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MP News: कांग्रेस में फ्रंटफुट पर बैटिंग कर रहे दिग्गी के भाई का आदिवासी के लिए बड़ा त्याग, किसे होगा फायदा
Tue, 21 Feb 2023 03:52 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Tue, 21 Feb 2023 03:52 PM IST
सार
लक्ष्मण सिंह ने कहा कि रायपुर में हो अधिवेशन में मेरे स्थान पर हीरा अलावा को आमंत्रित किया जाए। वो एक बड़े आदिवासी नेता हैं, उनके सहयोग से पहले भी सरकार बनी थी और अभी बनेगी। इससे प्रदेश की सियासत गरमा गई हैं।
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कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के चुनाव में आदिवासी वोटरों की भूमिका अहम होती है। कुछ सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं तो कुछ पर वो हार-जीत तय करते हैं। चुनाव नजदीक आते ही दोनों दल आदिवासी वोटरों को साधने में जुटे हुए हैं। सीएम शिवराज ने पहले ही पेसा एक्ट लागू कर बड़ा दांव चल दिया है। अब कांग्रेस में फ्रंटफुट पर बैटिंग कर रहे दिग्विजय सिंह के अनुज और चांचौड़ा से विधायक लक्ष्मण सिंह ने आदिवासियों के हित में पार्टी से बड़ी मांग की है। उन्होंने रायपुर में हो रहे कांग्रेस अधिवेशन में उनकी जगह आदिवासी नेता डॉ. हीरालाल अलावा को न्यौता देने की हाईकमान से गुहार लगाई है।
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मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव नवंबर में होने वाले हैं। इसके करीब आठ महीने पहले ही पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह सक्रिय हो गए हैं। सिंह लगातार जमीनी दौरे कर रहे हैं। उनका कांग्रेस मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ताओं तक सीधा संवाद है। 2018 में दिग्विजय ने 'पंगत में संगत' कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया था। अब एक बार फिर दिग्विजय सिंह जमीन पर उतर गए हैं। इस बीच, उनके छोटे भाई और विधायक लक्ष्मण सिंह ने आदिवासी नेता हीरालाल अलावा को रायपुर में हो रहे अधिवेशन में उनके स्थान पर आमंत्रित करने का पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया है। अलावा प्रदेश में तेजी से बड़े आदिवासी नेता के रूप में उभरे हैं। बकौल लक्ष्मणसिंह अलावा के सहयोग से प्रदेश में पहले भी कांग्रेस सरकार बनी थी और अब भी बनेगी। लक्ष्मणसिंह की इस पेशकश से प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
ये है आदिवासी वोट का गणित
मध्य प्रदेश की सियासत में आदिवासी वोटर बहुत महत्वपूर्ण हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की आबादी में करीब 22 फीसदी वोट अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासियों के हैं। इस वर्ग के लिए प्रदेश में 47 सीटें आरक्षित हैं। वहीं, करीब 80 सीटों पर आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2003 में भाजपा ने आरक्षित 41 में से 37 सीटों पर कब्जा किया था। इसके बाद 2008 में आरक्षित सीटें बढ़कर 47 हो गई। तब भी भाजपा ने 29 सीटों और 2013 में 31 सीटें जीती थी। 2018 में कांग्रेस ने 30 सीटें और भाजपा सिर्फ 16 सीटें जीत सकी थी। इस वजह से सत्ता छिटकर कांग्रेस के हाथ आ गई थी।
कौन हैं हीरालाल अलावा
जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन यानी जयस के संरक्षक हीरालाल अलावा वर्तमान में कांग्रेस से विधायक हैं। उन्होंने 2018 में 15 सालों से बीजेपी का गढ़ रही मनावर विधानसभा सीट पर बीजेपी की पूर्व मंत्री और विधायक रंजना बघेल को करीब 39 हजार वोटरों से हराया था। अलावा की आदिवासी वोटों पर जबरदस्त पकड़ मानी जाती है।
एम्स में डॉक्टर रह चुके हैं अलावा
मालवा में आदिवासी सीटों पर अलावा का अच्छा दखल है। चुनाव लड़ने से पहले हीरालाल अलावा एम्स दिल्ली में डॉक्टर और सहायक प्रोफेसर रह चुके हैं। अलावा ने एम्स में डॉक्टरी की पढ़ाई की और 2012 और 2015 तक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में नौकरी की। 2016 में उन्होंने नौकरी छोड़ कर मध्य प्रदेश में आदिवासियों की आवाज उठाने वाला संगठन जयस बनाया। अलावा अगले चुनाव में अकेले करीब 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं।
बीजेपी डाल रही अलावा पर डोरे
हीरालाल अलावा की शादी में शामिल होने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम कमलनाथ समेत कई नेता उनके गांव पहुंचे थे। बीजेपी अलावा पर लगातार ढोरे डाल रही है। यही नहीं कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव लाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में कई बार डॉ. हीरालाल अलावा का नाम लिया था। बीजेपी उनको अपने पाले में लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस अलावा को तरजीह देती नहीं दिख रही।
कांग्रेस कमेटी के सदस्यों में अलावा का नाम नहीं
कांग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश से बनाए गए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 99 सदस्यों की सूची में अलावा का नाम ही शामिल नहीं है। यह सूची रायपुर में 24 फरवरी से शुरू होने वाले कांग्रेस के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले जारी की गई है।
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रायपुर में हो रहे अधिवेशन में मेरे स्थान पर हीरा अलावा को आमंत्रित किया जाए।वो एक बड़े आदिवासी नेता हैं,उनके सहयोग से पहले भी सरकार बनी थी और अभी भी बनेगी। @INCIndia
— lakshman singh (@laxmanragho) February 21, 2023विज्ञापन
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ये है आदिवासी वोट का गणित
मध्य प्रदेश की सियासत में आदिवासी वोटर बहुत महत्वपूर्ण हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की आबादी में करीब 22 फीसदी वोट अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासियों के हैं। इस वर्ग के लिए प्रदेश में 47 सीटें आरक्षित हैं। वहीं, करीब 80 सीटों पर आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2003 में भाजपा ने आरक्षित 41 में से 37 सीटों पर कब्जा किया था। इसके बाद 2008 में आरक्षित सीटें बढ़कर 47 हो गई। तब भी भाजपा ने 29 सीटों और 2013 में 31 सीटें जीती थी। 2018 में कांग्रेस ने 30 सीटें और भाजपा सिर्फ 16 सीटें जीत सकी थी। इस वजह से सत्ता छिटकर कांग्रेस के हाथ आ गई थी।
कौन हैं हीरालाल अलावा
जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन यानी जयस के संरक्षक हीरालाल अलावा वर्तमान में कांग्रेस से विधायक हैं। उन्होंने 2018 में 15 सालों से बीजेपी का गढ़ रही मनावर विधानसभा सीट पर बीजेपी की पूर्व मंत्री और विधायक रंजना बघेल को करीब 39 हजार वोटरों से हराया था। अलावा की आदिवासी वोटों पर जबरदस्त पकड़ मानी जाती है।
एम्स में डॉक्टर रह चुके हैं अलावा
मालवा में आदिवासी सीटों पर अलावा का अच्छा दखल है। चुनाव लड़ने से पहले हीरालाल अलावा एम्स दिल्ली में डॉक्टर और सहायक प्रोफेसर रह चुके हैं। अलावा ने एम्स में डॉक्टरी की पढ़ाई की और 2012 और 2015 तक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में नौकरी की। 2016 में उन्होंने नौकरी छोड़ कर मध्य प्रदेश में आदिवासियों की आवाज उठाने वाला संगठन जयस बनाया। अलावा अगले चुनाव में अकेले करीब 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं।
बीजेपी डाल रही अलावा पर डोरे
हीरालाल अलावा की शादी में शामिल होने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम कमलनाथ समेत कई नेता उनके गांव पहुंचे थे। बीजेपी अलावा पर लगातार ढोरे डाल रही है। यही नहीं कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव लाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में कई बार डॉ. हीरालाल अलावा का नाम लिया था। बीजेपी उनको अपने पाले में लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस अलावा को तरजीह देती नहीं दिख रही।
कांग्रेस कमेटी के सदस्यों में अलावा का नाम नहीं
कांग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश से बनाए गए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 99 सदस्यों की सूची में अलावा का नाम ही शामिल नहीं है। यह सूची रायपुर में 24 फरवरी से शुरू होने वाले कांग्रेस के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले जारी की गई है।
