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MP News: प्रदेश का पहला स्टेट वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान अंग्रेजी में बनाने पर कठघरे में सरकार

Tue, 08 Aug 2023 11:54 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Tue, 08 Aug 2023 11:54 AM IST
सार

पहला स्टेट वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान बनाने वाली समिति में आदिवासियों और स्थानीय लोगों को भ शामिल नहीं किया गया। इसको लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव समेत अन्य संंबंधित अधिकारियों को शिकायत की गई है।  

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MP News: Government in the dock for making the state's first State Wildlife Action Plan in English
स्टेट वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान बनाने वाली समिति की शिकायत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश का पहला स्टेट वाइल्डलाइफ एक्शन प्लान जारी हो गया है। इसमें 2023 से 2043 तक वन्यजीवों की संख्या को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनाई है। इसमें संरक्षित वन क्षेत्र बनाने, उनके विकास और वन्य जीवों की सुरक्षा और पर्यटन को लेकर सभी बिंदु शामिल किए गए हैं, लेकिन अब प्लान बनाने वाली समिति ही सवालों के घेरे में हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव वन विभाग को इस कार्ययोजना को लेकर शिकायत की गई है।

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स्टेट वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान 29 जुलाई को जारी हुआ। इस प्लान को तैयार करने वाली समिति में किसी आदिवासी या स्थानीय व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया था। मध्य प्रदेश स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड में भी आदिवासी समुदाय के सदस्य शामिल हैं। समिति में केवल सरकारी अफसरों, रिटायर्ड अफसरों और शहरी क्षेत्रों में निवासरत गैर-सरकारी सदस्यों को शामिल किया गया। प्रदेश के वन क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करने से समिति के उद्देश्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसे प्रदेश में पेसा एक्ट का भी उल्लंघन बताया जा रहा है। प्लान को शहर के लोगों ने अंग्रेजी में तैयार किया है, जिस पर भी आपत्तियां आई हैं। 
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गैर-सरकारी सदस्य के चयन पर भी सवाल
शिकायत में वन विभाग के अधिकारियों ने समिति में चहेते अधिकारियों और विवादास्पद गैर-सरकारी लोगों के चयन पर भी सवाल खड़े हुए हैं। समिति में आर्थिक अनियमितता की जांच कर रही संस्थाओं के पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया था। वे नोटिस के जवाब देने से बच रहे हैं। ये पदाधिकारी नोटिस जारी करने वाले वन अधिकारियों के साथ बैठक में शामिल हो रहे हैं। 
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सीएम, सीएस, एससीएस को पहुंची शिकायत  
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि हिंदी भाषी राज्य में पहले तो जंगल में रहने वाले जानवरों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले लोगों को योजना बनाने में शामिल नहीं किया। दूसरा अंग्रेजी में प्लान तैयार किया गया। इसे अब तक वेबसाइट पर अपलोड भी नहीं किया गया। इस मामले में सीएम से लेकर संबंधित अधिकारियों को शिकायत की है। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया ने कहा कि अभी इस मामले में मुझे शिकायत नहीं मिली है। शिकायत के तथ्यों को देखकर आगे कार्रवाई की जाएगी। 


हिंदी में अनुवाद कराएंगे  
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ असीम श्रीवास्तव ने बताया कि अभी अंग्रेजी में रिपोर्ट है। उसका हिंदी में अनुवाद कराएंगे।  
 
नए संरक्षित क्षेत्रों की जरूरत बढ़ रही  
प्रदेश लगातार दूसरी बार टाइगर स्टेट बना है। बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे अभयारण्य, नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व के मैनेजमेंट को बेहतर बनाने की जरूरत बढ़ रही है। नए संरक्षित क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व करने जोर दिया जा रहा है। गांधी सागर अभयारण्य को नेशनल पार्क का दर्जा दिया जा सकता है। इस तरह वन्यजीवों की संख्या के आधार पर संरक्षित क्षेत्र की संख्या बढ़ाने के सुझाव रिपोर्ट में है।

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