंगे कि रामनवमी, हनुमान जयंती के जुलूस पर पथराव हो रहा है। गरबे पर पथराव हो रहा है। उन्होंने शैलबाला मार्टिन से सवाल करते हुए कहा कि पूरे देश की घटनाओं का आकलन कीजिए। फिर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए। आपको कोई अधिकार नहीं है हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का।
